स्थानीय निवासी ही बन गए हैं देवदार के दुश्मन, वन विभाग बेफ़िक्र

देवदार के पेड़ों को सुखाने के लिए जड़ों में कटिंग की जा रही है और हरे पेड़ों को सुखाने के लिए इनमें लोहे की लंबी कील ठोक दी जा रही हैं.

Kamlesh Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: April 25, 2018, 8:05 PM IST
स्थानीय निवासी ही बन गए हैं देवदार के दुश्मन, वन विभाग बेफ़िक्र
पर्यावरण सरंक्षण से इतर सफाई पसन्द देवदार के पेड़ों को सुखाने के लिए पेड़ों की जड़ों में मिट्टी डाली जा रही है.
Kamlesh Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: April 25, 2018, 8:05 PM IST
चम्पावत ज़िले के लोहाघाट नगर की पहचान देवदार नगरी के तौर पर है लेकिन कल्पवृक्ष कहे जाने वाले देवदार पेड़ों पर संकट के बादल छाए हुए हैं. चिंता की बात यह है कि जहां क्षेत्र के लोगों को खुद देवदार के पेड़ों का संरक्षण करना चाहिए था वही इनकी दुश्मन बन गई है. आबादी से लेकर जंगल के पास रहने वाले निवासी तक खुद देवदार के पेड़ों को सुखाने के लिए  नए-नए तरीके भी ईजाद कर रहे हैं.

पर्यावरण सरंक्षण से इतर सफाई पसन्द देवदार के पेड़ों को सुखाने के लिए पेड़ों की जड़ों में मिट्टी डाली जा रही है. मिट्टी डालने के अलावा देवदार वनों को कूड़ेदान में तब्दील किया जा रहा है.

लेकिन सिर्फ़ इतना नहीं देवदार के पेड़ों को सुखाने के लिए जड़ों में कटिंग की जा रही है और हरे पेड़ों  को सुखाने के लिए इनमें लोहे की लंबी कील ठोक दी जा रही हैं. क्षेत्र के व्यापारियों के अलावा दूसरे जिले से आए व्यापारी भी इन पेड़ों को अपने प्रचार का माध्यम बनाकर इस्तेमाल कर रहे हैं. पर्यावरण और इन पेड़ों की परवाह किए बिना इनमें गहरी कील ठोक कर होर्डिंग्स लगाए जा रहे हैं.

ऐसे में लगातार पर्यावरण संरक्षण को लेकर आगे रहने वाले पर्यावरणविद् भी चिंतित हैं कि जब वन विभाग, वन पंचायत आंखें बंद किए बैठे रहेंगे तो पर्यावरण का संरक्षण कैसे होगा.

स्थानीय युवक भुवन चौबे कहते हैं कि वन विभाग को ऐसे क्षेत्रों को चिन्हित कर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए.

इस बारे में पूछे जाने पर चम्पावत के डीएफओ केएस बिष्ट ने माना कि देवदार के हरे पेड़ों में कील ठोकने से यह पेड़ सूख जाते हैं. न्यूज़ 18 से उन्होंने कहा कि ऐसी जगहों को चिन्हित कर जल्द  ही दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी.
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