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Glacier Burst in uttrakhand: CM त्रिवेंद्र रावत का ऐलान, आपदा में शिकार होने वाले लोगों के परिवार को मिलेगा 4-4 लाख का मुआवजा

Glacier Burst in uttrakhand: CM त्रिवेंद्र रावत का ऐलान, आपदा में शिकार होने वाले लोगों के परिवार को मिलेगा 4-4 लाख का मुआवजा

चमोली में ऋषिगंगा बांध टूटने से मचा हाहाकार.

उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत (CM Trivendra Singh Rawat) ने आपदा में जान गंवाने लोगों के परिवार वालों को 4-4 लाख रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया है.

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चमोली. उत्तराखंड के चमोली जिले में हिमखंड टूटने (Glacier Burst in Uttrakhand) से नदियों में आयी बाढ़ से क्षतिग्रस्त एनटीपीसी की निर्माणाधीन 480 मेगावाट तपोवन-विष्णुगाड पनबिजली परियोजना की एक सुरंग में अभी 170 के करीब लोगों के फंसे होने की आशंका है. जबकि अभी तक 16 लोगों का रेस्क्यू हो चुका है, तो वहीं सात लोगों के शव मिले हैं. इस बीच उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत (CM Trivendra Singh Rawat) ने इस आपदा में जान गंवाने लोगों के परिवार वालों को 4-4 लाख रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया है.

इसके अलावा सीएम रावत ने कहा कि हमारी सेना के लोग वहां पहुंच गए हैं. एनडीआरएफ ( NDRF) की एक टीम दिल्ली से यहां पहुंची है. मेडिकल सुविधा की दृष्टि से वहां सेना, पैरामिलिट्री फोर्सेज और हमारे राज्य के डॉक्टर कैंप किए हुए हैं. जबकि हमने वहां का हवाई सर्वे किया. इसके बाद रेणी गांव जहां तक जाया जा सकता है, वहां तक रोड से जाकर जायजा लिया है. इससे पहले रावत ने बताया कि आईटीबीपी के जवान रस्सी से सुरंग के अंदर 150 मीटर तक पहुंचे हैं. जबकि यह सुरंग लगभग 250 मीटर लंबी है.

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के मुताबिक, 13 मेगावाट के ऋषिगंगा पॉवर प्रोजेक्ट में 35 लोग काम करते थे और सभी लापता हैं. इसके अलावा उत्तराखंड पुलिस के दो जवान भी लापता हैं. जबकि तपोवन पॉवर प्रोजेक्ट में 176 श्रमिक काम कर रहे थे. इस क्षेत्र में एक बड़े और चार छोटे पुलों को नुकसान पहुंचा है. वहीं, अपनी 180 भेड़ और बकरियों के साथ पांच स्थानीय चरवाहे भी बाढ़ में बह गए हैं. हम मान रहे हैं कि लगभग 125 लोग लापता हैं. हालांकि यह संख्या अधिक हो सकती है.

राज्य आपदा प्रबंधन केंद्र के मुताबिक, आज उत्तराखंड में ग्लेशियर टूटने की घटना में 7 लोगों की मौत हुई है, 6 लोग घायल और लगभग 170 लोग लापता हैं.

