नशे के कारोबार का अड्डा बन रहा चंपावत, 9 साल में 3 क्विंटल चरस ज़ब्त

बड़े पैमाने पर 28 गांवों से चरस की पैदावार करने वाली भांग की फ़सल नष्ट की गई है.

Kamlesh Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: August 31, 2018, 2:53 PM IST
नशे के कारोबार का अड्डा बन रहा चंपावत, 9 साल में 3 क्विंटल चरस ज़ब्त
नौ साल में 3 क्विंटल, 38 किलो चरस यहां पकड़ी गई है और 179 मामले दर्ज किए गए हैं. इसी साल एक जनवरी, 2018 से अब तक 40 किलो से ज्यादा चरस पकड़ी गई है.
Kamlesh Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: August 31, 2018, 2:53 PM IST
इंडो-नेपाल सीमा से लगा चंपावत सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण ज़िला है लेकिन ये नशे के तस्करों का अड्डा बनता जा रहा है. यह बात हम नहीं पुलिस के आंकड़े कह रहे हैं. यहां काला सोना कहे जाने वाले नशे चरस की लगातार खेप पकड़ी जा रही हैं. बीते नौ साल में 3 क्विंटल, 38 किलो चरस यहां पकड़ी गई है और 179 मामले दर्ज किए गए हैं. इसी साल एक जनवरी, 2018 से अब तक 40 किलो से ज्यादा चरस पकड़ी गई है. इसी महीने 27 और 28 अगस्त को चरस की दो बड़ी खेप पकड़ी गई हैं. इसमें सबसे बड़ी खेप 23 किलो 580 ग्राम की थी जिसके साथ चार लोगों को गिरफ़्तार किया गया था.

चम्पावत ज़िले के पाटी ब्लॉक, लोहाघाट ब्लॉक, इंडो-नेपाल पर पहाड़ी इलाकों में भांग की खेती की जा रही है. उत्तराखंड, ख़ासकर कुमाऊं में भांग के बीजों का चटनी बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो बेहद पसंद भी की जाती है. लेकिन भांग की पत्तियों में बेहद नशा होता है और इसीलिए इसकी खेती प्रतिबंधित है. लेकिन लुक-छिप कर इसकी खेती पहाड़ में की ही जाती है.

देश के कई राज्यों में नशे का कारोबार करने वालों की नज़रें उत्तराखंड की शांत वादियों में हैं. सूत्रों के अनुसार नशा कारोबारी स्थानीय लोगों को गुपचुप भांग की खेती के लिए पैसा देते हैं और फिर उससे चरस बनाकर उत्तराखंड और अन्य राज्यों में ले जाते हैं. इस तरह नशे के असली सौदागर पकड़ मे आते ही नहीं.

नशे के ख़िलाफ़ अभियान चला रही चंपावत पुलिस अब इस धंधे की जड़ों पर प्रहार कर रही है. एसपी धीरेन्द्र गुंज्याल के अनुसार पिछले सालों का रिकॉर्ड तोड़ते हुए इस साल की 8 महीने में 40 अभियुक्तों से 40 किलो से ज़्यादा चरस और 54 ग्राम से ज्यादा स्मैक बरामद की गई है.

साथ ही पहाड़ को नशा मुक्त करने के अभियान के तहत भांग की झाड़ियों और चरस पैदा करने वाली भांग की पत्तियों को नष्ट किया जा रहा है. बड़े पैमाने पर 28 गांवों से चरस की पैदावार करने वाली भांग की फ़सल नष्ट की गई है.

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