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नर और नारायण के रूप में किया था भगवान विष्णु ने बदरीनाथ धाम में तप, यहां जाने क्यों

बदरीनाथ में एक दिन की तपस्या का फल एक हज़ार साल की तपस्या के समान माना जाता है.

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चारों युगों में जिस बदरीनाथ धाम की महत्ता का वर्णन किया गया वहां भगवान विष्णु ने नर और नारायण रूप में तप किया था क्योंकि बदरीनाथ में एक दिन की तपस्या का फल एक हज़ार साल की तपस्या के समान माना जाता है. दुर्द्धम्भ राक्षस के वध के लिए भगवान ने यहां 100 दिन तक तपस्या की थी.

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धर्म रक्षतुः द्विजो नर नारायण, वधेश्च दुर्द्धम्भ राक्षसः  बदरी धाम की महत्ता अलौकिकता का ही परिणाम है कि यहां एक दिन की तपस्या का फल अन्य स्थानों में एक हज़ार वर्ष की तपस्या के फल के समान है इसी लिए सहस्रकवचधारी दुर्द्धम्भ नाम के राक्षस का वध करने के लिए भगवान विष्णु ने यहां नर और नारायण के रूप में तपस्या की थी.



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माना जाता था कि सहस्रनाम राक्षस के एक कवच का भेदन वही कर सकता था जिसने एक हज़ार वर्ष तप किया हो. इसलिए भगवान ने यहां नर-नारायण रूप में तपस्या की. एक दिन नारायण तप करते और नर युद्ध. एक दिन नर तप करते और नारायण युद्ध.

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कहा जाता है कि 99 कवच खंडित होने के बाद अंत कवच के साथ दुर्द्धम्भ राक्षस भाग कर सूर्य के पीछे छुप गया और सूर्य की शरण पाकर बच गया. बाद में द्वापर युग में उसने सूर्यपुत्र कर्ण के रूप में जन्म लिया. नर कवचधारी दुर्द्धम्भ को मारने के लिए नारायण ने भगवान कृष्ण और अर्जुन रूप में जन्म लिया.

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