इस बीच, एनटीपीसी के महाप्रबंधक आरपी अहीरवाल ने बताया कि निर्माणाधीन परियोजना को बाढ़ से बहुत नुकसान पहुंचा है. उन्होंने कहा कि हालांकि वास्तविक आकलन करने में अभी समय लगेगा लेकिन बाढ़ के पानी के बैराज के ऊपर से बह जाने के कारण वह काफी क्षतिग्रस्त हो गया है. यह परियोजना धौलीगंगा के उपर बन रही है. इसके अलावा, बाढ से बिजली उत्पादन कर रही 13.2 मेगावाट की ऋषिगंगा पनबिजली परियोजना भी पूरी तरह से खत्‍म हो गई है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया दुख
चमोली में आई आपदा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जाहिर किया है. इसके साथ ही आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के प्रियजनों को 2 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायल लोगों को 50 हजार रुपये के मुआवजे का ऐलान किया है. प्रधानमंत्री ने हल्दिया में एक रैली के दौरान कहा कि आज हम मां गंगा के एक छोर पर हैं, लेकिन जो मां गंगा का उद्गम स्थल है, वो राज्य उत्तराखंड इस समय आपदा का सामना कर रहा है. मैं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री, देश के गृहमंत्री और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के अफसरों के निरंतर संपर्क में हूं. वहां पर राहत और बचाव का कार्य चल रहा है और प्रभावित लोगों की मदद का हर प्रयास किया जा रहा है. प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के लोगों की जुझारू भावना की सराहना की और कहा कि पूरा देश उनके लिये प्रार्थना कर रहा है.

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उत्तराखंड में 4 कमरों का 'इंटर कॉलेज', मान्यता तो दी लेकिन भवन निर्माण कराना भूल गए हुक्मरान

उत्तराखंड में 4 कमरों का 'इंटर कॉलेज', मान्यता तो दी लेकिन भवन निर्माण कराना भूल गए हुक्मरान

बारिश आ जाए तो कॉलेज के छात्र बरामदे में पढ़ाई से भी मोहताज हो जाते हैं.

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उत्तराखंड के चमोली में प्रशासन की लापरवाही का बड़ा उदाहरण देखने को मिला है. गैरसैंण ब्लॉक और तहसील आदि बद्री स्थित सिलपाटा गांव का इंटर कॉलेज चार कमरों में चल रहा है. इस स्कूल को साल 2006 में हाईस्कूल और फिर 2014 में 12वीं कक्षा तक के लिए मान्यता मिल गई थी, लेकिन अभी तक यहां 9वीं से 12वीं कक्षा के लिए कोई भवन निर्माण नहीं हुआ है.

वहीं जूनियर स्कूल का भवन बीते जून से भूस्खलन की वजह से क्षतिग्रस्त है. कक्षा 6 से 12वीं तक का संचालन रमसा के अंतर्गत बने चार कमरों से हो रहा है. कभी-कभी क्लास के बरामदे में भी बच्चों को पढ़ाया जाता है.

बारिश आ जाए तो बच्चे बरामदे से भी मोहताज हो जाते हैं. इसी वजह से कई बार छात्रों की छुट्टी भी करनी पड़ती है. 7 साल से ज्यादा का समय और दो बार उच्चीकृत होने के बावजूद सरकार और प्रशासन ने जीआईसी सिलपाटा की कोई सुध नहीं ली, जबकि इस स्कूल में सिलपाटा गांव समेत आसपास के गांव पज्याना, मल्ला, लंगटाई, छिमटा, स्वामीकील के 183 बच्चे पढ़ते हैं.

बड़ा सवाल यह भी है कि कैसे मानकों को पूरा किए बिना सिलपाटा के इस जूनियर स्कूल को जीआईसी का दर्जा मिल गया. इसके साथ ही जो नए कमरे रमसा के अंतर्गत बने हैं और जहां वर्तमान में कक्षाएं संचालित की जाती हैं, उसका भवन भी लैंडस्लाइड जोन में है, जिस वजह से यहां पढ़ने वाले स्टूडेंट्स के लिए खतरा भी बना हुआ है.

जब न्यूज 18 लोकल की टीम ने गैरसैंण के खंड शिक्षा अधिकारी एमएस बिष्ट से जीआईसी सिलपाटा के बारे में जानकारी ली तो उन्होंने फोन पर बताया कि यह स्कूल स्लाइडिंग जोन में है और इसकी रिपोर्ट शासन को आगे भेज दी है. इस स्कूल के भवन निर्माण के लिए सुरक्षित जगह को देखा जा रहा है. जल्द ही कक्षाओं के लिए भवन का निर्माण किया जाएगा.

