चमोली की नीती घाटी को इनर लाइन से मुक्त करना चाहती है उत्तराखंड सरकार, ये है वजह

चमोली जिले की खूबसूरत नीती वैली में करीब पचास गांव हैं, जो इनर लाइन के भीतर आते हैं. यहीं टिम्मबरसैण नाम का एक धार्मिक स्थल भी है.

Sunil Navprabhat | News18 Uttarakhand
Updated: August 11, 2019, 1:08 PM IST
चमोली की नीती घाटी को इनर लाइन से मुक्त करना चाहती है उत्तराखंड सरकार, ये है वजह
नीती वैली बहुत खूबसूरत जगह है.
Sunil Navprabhat
Sunil Navprabhat | News18 Uttarakhand
Updated: August 11, 2019, 1:08 PM IST
उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने चीन सीमा से लगे चमोली जिले की नीति वैली से इनर लाइन की बाध्यता हटाने की मांग की है. उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र भेजकर इसे पलायन की मार झेल रहे सीमांत क्षेत्रों के विकास के लिए आवश्यक बताते हुए कहा है कि इससे इन क्षेत्र में पर्यटन बढ़ने से लोगों को रोजगार के अवसर पैदा होंगे.

उत्तराखंड में चीन सीमा से लगे तीन जिले उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ के कुछ क्षेत्रों में इनर लाइन (आंतरिक सुरक्षा रेखा) की बाध्यता है. सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील इन क्षेत्रों में केवल स्थानीय लोग ही प्रवेश कर सकते हैं और इस पर भी एक सीमा के बाद आगे जाने के लिए स्थानीय लोगों को भी परमिट की आवश्यकता होती है, जिसे जिला प्रशासन जारी करता है. जबकि विदेशी नागरिक इन क्षेत्रों में बिना परमिट के नहीं जा सकते हैं, तो विदेशी नागरिकों के नाइट स्टे पर तो पूरी तरह प्रतिबंध है.

नीति वैली में इतने गांव
चमोली जिले की खूबसूरत नीती वैली में करीब पचास गांव हैं, जो इनर लाइन के भीतर आते हैं. यहीं टिम्मबरसैण नाम का एक धार्मिक स्थल भी है. पर्यटन मंत्री का कहना है कि यहां पर अमरनाथ की तरह प्राकृतिक शिवलिंग बनता है, लेकिन इनर लाइन में होने के कारण पर्यटक पहुंच नहीं पाते. यदि इन क्षेत्रों को इनर लाइन से मुक्त कर दिया जाता है, तो यहां तेजी के साथ पर्यटन बढ़ेगा और यहां के लोगों को रोजगार भी मिल सकेगा. रोजगार के अभाव में सीमांत के ये क्षेत्र लगातार पलायन कर रहे हैं, जो आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से भी ठीक नहीं है.

उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज


सतपाल महाराज कहते हैं कि हाल ही में मसूरी में संपन्न हुए हिमालयी राज्यों के सम्मेलन में भाग लेने पहुंची वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी सीमांत क्षेत्रों से हो रहे पलायन को लेकर चिंता जताई थी. उन्‍होंने आश्वस्त किया था कि केंद्र सरकार इस दिशा में उचित कदम उठाएगी.

2017 में हर्षिल को किया जा चुका है इनर लाइन से मुक्त
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चीन सीमा से लगे सीमांत उत्तरकाशी जिले की हर्षिल वैली बेहद खूबसूरत है. राम तेरी गंगा मैली जैसी फिल्मों की शूटिंग इस घाटी में हुई है. इसे भारत का मिनी स्वीटजरलैड के तौर पर भी जाना जाता है. 1962 के भारत चीन युद्व के बाद हर्षिल को इनर लाइन एरिया घोषित कर दिया गया था. इसके चलते यहां विदेशी पर्यटक बिना परमिट के नहीं घूम सकते थे तो उनके रात को रूकने पर भी प्रतिबंध था, लिहाजा इस खूबसूरत घाटी में पर्यटन गतिविधियां परवान नहीं चढ़ पा रही थी. स्थानीय लोग दशकों से हर्षिल को इनर लाइन से मुक्त करने की मांग कर रहे थे.

2017 में हर्षिल को किया जा चुका है इनर लाइन से मुक्त.


अंतत: सामाजिक कार्यकर्ता लोकेंद्र बिष्ट के प्रयासों से 2017 में केंद्र सरकार ने हर्षिल को इनर लाइन एरिया से बाहर कर दिया. अब यहां देशी विदेशी पर्यटक आसानी से घूम सकते हैं. इसी क्षेत्र में स्थित नेलांग वैली जिसे कोल्ड डिजर्ट के नाम से भी जाना जाता है को भी विदेशी पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है. वे डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट की परमीशन के बाद नेलांग वैली में घूम सकते हैं. हालांकि वे अब भी संवेदनशील इस क्षेत्र में नाइट स्टे नहीं कर सकते.

इनर लाइन अर्थात आंतरिक सुरक्षा रेखा
दूसरे देशों की सीमाओं के नजदीक स्थित वह क्षेत्र, जो सामरिक दृष्टि से महत्व रखता हो, इनर लाइन घोषित कर दिया जाता है. इस क्षेत्र में सिर्फ स्थानीय लोग ही प्रवेश कर सकते हैं और विदेशी पर्यटकों को यहां जाने के लिए इनर लाइन परमिट लेना होता है. हालांकि इसके बाद भी वे एक तय सीमा तक ही इनर लाइन क्षेत्र में घूम सकते हैं.

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First published: August 11, 2019, 1:05 PM IST
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