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बिहार के बाद उत्तराखंड में महागठबंधन की तैयारी में सपा

बिहार के बाद उत्तराखंड में महागठबंधन की तैयारी में सपा

बिहार में महागठबंधन को मिली भारी जीत से सपा उत्साहित है. सपा उत्तराखंड में उसी की तर्ज पर महागठबंधन बनाने की वकालत कर रही है. पार्टी का कहना है कि एक समान विचारधारा की सभी राजनीति पार्टियों को एक मंच पर आना होगा, तभी सांप्रदायिक ताकतों को नेस्तनाबूद किया जा सकता है .

बिहार में महागठबंधन को मिली भारी जीत से सपा उत्साहित है. सपा उत्तराखंड में उसी की तर्ज पर महागठबंधन बनाने की वकालत कर रही है. पार्टी का कहना है कि एक समान विचारधारा की सभी राजनीति पार्टियों को एक मंच पर आना होगा, तभी सांप्रदायिक ताकतों को नेस्तनाबूद किया जा सकता है .

बिहार में महागठबंधन को मिली भारी जीत से सपा उत्साहित है. सपा उत्तराखंड में उसी की तर्ज पर महागठबंधन बनाने की वकालत कर रही है. पार्टी का कहना है कि एक समान विचारधारा की सभी राजनीति पार्टियों को एक मंच पर आना होगा, तभी सांप्रदायिक ताकतों को नेस्तनाबूद किया जा सकता है .

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    बिहार में महागठबंधन को मिली भारी जीत से सपा उत्साहित है. सपा उत्तराखंड में उसी की तर्ज पर महागठबंधन बनाने की वकालत कर रही है. पार्टी का कहना है कि एक समान विचारधारा की सभी राजनीति पार्टियों को एक मंच पर आना होगा, तभी सांप्रदायिक ताकतों को नेस्तनाबूद किया जा सकता है .

    यूपी के कैबिनेट दर्जा मंत्री विनोद बड़थ्वाल का कहना है कि उत्तराखंड में समाजवादी पार्टी विधानसभा चुनाव में कोई अहम रोल नहीं निभा पा रही है, ऐसे में पार्टी अब बिहार की तर्ज पर महागठबंधन बनाने की तैयारी कर रही है और जिससे पार्टी विधानसभा चुनाव में अहम रोल निभा सकें.

    सपा का कहना है कि प्रदेश में कई ऐसे राजनीतिक दल हैं, जो समान विचारधारा के हैं, लेकिन वो अलग-अलग बैनर तले चुनाव लड़ते हैं. उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है कि ऐसे सभी राजनीतिक दलों को एक मंच पर आना होगा.

    दरअसल प्रदेश में सपा का लगातार जनाधार गिराता जा रहा है. पार्टी ऊधमसिंहनगर और हरिद्वार के साथ राजधानी देहरादून के कुछ इलाकों तक सिमट कर रह गई है. वहीं विनोद बड़थ्वाल का कहना है कि पार्टी अब नए राजनीतिक समीकरण को विकसित करने का प्लान बना रही है, जिससे प्रदेश में सांप्रदायिक ताकतों को सत्ता में पहुंचने से रोका जा सकें.

    उनका कहना है कि उत्तराखंड राज्य की भौगोलिक स्थितियां काफी विपरीत है और ऐसे में वो पार्टी के केंद्रीय नेत़त्व से बात करेंगे, जिससे प्रदेश में नए राजनीतिक समीकरण को बनाया जा सकें. उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, दलों में भी नया ध्रुवीकरण हो रहा है.

    प्रदेश में सपा राजनीतिक दल के तौर पर काफी कमजोर स्थिति में है, ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि कांग्रेस और भाजपा किसी महागठबंधन की वकालत नहीं कर रहे हैं तो दूसरे दल जिनका जनाधार नहीं है अगर वो आते हैं तो क्या महागठबंधन की कवायाद गुल खिला पाएगी.

     

    Tags: Samajwadi party

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