पर्यटन विभाग की लापरवाही, खंडहर में तब्दील हुए सरकार के इको हट

एक करोड़ 94 लाख की लागत से बने इको हट्स की विदेशी लकड़ी को फर्श पर आज नेपाली मजदूर रह रहे हैं. पिछले चार माह से नेपाली मजदूर ने लाखों रुपयों की लागत वाली विदेशी लकड़ी के फर्श पर अपना चूल्हा जला रहे हैं, लेकिन कोई जिम्मेदार इसे लेकर गंभीर नहीं है.

Prabhat Purohit | News18 Uttarakhand
Updated: August 23, 2018, 12:41 PM IST
पर्यटन विभाग की लापरवाही, खंडहर में तब्दील हुए सरकार के इको हट
चमोली में बनी टूरिज्म हट्स
Prabhat Purohit
Prabhat Purohit | News18 Uttarakhand
Updated: August 23, 2018, 12:41 PM IST
चमोली के देवलीबगड में उत्तराखंड सरकार ने भले ही पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार सृजन के लिए रिवर राफ्टिंग व इको हट बनाने की कवायद की थी, लेकिन अधिकारियों व ठेकेदारों की मिलीभगत के चलते ये इको हट बनने से पहले ही खंडहरों में तब्दील हो चुके हैं.

सरकार ने देवलीबगड में इको टूरिज्म हट्स बनाकर रोजगार सृजन की परिकल्पना की थी. सरकार ने पर्यटन को बढावा देकर क्षेत्र में रोजगार के अवसर तलाशने के मकसद से इन टूरिज्म हट्स को बनवाया था, लेकिन पर्यटन विभाग की लापरवाही व निर्माणदायी संस्था की लापरवाही से आज ये बनने से पहले ही खंडहर में बदल चुके हैं.

एक करोड़ 94 लाख की लागत से बने इको हट्स की विदेशी लकड़ी को फर्श पर आज नेपाली मजदूर रह रहे हैं. पिछले चार माह से नेपाली मजदूर ने लाखों रुपयों की लागत वाली विदेशी लकड़ी के फर्श पर अपना चूल्हा जला रहे हैं, लेकिन कोई जिम्मेदार इसे लेकर गंभीर नहीं है.

पर्यटन विभाग द्वारा साल 2016 में इसे एक करोड़ 94 लाख रुपये की लागत से जीएमवीएन के माध्यम से बनाया जा रहा है. भुगतान को पूरा हो गया, लेकिन निर्माण कार्य आज तक पूरा नहीं हुआ. आज यहां न तो पर्यटन विभाग है और न हीं जीएमवीएन संस्था. अवैध रूप से ठेकेदारों के मजदूरों ने इन टूरिज्म हट्स पर कब्जा जमाया हुआ है. विभागिय कर्मचारी इस शासन स्तर का मामला बताकर बोलने से बच रहे है, तो पर्यटन एक्सपर्ट्स इसे सराकरी खजाने की बर्बादी बता रहे हैं.

सरकार पहाड़ों में पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए इस तरह की योजनाओं को धरालत पर लाना चाह रही है, लेकिन शासन स्थर पर अधिकारियों की कारगुजारी के चलते सरकार के पर्यटन प्रदेश बनाने के मंसूबे जमींदोज हो रहे हैं. ये बनने से पहले ही खंडहर बने इन इको हट्स से बेहतर कौन बता सकता हैं.
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