मुंदोली पहुंची नंदा लोक जात, भारी संख्या में श्रद्धालु हुए शामिल

Prabhat Purohit | News18 Uttarakhand
Updated: September 13, 2018, 2:10 PM IST
मुंदोली पहुंची नंदा लोक जात, भारी संख्या में श्रद्धालु हुए शामिल
नंदा देवी लोक जात हर साल जबकि नंदा देवी राज जात 12 साल में आती है. (फ़ोटो- सतेंद्र बर्तवाल)

हर साल होने वाली मां नंदा की यात्रा को लोकजात कहा जाता है जबकि हर बारह वर्ष में होने वाली बड़ी यात्रा को नंदा की बड़ी जात और राजजात यात्रा के नाम से जाना जाता है.

  • Share this:
गढ़वाल के 52 गढ़ों में शामिल बधाण और दशोली गढ़ की आराध्य देवी मां नंदा की लोक जात इन दिनों जारी है. नंदाधाम कुरुड़ से बेदिनीकुंड तक आयोजित होने वाली यह लोक जात कुरुड़ मंदिर से शुरू होकर फलडियागांव पहुंच चुकी है. आज मुन्दोली पड़ाव पार करने के बाद 16 सितम्बर को मां नंदा की लोक जात बेदिनी कुण्ड व बालपाटा में पूजा अर्चना के बाद सम्पन्न हो जाएगी. जिस तरह पहाड़ में बहन बेटी को मायके से ससुराल भेजे जाने की परम्परा निभाई जाती है ठीक उसी तरह भक्त मां नंदा को उनकी ससुराल कैलास हिमालय के लिए भेजते हैं, जिसे नंदा लोक जात के नाम से जाना जाता है.

मां नंदा की लोक जात में शामिल श्रद्धालु मां नंदा के गीतों से उनका आह्वान करते है और स्थानीय फल व अनाजों का भोग लगाते हैं. लोक जात की इस अनूठी परम्परा में शामिल होने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं.

देवभूमि उत्तराखंड में मां नंदा को गढ़-कुमाऊं देवी के नाम से भी जाना जाता है. हर साल होने वाली मां नंदा की यात्रा को लोक जात कहा जाता है जबकि हर बारह वर्ष में होने वाली बड़ी यात्रा को नंदा की बड़ी जात और राजजात यात्रा के नाम से जाना जाता है.

मां नंदा की इस यात्रा में जिस तरह से श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी है वह यह बताने के लिए काफ़ी है कि आज भी आस्था आधुनिकता व भौतिकता पर भारी है.

VIDEO: भारी बारिश से श्रद्धालुओं की यात्रा प्रभावित

25 अगस्त को बागेश्वर पहुंचेगी नंदा राजजात यात्रा 

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए चमोली से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: September 13, 2018, 1:46 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...