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बाय-बाय गैरसैंण, अब 25 को मिलेंगे... परंपराएं तोड़, इतिहास गढ़ गया यह बजट सत्र

बजट सत्र 2503 तक के लिए स्थगित किए जाने के बाद विधानसभा परिसर में पक्ष-विपक्ष के विधायक.

बजट सत्र 2503 तक के लिए स्थगित किए जाने के बाद विधानसभा परिसर में पक्ष-विपक्ष के विधायक.

ग्रीष्मकालीन राजधानी की घोषणा के बाद मना ऐतिहासिक जश्न भी

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गैरसैंण. बजट पर चर्चा की औपचारिकता भर पूरी कर गैरसैंण में सदन को 25 मार्च सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया है. बजट सत्र अब 25 तारीख से फिर गैरसैंण में होगा. इस बार का सत्र गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किए जाने के लिए तो इतिहास में दर्ज हो गया है. इसके अलावा सत्र और भी बहुत सारी ऐसी बातें हुई हैं जिनके लिए इस सत्र को याद किया जाएगा.

परंपरा बदली, नियम जीता

इस बार बजट पेश किए जाने के बाद कांग्रेस विधायक क़ाज़ी निज़ामुद्दीन ने सदन में बजट में चर्चा अगले दिन ही करवाए जाने पर ऐतराज़ जताया था. उन्होंने नियमावली का हवाला देते हुए कहा था कि बजट पर चर्चा दो दिन बाद होनी चाहिए लेकिन उत्तराखंड में बजट पेश किए जाने के अगले दिन ही चर्चा किए जाने की परंपरा बन गई है जो ग़लत है.

उनके तर्क को स्वीकार करते हुए स्पीकर ने बजट पेश किए जाने के दो दिन बाद इस पर चर्चा की अनुमति दी. इसलिए बजट पेश किए जाने के दो दिन बाद यानी आज शनिवार को बजट पर चर्चा हुई. क़ाज़ी निज़ामुद्दीन ने इसके लिए स्पीकर का आभार भी जताया.

नहीं रुक पाए मंत्री, विधायक

नियमानुसार बजट पर दो दिन बाद चर्चा तो हुई लेकिन कांग्रेस ने इसे बेमानी बताया. दरअसल आज सदन में बीजेपी के आधे से ज़्यादा सदस्य थे ही नहीं. सरकार का प्रतिनिधित्व करने के लिए सिर्फ़ कार्यकारी संसदीय कार्य मंत्री मदन कौशिक ही मौजूद थे. उनके अलावा बीजेपी के 26 विधायक और थे. मुख्यमंत्री और बाकी मंत्रियों समेत बीजेपी के 30 विधायक आज सदन में पहुंचे ही नहीं थे.

कांग्रेस के सभी 11 विधायक सदन में मौजूद थे और इसलिए उसे यह कहने का मौका मिल गया कि बीजेपी गैरसैंण पर खोखली बातें कर रही है, वह इसे लेकर गंभीर नहीं है.

दरअसल बजट सत्र के चौथे दिन भी स्थिति बहुत उत्साहजनक नहीं थी. शुक्रवार को सत्र की कार्यवाही में सिर्फ़ एक मंत्री, मदन कौशिक और सत्ता पक्ष के 14 विधायक ही मौजूद रहे. बाकी के मंत्री सदन की कार्यवाही में शामील नहीं हुए. शुक्रवार को विपक्ष के 10 विधायक सदन में मौजूद थे.

ग्रीष्मकालीन राजधानी का जश्न

चार मार्च को मुख्यमंत्री के अप्रत्याशित ढंग से गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का ऐलान करने के बाद 5 तारीख की सुबह से गैरसैंण में जश्न का माहौल बन गया. स्थानीय लोग सुबह से ही विधानसभा परिसर में पहुंचने लगे थे और पारंपरिक वाद्यों की धुन पर लोकनृत्य शुरु हो गया था.

विधानसभा के बाहर विरोध प्रदर्शन हमेशा ही होते हैं यह पहली बार हुआ कि विधानसभा परिसर में लोग ख़ुशी से नाचते-गाते दिखे. यह भी पहली बार हुआ कि खुद मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और विधायक भी आम लोगों के साथ नाचते नज़र आए.

गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की वजह चाहे जो हो लेकिन इसके परिणाम दूरगामी होंगे और ऐसा जश्न शायद ही फिर कभी दिखे.

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