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चमोली आपदा में ऋषिगंगा नदी पर क्षतिग्रस्त पुल फिर बना, पांच मार्च से जनता के लिए खोला जाएगा

बीआरओ ने दिन-रात मेहनत कर तय समय से 15 दिन पहले ही इस पुल को बनाकर तैयार कर दिया है (फाइल फोटो)

बीआरओ ने दिन-रात मेहनत कर तय समय से 15 दिन पहले ही इस पुल को बनाकर तैयार कर दिया है (फाइल फोटो)

इस परियोजना के चीफ इंजीनियर ने बताया कि 40 टन वहन क्षमता वाले और 190 मीटर लंबे इस नए बेली ब्रिज को बनाने की समय सीमा 20 मार्च थी लेकिन बीआरओ ने इस पुल को दिन-रात एक कर तय समय से 15 दिन पहले ही बना दिया. राठौड़ ने बताया कि बेली ब्रिज का काम 25 फरवरी को शुरू किया गया था जिसे पूरा करने में 250 मजदूर और बीआरओ के 25 इंजीनियर दिन-रात जुटे रहे

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ऋषिकेश. उत्तराखंड के चमोली (Chamoli) जिले में पिछले माह आई प्राकृतिक आपदा में बह गए ऋषिगंगा नदी (Rishiganga River) के पुल को सीमा सड़क संगठन (BRO) ने फिर से बना दिया है. शुक्रवार पांच मार्च से इसे जनता के लिए फिर से खोल दिया जाएगा. यहां बीआरओ की शिवालिक परियोजना के चीफ इंजीनियर ए.एस राठौड़ ने बताया कि इस पुल के बनने से आपदा के बाद मुख्यधारा से कट गए चमोली जिले के 13 गांव एक बार फिर से जुड़ जाएंगे.

उन्होंने बताया कि 40 टन वहन क्षमता वाले और 190 मीटर लंबे इस नए बेली ब्रिज को बनाने की समय सीमा 20 मार्च थी लेकिन बीआरओ ने इस पुल को दिन-रात एक कर तय समय से 15 दिन पहले ही बना दिया. राठौड़ ने बताया कि बेली ब्रिज का काम 25 फरवरी को शुरू किया गया था जिसे पूरा करने में 250 मजदूर और बीआरओ के 25 इंजीनियर दिन-रात जुटे रहे. परीक्षण के बाद इस पुल को पांच मार्च से जनता के लिए खोल दिया जाएगा.

बता दें कि रविवार सात फरवरी की सुबह चमोली जिले के तपोवन में ग्लेशियर टूटने से भारी तबाही मची थी. इस हादसे के शिकार अभी तक बहत्तर लोगों के शव मिले हैं जबकि 200 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं. ग्लेशियर टूटने के चलते अलकनंदा नदी में भयानक बाढ़ आ गई थी जिससे कई इलाके प्रभावित हुए हैं. (भाषा से इनपुट)
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