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कोरोना काल में छोड़ी नौकरी, घर लौटे और लकड़ियों के हैंडीक्राफ्ट ने बदल दी किस्मत

लड़कियों

लड़कियों के हैंडीक्राफ्ट लोगों को काफी पसंद आ रहे हैं.

अनिल कुमार भारती ने बांस और रिंगाल की लकड़ियों के स्थानीय उत्पाद बनाकर स्वरोजगार की शानदार मिसाल पेश की है.

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    चमोली जिले के नारायणबगड़ स्थित धाराबरम गांव के रहने वाले अनिल कुमार भारती ने बांस और रिंगाल की लकड़ियों के स्थानीय उत्पाद बनाकर स्वरोजगार की शानदार मिसाल पेश की है. अनिल इससे पहले दिल्ली में प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते थे. कोरोना काल की शुरुआत में वह गांव लौटे और उन्होंने घर में ही स्वरोजगार शुरू कर दिया.

    अनिल बांस और रिंगाल का उपयोग कर डस्टबिन, पेन स्टैंड, गुलदस्ते, शॉपिंग बास्केट, कंडी, हल, जुआ समेत लकड़ियों की विभिन्न कलाकृतियों के हैंडीक्राफ्ट बनाकर स्वरोजगार को बढ़ावा दे रहे हैं.

    अनिल ने आसपास के युवाओं को भी रोजगार दिया है और इस समय वह क्षेत्र के युवाओं को लकड़ियों के हैंडीक्राफ्ट बनाने की ट्रेनिंग भी दे रहे हैं. अनिल ने बताया कि आने वाले समय में उनकी शोरूम खोलने की योजना है.

    लकड़ियों से बने हैंडीक्राफ्ट दिल्ली, हरिद्वार, हल्द्वानी, लखनऊ और देहरादून तक भेजे जा रहे हैं. वहां यह देसी उत्पाद लोगों को काफी पसंद आ रहे हैं.

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