चमोली में 'कुटकी' की खेती कर रहे किसान, नीदरलैंड-अमेरिका में भी इस औषधीय पौधे की मांग

चमोली में 'कुटकी' की खेती कर रहे किसान, नीदरलैंड-अमेरिका में भी इस औषधीय पौधे की मांग

चमोली जिले के घेस गांव में किसान औषधीय गुणों से युक्त कुटकी पौधे की खेती कर रहे हैं.

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चमोली जिले के देवाल ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले घेस गांव के किसान पिछले 20 वर्षों से औषधीय गुणों से युक्त पौधे कुटकी की खेती कर अच्छी-खासी आमदनी कर रहे हैं. कुटकी का पौधा बुखार, टॉयफॉयड, टीबी, बवासीर, बदन दर्द, डायबिटीज, सूखी खांसी, शरीर में जलन, पेट के कीड़े, मोटापा, जुकाम आदि रोगों के उपचार में फायदेमंद है.

दवाई बनाने में प्रयोग होने वाली कुटकी की डिमांड देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक से आ रही है. घेस गांव से कुटकी नीदरलैंड तक भेजी जा रही है और अब अमेरिका से भी इसकी मांग आने लगी है.

बता दें कि सेना से रिटायर होने के बाद कैप्टन केशर सिंह बिष्ट ने घेस गांव में कुटकी की खेती शुरू की थी. जिसके बाद 2001 से गांव के किसानों ने भी इसकी खेती करनी शुरू कर दी. वहीं किसान अब कुटकी के अलावा अतीश, जटामासी सहित कई प्रकार की जड़ी-बूटी की खेती भी कर रहे हैं.

करीब 700 नाली से ज्यादा जमीन में घेस और हिमनी गांव के किसान जड़ी-बूटी उगा रहे हैं. घेस के पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य कलम सिंह पटाकी ने बताया कि वैसे तो पिछले 20 साल से गांव में कुटकी की खेती की जा रही है, लेकिन कोरोना काल में लौटे प्रवासियों समेत सभी गांव के लोगों ने इसकी खेती करना शुरू कर दिया है, जिसका उनको काफी फायदा मिला है. वर्तमान में कुटकी लगभग 1500 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है.

इस मंदिर में आंख पर पट्टी बांधकर होते है भगवान के दर्शन

इस मंदिर में आंख पर पट्टी बांधकर होते है भगवान के दर्शन

लाटू देवता मंदिर के पुजारी को भी पूजा के विशेष नियमों को मानते हुए नाक, कान और आंखों पर पट्टी बांधकर अंदर जाना होता है.

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क्या आप जानते हैं, उत्तराखंड के चमोली जिले में एक ऐसा मंदिर भी है, जहां श्रद्धालु आस्था के साथ जाते तो जरूर हैं लेकिन भगवान के दर्शन नहीं कर सकते. चमोली के देवाल ब्लॉक के वाण गांव में 8500 फीट की ऊंचाई पर लाटू देवता का मंदिर एक ऐसा रहस्यमयी मंदिर है, जहां न महिलाओं को और न ही पुरुषों को मंदिर के अंदर जाने की इजाजत है. यहां तक कि मंदिर के पुजारी भी भगवान के दर्शन नहीं कर सकते.

लाटू देवता मंदिर के पुजारी को भी पूजा के विशेष नियमों को मानते हुए नाक, कान और आंखों पर पट्टी बांधकर अंदर जाना होता है.

स्थानीय लोगों का मानना है कि इस मंदिर में नागराज अपनी मणि के साथ रहते हैं. मणि की तेज रोशनी से इंसान अंधा भी हो सकता है. यही नहीं, पुजारी के मुंह की गंध तक देवता तक नहीं पहुंचनी चाहिए और नागराज की विषैली गंध पुजारी की नाक तक पहुंचनी चाहिए. वहीं इस मंदिर में श्रद्धालु 75 फीट की दूरी से पूजा-अर्चना करते हैं.

