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चार धाम श्राइन बोर्ड के विरोध में उतरे मंदिरों के हक-हकूकधारी, सदियों पुरानी परंपराएं ख़त्म करने का आरोप लगाया

Prabhat Purohit | News18 Uttarakhand
Updated: December 2, 2019, 12:21 PM IST
चार धाम श्राइन बोर्ड के विरोध में उतरे मंदिरों के हक-हकूकधारी, सदियों पुरानी परंपराएं ख़त्म करने का आरोप लगाया
बदरीनाथ धाम के साथ ही जोशीमठ के पाडुंकेश्वर और अन्य मंदिरों से जुड़े हक-हकूक धारियों का कहना है कि इससे न सिर्फ पुरानी परम्पराओं का हनन होने का खतरा है बल्कि हक हकूकधारियों की कमाई का आधार भी खत्म हो जाएगा.

बदरीनाथ धाम समेत बाकी मंदिरों के हक-हकूकधारियों का कहना है कि अभी तो सरकार कह रही है कि उनके अधिकारों का हनन नहीं होगा लेकिन धीरे-धीरे सरकार सबके अधिकार मार लेगी.

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चमोली. चार धाम समेत 51 मंदिरों का ज़िम्मा श्राइन बोर्ड (shrine board) के सौंपे जाने के सरकार के फैसले पर विरोध तेज़ हो गया है. श्राइन बोर्ड के इस फैसले को लेकर स्थानीय हक-हकूकधारियों (loacal rights holders) में नाराज़गी तो थी ही सरकार के उनकी बातों, मांगों की ओर कतई ध्यान न दे जाने से अब ये लोग विरोध पर उतर आए है. बदरीनाथ (badrinath) धाम के साथ ही जोशीमठ (joshimath) के पाडुंकेश्वर (pandukeshwar temple) और अन्य मंदिरों से जुड़े हक-हकूक धारियों का कहना है कि इससे न सिर्फ पुरानी परम्पराओं का हनन होने का खतरा है बल्कि हक हकूकधारियों की कमाई का आधार भी खत्म हो जाएगा.

इसलिए सीएम की बात पर भरोसा नहीं 

बदरीनाथ-केदारनाथ धाम और अन्य मंदिरों के हक-हकूकधारी त्रिवेंद्र रावत सरकार के श्राइन बोर्ड के गठन से तो नाराज़ हैं ही इसके तरीके से भी नाराज़ हैं. स्थानीय हक-हकूकधारियों की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि इतना बड़ा फ़ैसला करने से पहले सरकार ने उन्हें विश्वास में नहीं लिया. यही वजह है कि ये लोग अब मुख्यमंत्री की भी किसी बात पर विश्वास करने को तैयार नहीं हैं.

बता दें कि जिस समय चार धाम मंदिरों के तीर्थ-पुरोहित और हक-हकूकधारी श्राइन बोर्ड के प्रस्तावित कानून के ड्राफ़्ट पर विचार कर रहे थे उसी समय सरकार ने श्राइन बोर्ड गठन करने का कैबिनेट में फ़ैसला कर लिया था. इसे तीर्थ पुरोहितों ने धोखा बताया और उनके आक्रोश के बाद चार धाम विकास परिषद के उपाध्यक्ष शिव प्रसाद ममगाईं ने इस्तीफ़ा तक दे दिया था.

ख़त्म कर देंगे परंपराएं 

अब बदरीनाथ धाम समेत बाकी मंदिरों के हक-हकूकधारियों का कहना है कि अभी तो सरकार कह रही है कि उनके अधिकारों का हनन नहीं होगा लेकिन धीरे-धीरे सरकार सबके अधिकार मार लेगी. सदियों से जिस परंपरा पर त्रिस्तरीय पूजा-पद्धति चल रही है उसे ख़त्म किया जाएगा और तीर्थ-पुरोहितों, हक-हकूकधारियों को दरकिनार कर दिया जाएगा.

बद्री-केदार मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष अनुसूया प्रसाद मैखुरी कहते हैं कि चार धाम में परम्पराओं के तहत होने वाली त्रिस्तरीय पूजाओं व हक हकूक को भी उत्तर प्रदेश अधिनियम 1939 के टेम्पल एक्ट में भी ख्याल रखा गया था और अब यहां इन परम्पराओं के  साथ छेड़छाड़ की जाती है तो इससे स्थानीय हक-हकूकधारियों के हक पर प्रभाव पड़ेगा.
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First published: December 2, 2019, 12:21 PM IST
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