निकाय चुनाव: नगर पंचायत से नगर पालिका बनी इस सीट पर हैं सभी की निगाहें

कार्यालय नगर पालिका परिषद, गौचर

कार्यालय नगर पालिका परिषद, गौचर

गौचर नगर पंचायत को 1988 में पहली बार नोटिफाइड एरिया घोषित किया गया. पहली बार नगर पंचायत चुनाव 1992 में हुआ, जिसमें निर्दलीय प्रत्याशी के रूप मे महाराज लिंगवाल ने जीत हासिल की थी.

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उत्तराखंड में होने वाला निकाय चुनाव जहां एक ओर सत्तारूढ़ भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है, तो वहीं कांग्रेस अपनी खोयी हुई जमीन वापस पाने के लिए इस निकाय चुनावों को प्रयोगशाला के रूप में ले रही है. अब देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले 18 नवम्बर को मतदाता किसके पक्ष में मतदान करते है.



इस दौरान चमोली जिले के 9 नगर निकायों में से पहली बार नगर पालिका बनी गौचर नगर पंचायत में यह देखना दिलचस्प होगा  कि इस बार भाजपा का खाता खुलता है या फिर इस बार भी कांग्रेस या निर्दलीय प्रत्याशी यहां जीत हासिल करने में कामयाब होते है.



गौचर नगर पंचायत को 1988 में पहली बार नोटिफाइड एरिया घोषित किया गया. पहली बार नगर पंचायत चुनाव 1992 में हुआ, जिसमें  निर्दलीय प्रत्याशी के रूप मे महाराज लिंगवाल ने जीत हासिल की थी. वहीं 1997 में भाजपा के धूमी लाल शाह ने जीत हासिल की, मगर उसके बाद जितने भी चुनाव यहां हुए उसमें कांग्रेस का ही वर्चस्व रहा.





इस नगर पंचायत को 2 016 में नगर पालिका परिषद बना दिया गया. यहां सबसे पहले किसकी छोटी सरकार बनेगी ये देखने वाली बात होगी. इस बार इस सीट पर जहां भाजपा की और से अंजू बिष्ट मैदान में है वहीं भाजपा में टिकट न मिलने से नाराज होकर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप मे मीना देवी चुनाव लड़ रही हैं, जबकि कांग्रेस की और से इंदू पंवार मैदान में  है.
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