पौराणिक कथाओं के अनुसार, लाटू देवता उत्तराखंड की आराध्या देवी मां नंद के धर्म भाई हैं. जब देवी पार्वती के साथ भगवान शिव का विवाह हुआ तो पार्वती जिन्हें नंदा देवी नाम से भी जाना जाता है, को विदा करने के लिए सभी भाई कैलाश की ओर चल पड़े. इसमें चचेरे भाई लाटू भी शामिल थे.

रास्ते में लाटू देवता को इतनी प्यास लगी कि वह पानी के लिए इधर-उधर भटकने लगे. उन्हें एक कुटिया दिखी तो वह वहां पानी पीने चले गए. कुटिया में एक साथ दो मटके रखे थे, एक में पानी था और दूसरे में मदिरा. लाटू देवता ने गलती से मदिरा पी ली और उत्पात मचाने लगे. इससे देवी पार्वती को गुस्सा आ गया और उन्होंने लाटू देवता को श्राप दे दिया. बता दें कि इस मंदिर के द्वार साल में एक बार वैशाख महीने की पूर्णिमा पर खुलते हैं.

चमोली : बादल फटने से घरों में घुसा मलबा, लोगों ने भागकर बचाई जान

चमोली : बादल फटने से घरों में घुसा मलबा, लोगों ने भागकर बचाई जान

भारी बारिश ने पहाड़ों पर आफत मचाई हुई है. जगह-जगह भूस्खलन की घटनाएं सामने आ रही हैं.

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भारी बारिश ने पहाड़ों पर आफत मचाई हुई है. जगह-जगह लोग भूस्खलन के चलते डर के साये में जीने को मजबूर हैं. चमोली जिले के नारायणबगड़ में बादल फटने से स्थानीय लोगों का जन-जीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया. रिहायशी इलाकों में मलबा आ गया. लोगों ने भागकर अपनी जान बचाई.

बारिश की वजह से भूस्खलन के बाद मलबा बहता हुआ रिहायशी इलाके में आ गया. एक मकान और गौशाला मलबे की जद में आ गई. डौंडियाल परिवार और उनके किराएदारों का भी लाखों का सामान मलबे की चपेट में आ गया.

प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा तो लिया, लेकिन मलबे को हटाने का कोई इंतजाम नहीं किया. जिसके बाद स्थानीय लोग खुद मलबे को हटाने में जुट गए.

पीड़ित शिवानी ढौंडियाल ने प्रशासन से पुनर्वास और क्षतिग्रस्त मकान के मुआवजे की मांग की है. तहसीलदार थराली रवि साह ने इस बारे में कहा कि नियमों के तहत पीड़ित परिवार को पांच महीने तक 3800 रुपये का मुआवजा दिया जाएगा.

शिक्षक दिवस : जज्बे को सलाम! 20 साल की शिवानी ने बच्चों के लिए शुरू की 'मेरा घर, मेरी पाठशाला'

शिक्षक दिवस : जज्बे को सलाम! 20 साल की शिवानी ने बच्चों के लिए शुरू की 'मेरा घर, मेरी पाठशाला'

गोपेश्वर के कटूड़ की रहने वालीं 20 वर्षीय शिवानी बिष्ट की पहल ने बच्चों की पढ़ाई में संजीवनी का काम किया.

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कोरोना काल में हर क्षेत्र को मुश्किलों का सामना करना पड़ा है. वहीं शिक्षा के क्षेत्र पर कुछ ज्यादा ही असर पड़ा है. खासकर छोटे बच्चों की शिक्षा पर, जो ऑनलाइन माध्यम से भी ठीक तरह से पढ़ाई नहीं कर पाते, लेकिन शिक्षक दिवस के अवसर पर हम आपको गोपेश्वर के कटूड़ की एक ऐसी 20 वर्षीय लड़की से रूबरू करवाते हैं, जिसकी पहल ने बच्चों की पढ़ाई में संजीवनी का काम किया.

