धूं-धूं कर जल रहे हैं जंगल, आंखें बंद कर बैठा है वन विभाग

चमोली जिले के नंदप्रयाग रेंज का सोनला कंडारा सिलंगी से लगे वन क्षेत्र में चार पांच दिनों से लगी हुई है आग.

Prabhat Purohit | ETV UP/Uttarakhand
Updated: March 4, 2018, 8:56 AM IST
धूं-धूं कर जल रहे हैं जंगल, आंखें बंद कर बैठा है वन विभाग
नंदप्रयाग रेंज का सोनला कंडारा सिलंगी से लगे वन क्षेत्र में लगी आग.
Prabhat Purohit
Prabhat Purohit | ETV UP/Uttarakhand
Updated: March 4, 2018, 8:56 AM IST
उत्तराखंड में वनों को आग से बचाने के लिए वन विभाग भले ही कमर कसने की बात कह रहा हो, मगर विभाग की सारे बातें महज कागजों तक ही सीमित दिखाई दे रही हैं. दरअसल चमोली के कई जंगल ऐसे हैं जो पिछले चार- पांच दिनों से जल रहे हैं, मगर विभाग को कानो-कान खबर तक नहीं है या फिर विभाग आंख बंद कर चुपचाप बैठा हुआ है.

जंगल जल रहे है और विभाग आग बुझाने के लिए मीटिंग तक ही सीमित है. जिस तरह से चमोली में लगातार जंगल जल रहे हैं. उससे लगता कि जिला प्रसाशन या विभाग इसको लेकर गंभीर नहीं है जबकि फायर सीजन के नाम पर प्रस्तावित बजट के अनुमोदन के दिन विभाग और प्रशासन की तैयारी कागजों पर कुछ और ही थी.

चमोली जिले के नंदप्रयाग रेंज का सोनला कंडारा सिलंगी से लगे वन क्षेत्र में आग से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. मगर वन विभाग अभी तक सिर्फ स्थानीय लोगों की सहभागिता तक ही सीमित है. यहीं स्थिति नागनाथ रेंज के सैमी और बमोथ के मध्य लगे जंगलों में फैली आग का भी है. जबकि पूर्व में अधिकारी किस तरह आग से वनों को बचाने की बात कर रहे थे ये बात सभी को मालूम है.

जिस तरह से जंगल जल रहे हैं उससे न सिर्फ वन संपदा का नुकसान हो रहा है, बल्कि पर्यावरण के साथ ही वन्य जीव प्राणियों के जीवन पर भी संकट बना है. इसको लेकर पूर्व में हाईकोर्ट ने भी जिम्मेदारी तय कर चुका है.
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