ऐसा शिक्षक जिसने तन-मन और धन पढ़ाने के लिए समर्पित कर दिया

Prabhat Purohit | News18India
Updated: September 5, 2017, 12:03 AM IST
ऐसा शिक्षक जिसने तन-मन और धन पढ़ाने के लिए समर्पित कर दिया
Prabhat Purohit
Prabhat Purohit | News18India
Updated: September 5, 2017, 12:03 AM IST
एक तरफ जहां कुछ लोग व्यवस्थाओं का रोना रोकर अपनी जिम्मेदारियों से भागने की कोशिश करते है वहीं कुछ ऐसे भी होते है जो अपने मजबूत इरादों से परिस्थितियों को बदलने का जज्बा रखते हैं. ऐसे ही मजबूत इरादों के

एक शख़्स का नाम है शिक्षक घनश्याम ढौंडियाल. इन्होंने स्यूणि मल्ली गांव में न सिर्फ स्कूल की दशा सुधारी है बल्कि गांव की सामाजिक दशा ही बदल दी है.



चमोली ज़िले स्थित गैरसैंण विकासखंड के अति दूरस्थ गांव स्युणी मल्ली गांव तक पहुंचने के लिए सड़क से 6 किलोमीटर पैदल खड़ी चढ़ाई करनी पड़ती है.

teacher dhoundiyal 3

 

यहां जिस विद्यालय में ये नौनिहाल पढ़ रहे हैं वह शहर का कोई मॉर्डन पब्लिक स्कूल नहीं बल्कि गांव की प्राइमरी पाठशाला है. इसे मॉर्डन स्कूल से भी बेहतर बनाया है 17 सालों से यहां तैनात शिक्षक घनश्याम ढौंडियाल ने.

घनश्याम जब पहली बार 1999 में यहां आए थे तो यहां शिक्षा की स्थिति बदहाल थी. लड़कियां पांचवीं के बाद स्कूल नहीं जाती थीं और लड़के आठवीं के बाद. घनश्याम ढौंडियाल ने गांव में शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक परिवेश बदलने की ठानी तो उसके परिणाम आज नज़र आते हैं.
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आमतौर पर लोगों की ख्वाहिश होती है कि अच्छी सी सरकारी नौकरी मिले और फिर घर बसाया जाए मगर शिक्षक घनश्याम ढौंडियाल ने इन बच्चों को ही यहां अपना परिवार बना लिया है. गांव और स्कूल की स्थिति को सुधारने का संकल्प लिए शिक्षक घनश्याम ढौंडियाल ने न तो शादी की और न ही कोई विभागीय प्रमोशन लिए जबकि उनके दो बार प्रमोशन हो भी चुके हैं.



इस प्राइमरी विद्यालय में एक मात्र शिक्षक है घनश्याम ढौंडियाल. गांव के बच्चों ने भले ही सड़क नहीं देखी है मगर गांव की बेटियां फर्राटे से स्कूल के मैदान में साइकिल चलाती हैं.

यहां बच्चों को कम्प्यूटर और प्रोजेक्टर की मदद से ई-क्लास का अनुभव भी दिया जा रहा है जिसकी इस स्कूल में कल्पना नहीं की जा सकती थी.

स्कूल में बच्चों को इतना अच्छा लगता है कि छुट्टी के बाद बच्चे घऱ तो जाते हैं लेकिन भोजन करने के कुछ देर बाद ही फिर स्कूल पहुंच जाते हैं और लाइब्रेरी का आंनद लेते हैं.

teacher dhoundiyal

साथ ही संगीत की क्लास भी लेते है. स्कूल की पढ़ाई का स्तर सुधरने के बाद और ग्रामीण गुरुजी घनश्याम ढौंडियाल के फ़ैन हो गए हैं और उन्हें देवता तुल्य सम्मान देते हैं.

 
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