गोपेश्वर पीजी कॉलेज की एमएससी की छात्रा शिवानी बिष्ट ने जब स्कूल बंद होने के कारण अपने गांव के स्कूली बच्चों की पढ़ाई में कोरोना को बाधा बनते देखा, तो शिवानी ने खुद बीड़ा उठाते हुए बच्चों को पढ़ाना शुरू किया और वह भी निशुल्क.

इस नेक काम में गांव के ही समाजसेवी सुनील नाथन बिष्ट ने उनका साथ दिया. दोनों ने मिलकर गांव में ही \’मेरा घर, मेरी पाठशाला\’ खोली और गांव सहित आसपास के बच्चों की शिक्षा में योगदान दिया.

हालांकि अब उत्तराखंड में स्कूल खुलने लगे हैं लेकिन फिर भी शिवानी बिष्ट बच्चों को गांव के पंचायती भवन में शाम को पढ़ा रही हैं और पहले जहां वह कोरोना में निशुल्क पढ़ा रही थीं, अब उन्हें ग्रामीण अपनी ओर से प्रोत्साहन राशि देकर भी सहयोग कर रहे हैं.

देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की मांग पर अड़े केदारनाथ के तीर्थ पुरोहित, अनशन जारी

देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की मांग पर अड़े केदारनाथ के तीर्थ पुरोहित, अनशन जारी

तीर्थ पुरोहितों ने अनशन के दौरान जमकर नारेबाजी की. पुरोहितों ने कहा कि सरकार इतना लंबा समय गुजर जाने के बाद भी कोई पहल नहीं कर रही है.

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देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की मांग को लेकर तीर्थ पुरोहितों का आंदोलन चारों धामों सहित मुख्य मंदिरों में बढ़ता जा रहा है. पिछले दो महीने से केदारनाथ धाम में तीर्थ पुरोहित देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की मांग को लेकर परिजनों समेत आंदोलन में कूद गए हैं. वहीं गुरुवार को भी केदारनाथ धाम में देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की मांग को लेकर तीर्थ पुरोहितों का क्रमिक अनशन जारी रहा.

तीर्थ पुरोहितों ने अनशन के दौरान जमकर नारेबाजी की. पुरोहितों ने कहा कि सरकार इतना लंबा समय गुजर जाने के बाद भी कोई पहल नहीं कर रही है. तीर्थ पुरोहित लगातार अपना विरोध सरकार के सामने व्यक्त कर रहे हैं लेकिन उनकी मांग पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं हो सकी है.

उन्होंने कहा कि जब तक देवस्थानम बोर्ड भंग नहीं किया जाता आंदोलन चारों धामों में जारी रहेगा. बता दें कि दो साल पहले तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में देवस्थानम बोर्ड का गठन किया गया था. बोर्ड में उत्तराखंड के चार धाम बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री ओर यमुनोत्री सहित कुल 51 मंदिर शामिल किए गए थे. केदारनाथ में बोर्ड का गठन होने से पहले केदारनाथ मंदिर का संचालन बद्री केदार मंदिर समिति करती थी. केदारनाथ की सभी व्यवस्थाएं मंदिर समिति देखती थी लेकिन बोर्ड का गठन होने के बाद केदारनाथ धाम की सभी व्यवस्थाएं सरकार और प्रशासन के अधीन आ गई, जिससे तीर्थ पुरोहित और हक हकूकधारी नाराज हैं.

वहीं देवस्थानम बोर्ड को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हाई पॉवर कमेटी के गठन की घोषणा कर चुके हैं. इस घोषणा को 15 दिन से अधिक का समय हो चुका है, बावजूद इसके अभी तक हाईपॉवर कमेटी गठन का विधिवत आदेश जारी नहीं हुआ है.

देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की जयंती यानी 20 अगस्त को \’सद्भावना दिवस\’ के रूप में मनाया जाता है. इसकी पूर्व बेला पर चमोली के जिलाधिकारी हिमांशु खुराना ने क्लेक्ट्रेट परिसर में अधिकारियों व कर्मचारियों को जाति, सम्प्रदाय, क्षेत्र, धर्म तथा भाषा का भेदभाव किए बिना सभी भारतवासियों की भावनात्मक एकता और सद्भावना को अक्षुण्ण रखने और हिंसा का सहारा लिए बिना सभी प्रकार के मतभेद बातचीत और संवैधानिक माध्यम से सुलझाने की शपथ दिलाई. जनपद के समस्त विभागों में भी अधिकारियों व कर्मचारियों ने \’सद्भावना दिवस\’ पर देश की एकता, अखंडता व आपसी सद्भावना को बरकार रखने की शपथ ली गई.

चमोली : हाट में मकानों को गिराने पहुंचा प्रशासन, ग्रामीणों ने की आत्मदाह की कोशिश

चमोली : हाट में मकानों को गिराने पहुंचा प्रशासन, ग्रामीणों ने की आत्मदाह की कोशिश

विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना के पावर हाउस साइड पर परियोजना प्रभावित हाट गांव में आवासीय मकानों को ध्वस्त करने पहुंची.

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विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना के पावर हाउस साइड पर परियोजना प्रभावित हाट गांव में आवासीय मकानों को ध्वस्त करने पहुंची प्रशासन की टीम को ग्रामीणों का आक्रोश झेलना पड़ा. अधिकारियों के सामने ही युवक मंगल दल के अध्यक्ष अमित गैरोला, ज्येष्ठ प्रमुख पंकज हटवाल, सागर, भावना देवी और प्रभा देवी ने अपने ऊपर डीजल छिड़ककर आग लगाने की कोशिश की. पुलिस की टीम और ग्रामीणों ने उनके हाथों से तेल छीन लिया और उन्हें मौके से हटा दिया गया, जिससे बड़ी दुर्घटना होने से बच गई. हाट गांव के ग्रामीणों ने विस्थापित क्षेत्र में सड़क और पानी की सुविधा देने, पैदल रास्ता निर्माण व अन्य मांगें उठाई हैं. ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए राजस्व और पुलिस टीम मौके पर से बैरंग लौट गई.

बद्रीनाथ धाम की तीर्थयात्रा शुरू करने की मांग पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेन्द्र भंडारी के नेतृत्व में बद्रीनाथ धाम कूच करने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया, जिस वजह से काफी देर तक हंगामा हुआ. जानकारी के अनुसार, पूर्व मंत्री राजेन्द्र भंडारी का बद्रीनाथ में कार्यक्रम था लेकिन पुलिस ने कोविड नियमों का हवाला देते हुए बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें पांडुकेश्वर में रोक दिया, जिसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच मामूली झड़प भी हुई. बता दें कि कोरोना संक्रमण को ध्यान में रखते हुए चारधाम यात्रा अभी शुरू नहीं की गई है. उत्तराखंड सरकार ने चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी जिले के लोगों के लिए यात्रा शुरू करने की अनुमति दी थी लेकिन नैनीताल हाईकोर्ट ने चारधाम यात्रा पर रोक लगा दी और सुप्रीम कोर्ट का निर्देश आने तक के लिए इस रोक को बढ़ाया है. वहीं आज बद्रीनाथ धाम और  पांडुकेश्वर में कांग्रेस और स्थानीय लोगों ने बद्रीनाथ विधायक महेंद्र भट्ट का पुतला भी जलाया, जिस पर बद्रीनाथ विधायक ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की.

