चमोली का जिला अस्पताल बन कर रह गया है रेफर सेंटर, यहां नहीं है स्त्री व बाल रोग विशेषज्ञ

चमोली जिला मुख्यालय स्थित जिला अस्पताल में दूर दूर से गर्भवती महिलाएं अपना इलाज करवाने के लिए आती तो हैं मगर कई बार विपरीत परिस्थिति आते ही उन्हें बाहरी अस्पतालों में भेज दिया जाता है.

Prabhat Purohit | News18 Uttarakhand
Updated: December 7, 2018, 11:21 PM IST
चमोली का जिला अस्पताल बन कर रह गया है रेफर सेंटर, यहां नहीं है स्त्री व बाल रोग विशेषज्ञ
जिला चिकित्सालय गोपेश्वर,चमोली
Prabhat Purohit
Prabhat Purohit | News18 Uttarakhand
Updated: December 7, 2018, 11:21 PM IST
चमोली के जिला मुख्यालय गोपेश्वर में कहने को तो जिला अस्पताल है मगर यहां डॉक्टरों के नहीं होने के कारण यह रेफर सेंटर बनता जा रहा है. इसके चलते मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. कई बार जान जोखिम में पड़ने पर मरीजों को हायर सेंटरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं. वहीं शासन इसकी सुध नहीं ले रहा है.

चमोली जिला मुख्यालय स्थित जिला अस्पताल में दूर दूर से गर्भवती महिलाएं अपना इलाज करवाने के लिए आती तो हैं मगर कई बार विपरीत परिस्थिति आते ही उन्हें बाहरी अस्पतालों में भेज दिया जाता है. इसकी मुख्य वजह है यहां स्त्री रोग विशेषज्ञ का नहीं होना. यही नहीं यहां पिक्षले कई सालों से बाल रोग विशेषज्ञ भी नहीं है. यहां अक्सर गर्भवती महिलाओं को इलाज के लिए हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया जाता है. कई बार मरीजों को ऐसी स्थिति का भी सामना करना पड़ता है जब रास्ते में एंबुलेंस में ही बच्चे का जन्म हो जाता है.

राज्य सरकार पहाड़ों में डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के दावे कर रही है जबकि सीमांत जिला चमोली की स्थिति किसी से छुपी हुई नहीं है. यदि शासन द्वारा पहाड़ की रीढ़ कही जाने वाली महिलाओं और बच्चों के विशेषज्ञ डॉक्टर जिला अस्पताल में भेजे जाते तो शायद नंदी देवी को अपने नवजात को खोना नहीं पड़ता. बता दें कि हाल ही में नंदी देवी नामक महिला को सड़क पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा था. उसके बच्चे को बचाया नहीं जा सका. जरूरत है कि सरकार जल्द से जल्द चमोली के जिला अस्पताल में स्त्री और बाल रोग विशषज्ञ की नियुक्ति करे ताकि बच्चों और गर्भवती महिलाओं को बाहर के अस्पताओं के चक्कर काटने नहीं पड़े.

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