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उत्तराखंड में 4 कमरों का 'इंटर कॉलेज', मान्यता तो दी लेकिन भवन निर्माण कराना भूल गए हुक्मरान

इंटर

इंटर कॉलेज के छात्र बरामदे में बैठकर पढ़ रहे हैं.

बारिश आ जाए तो कॉलेज के छात्र बरामदे में पढ़ाई से भी मोहताज हो जाते हैं.

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    उत्तराखंड के चमोली में प्रशासन की लापरवाही का बड़ा उदाहरण देखने को मिला है. गैरसैंण ब्लॉक और तहसील आदि बद्री स्थित सिलपाटा गांव का इंटर कॉलेज चार कमरों में चल रहा है. इस स्कूल को साल 2006 में हाईस्कूल और फिर 2014 में 12वीं कक्षा तक के लिए मान्यता मिल गई थी, लेकिन अभी तक यहां 9वीं से 12वीं कक्षा के लिए कोई भवन निर्माण नहीं हुआ है.

    वहीं जूनियर स्कूल का भवन बीते जून से भूस्खलन की वजह से क्षतिग्रस्त है. कक्षा 6 से 12वीं तक का संचालन रमसा के अंतर्गत बने चार कमरों से हो रहा है. कभी-कभी क्लास के बरामदे में भी बच्चों को पढ़ाया जाता है.

    बारिश आ जाए तो बच्चे बरामदे से भी मोहताज हो जाते हैं. इसी वजह से कई बार छात्रों की छुट्टी भी करनी पड़ती है. 7 साल से ज्यादा का समय और दो बार उच्चीकृत होने के बावजूद सरकार और प्रशासन ने जीआईसी सिलपाटा की कोई सुध नहीं ली, जबकि इस स्कूल में सिलपाटा गांव समेत आसपास के गांव पज्याना, मल्ला, लंगटाई, छिमटा, स्वामीकील के 183 बच्चे पढ़ते हैं.

    बड़ा सवाल यह भी है कि कैसे मानकों को पूरा किए बिना सिलपाटा के इस जूनियर स्कूल को जीआईसी का दर्जा मिल गया. इसके साथ ही जो नए कमरे रमसा के अंतर्गत बने हैं और जहां वर्तमान में कक्षाएं संचालित की जाती हैं, उसका भवन भी लैंडस्लाइड जोन में है, जिस वजह से यहां पढ़ने वाले स्टूडेंट्स के लिए खतरा भी बना हुआ है.

    जब न्यूज 18 लोकल की टीम ने गैरसैंण के खंड शिक्षा अधिकारी एमएस बिष्ट से जीआईसी सिलपाटा के बारे में जानकारी ली तो उन्होंने फोन पर बताया कि यह स्कूल स्लाइडिंग जोन में है और इसकी रिपोर्ट शासन को आगे भेज दी है. इस स्कूल के भवन निर्माण के लिए सुरक्षित जगह को देखा जा रहा है. जल्द ही कक्षाओं के लिए भवन का निर्माण किया जाएगा.

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