चमोली के सिमली गांव में पानी का संकट, बूंद-बूंद को तरसे ग्रामीण

चमोली के सिमली गांव में पानी का संकट, बूंद-बूंद को तरसे ग्रामीण

चमोली जिले के सिमली गांव में एक माह से अधिक समय से पेयजल आपूर्ति बाधित है, जिसकी वजह से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

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चमोली जिले के सिमली गांव में एक माह से अधिक समय से पेयजल आपूर्ति बाधित है, जिसकी वजह से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. लोगों का कहना है पेयजल लाइन काफी समय से क्षतिग्रस्त है लेकिन अब तक ठीक न होने के कारण लोगों को काफी दूर जाकर जलस्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है. खासतौर पर बुजुर्ग कंधे पर पानी ढोकर लाने को मजबूर हैं. पानी की कमी के कारण गाय-भैंस पालने वाले ग्रामीणों को सुबह- शाम पानी की व्यवस्था करना मुश्किल हो जाता है. लोगों ने जल निगम से जलापूर्ति करने की मांग उठाई है. वहीं जल निगम के अवर अभियंता राजमोहन गुप्ता ने कहा कि बरसात के कारण लाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसे जल्दी दुरुस्त कर पेयजल आपूर्ति सुचारू कर दी जाएगी.

वहीं श्री नंदा देवी लोकजात यात्रा 2021 के कार्यक्रम की घोषणा हो चुकी है. कार्यक्रम के अनुसार यात्रा 31 अगस्त से शुरू होगी, जबकि यात्रा का समापन 20 सितंबर को होगा. मंदिर समिति एवं आयोजन कमेटी कुरूड़, देवराड़ा के तय कार्यक्रम के अनुसार 31 अगस्त को देवी यात्रा कुरूड़ सिद्धपीठ से शुरू होगी और चरबंग, मथकोट, उस्तोली, थराली समेत प्रमुख पड़ावों के बाद यात्रा 20 सितंबर को यात्रा बैनोली से लोल्टी, तुंगेश्वर होते हुए सिद्धपीठ देवराड़ी पहुंचेगी, जहां पर पूरे विधि-विधान के साथ नंदादेवी के उत्सव डोली को मंदिर के गर्भगृह में विराजमान किया जाएगा और यही पर अगले 6 माह तक डोली की पूजा-अर्चना की जाएगी. बता दें, नंदा देवी लोकजात यात्रा हर साल निकाली जाती है, जबकि 12 साल में राजजात यात्रा होती है. यह यात्रा सबसे ऊंचे और निर्जन पड़ावों पर करीब 13000 फीट पर स्थित बेदनी बुग्याल भी पहुंचती है. इस यात्रा में करीब 240 किमी का सफर 20 दिनों में तय किया जाता है. इस यात्रा में 365 गांव जुड़े होते हैं और बीस दिन की यात्रा में बीस दिन का रात्रि विश्राम होता है. 20 दिवसीय 280 किमी की इस ऐतिहासिक यात्रा को गढ़वाल-कुमाऊं की सांस्कृतिक मिलन का प्रतीक भी माना जाता है.

चमोली की ट्राउट फिश की जबरदस्त डिमांड, जानिए क्यों खास है ये मछली?

चमोली की ट्राउट फिश की जबरदस्त डिमांड, जानिए क्यों खास है ये मछली?

बैरांगना मत्स्य प्रजनन केंद्र में साल 1997 में ट्राउट मछली लाई गई थी.

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ट्राउट मछली जो कि औषधीय गुणों से भरपूर होती है और हृदयरोगियों के लिए फायदेमंद, आजकल चमोली के किसानों की आमदनी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. चमोली जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर स्थित बैरांगना मत्स्य प्रजनन केंद्र में कृत्रिम तरीके से ट्राउट मछ्ली का प्रजनन किया जा रहा है. यहां मछली का प्रजनन स्ट्रिपिंग पद्धति से किया जाता है, जिसमें मछली के पेट से अंडों को रिलीज किया जाता है और उसके बाद नर मछली के शुक्राणुओं को डालकर मत्स्य बीज तैयार किया जाता है.

