सरकार की अनदेखी के चलते उपेक्षा का शिकार हुआ विष्णुप्रयाग

विष्णुप्रयाग का जितना अधिक पौराणिक महत्त्व है उतना ही सरकारी उपेक्षा के चलते इसकी अब अनदेखी भी हो रही है.

Prabhat Purohit
Updated: June 20, 2018, 1:32 PM IST
सरकार की अनदेखी के चलते उपेक्षा का शिकार हुआ विष्णुप्रयाग
देवर्षि नारद की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने यहीं उन्हें दर्शन दिए.
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Updated: June 20, 2018, 1:32 PM IST
देवभूमि के पंच प्रयागों में सर्वप्रथम विष्णुप्रयाग प्रथम प्रयाग माना जाता है. यहां की अल्कापुरी कुबेर मुकुट से आने वाली अलकनंदा नदी और धौल पर्वत से निकलने वाली धौली नदी के मिलन के बाद बनता है. विष्णुप्रयाग इस स्थान की मान्यता है कि देवर्षि नारद ने इसी स्थान पर भगवान विष्णु के दर्शन हेतु तपस्या की थी.

विष्णुप्रयाग में ही देवर्षि नारद की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ने यहां उन्हें दर्शन दिए. ये भी कहा जाता है कि भगवान विष्णु के इस स्थान पर अवतरण के चलते इसे सूक्ष्म बद्री के नाम से भी जाना जाता है.

भगवान बद्री विशाल की यात्रा से पूर्व श्रद्धालु इस प्रयाग में स्नान कर इस स्थान पर विष्णु भगवान के मंदिर में पूजा वंदन करते हैं. तब बद्रीनाथ को जाते हैं, तो उनकी यात्रा और भी फलदाई हो जाती है. इसलिए श्रद्धालु यहां श्रद्धा के साथ स्नान और आचमन करते हैं.

विष्णुप्रयाग का जितना अधिक पौराणिक महत्त्व है उतना ही सरकारी उपेक्षा के चलते इसकी अब अनदेखी भी हो रही है. यदि तीर्थ और पर्यटन विभाग यहां इस प्रयाग का सौन्दर्यीकरण के साथ ही यहां स्नानघाट और यात्रियों की सुरक्षा के बेहतर इंतजाम करें तो न सिर्फ बाहर से आने वाले श्रद्धालु यहां पहुंचेंगे बल्कि इस स्थान की महत्ता का और भी अधिक प्रचार-प्रसार होगा. जिससे स्थानीय व्यापार और आजीविका के भी साधन बढ़ेंगे.
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