वर्तमान समय में इस प्रजनन केंद्र से ही उत्तराखंड के अन्य पहाड़ी ठंडे इलाकों उत्तरकाशी, टिहरी, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर के किसानों को मछली के बच्चे दिए जा रहे हैं, ताकि इनका उत्पादन कर वह अपनी आर्थिकी सुधार सकें. ट्राउट मछली बाजार में 1000 रुपये से लेकर 1500 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है.

बाजार में इस मछली की काफी मांग है. बड़े-बड़े शहरों के फाइव स्टार होटलों में भी इसकी डिमांड बनी रहती है. चमोली से दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर तक ट्राउट मछलियों को किसानों से सीधे खरीदकर बड़ी-बड़ी फर्म द्वारा भेजा जा रहा है.

बैरांगना मत्स्य प्रजनन केंद्र में साल 1997 में ट्राउट मछली लाई गई थी. यह मछली तब से लेकर अब तक कई किसानों की जिंदगी संवार चुकी है और वर्तमान में इससे लगभग चमोली के 150 किसान जुड़े हुए हैं, जो इसके व्यापार से अच्छी कमाई कर रहे हैं.

ट्राउट मछली के औषधीय गुणों की बात की जाए तो यह हृदय रोगियों के लिए बेहद फायदेमंद होती है, क्योंकि इसमें ओमेगा-6 पाया जाता है जबकि अन्य मछलियों में ओमेगा-3 पाया जाता है.

गौरतलब है कि अंग्रेज ट्राउट मछली को फिशिंग के लिए भारत में लाए थे लेकिन बाद में इसके औषधीय गुणों का पता चलने के बाद लोगों ने इसे खाना शुरू किया. माना जाता है कि करीब 122 साल पहले नार्वे के नेल्सन ने इसके अंडे डोडीताल में डाले थे और वहीं से अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में इसको भेजा गया.

भगवान शिव ने कामदेव को मारने के लिए फेंका था त्रिशूल, इस मंदिर में आज भी मौजूद है अस्त्र

भगवान शिव ने कामदेव को मारने के लिए फेंका था त्रिशूल, इस मंदिर में आज भी मौजूद है अस्त्र

उत्तराखंड के चमोली जिले के गोपेश्वर नगर में भगवान शिव का पौराणिक गोपीनाथ मंदिर स्थित है.

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उत्तराखंड के चमोली जिले के गोपेश्वर नगर में भगवान शिव का पौराणिक गोपीनाथ मंदिर स्थित है. गोपीनाथ मंदिर का संबंध भोलेनाथ से है. यह मंदिर केदारनाथ धाम के समकक्ष प्राचीन बताया जाता है. मंदिर के वास्तु कला की अगर बात करें तो इसके शीर्ष पर गुम्बद नुमा आकृति है. इस मंदिर का गर्भगृह 30 वर्ग फुट है, जिसमें 24 द्वारों से प्रवेश किया जाता है. पंचकेदारों में मौजूद चतुर्थ केदार रुद्रनाथ के कपाट बंद होने पर चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ की चल विग्रह डोली को गोपीनाथ मंदिर लाया जाता है.

इसी मंदिर में शीतकाल में भगवान गोपीनाथ के साथ बाबा रुद्रनाथ की भी पूजा अर्चना की जाती है. बताया जाता है कि जब भगवान शिव ने कामदेव को मारने के लिए अपना त्रिशूल फेंका तो वह यहां गढ़ गया था. त्रिशूल की धातु अभी भी सही स्थिति में है, जिस पर मौसम प्रभावहीन है और यह एक आश्वर्य है. यह माना जाता है कि शारीरिक बल से इस त्रिशूल को हिलाया भी नहीं जा सकता, जबकि यदि कोई सच्चा भक्त इसे छू भी ले तो इसमें कम्पन होने लगता है.

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