Assembly Banner 2021

झूमा देवी के मंदिर में लगता है नि:संतान दंपतियों का तांता, भर जाते हैं सूनी गोद

ETV/Pradesh18

ETV/Pradesh18

विश्व में उत्तराखण्ड देवभूमी के तौर पर अपनी पहचान रखता है. यहां कण-कण में भगवान का वास माना जाता है. लेकिन नेपाल सीमा से लगा चंपावत जिले का झूमा देवी का मंदिर नि:संतान दंपतियों को संतान का सुख देने के लिए जाना जाता है.

  • Share this:
विश्व में उत्तराखण्ड देवभूमी के तौर पर अपनी पहचान रखता है. यहां कण-कण में भगवान का वास माना जाता है. लेकिन नेपाल सीमा से लगा चंपावत जिले का झूमा देवी का मंदिर नि:संतान दंपतियों को संतान का सुख देने के लिए जाना जाता है.

मां झूमा देवी की ममता श्रद्धा आस्था ऐसी है कि हजारों की संख्या में महिलाएं संतान की प्राप्ति के लिए रात भर मां का जागरण करती है.

मान्यता है कि रातभर मां झूमा की प्रार्थना से स्वप्न में आकर मां झूमा दर्शन देती है. स्वपन में ही संतान प्राप्ति के संकेत भी देती है.



मंदिर के पुजारी और स्थानीय लोगों का भी मानना है कि सदियों पहले नेपाल के एक नि:संतान दंपति को मां ने स्वप्न में यहां मंदिर स्थापना करने को कहा जिसके बाद उसको संतान की प्राप्ति हुई थी. नेपाली दम्पति ने नेपाल से एक शिला लाकर यहां स्थापित की.
पूरी रात मां झूमा देवी का जागरण कीर्तन के बाद लोग अगली सुबह मां के दो डोलों को हजारों की संख्या में खड़ी चढ़ाई पर रस्सियों के सहारे जान जोख़िम में डालकर मन्दिर तक लाते हैं.

परम्परा के अनुसार रातभर मां झूमा का जागरण कर रही महिलाएं इन डोलों के नीचे से गुजरती हैं. पुरुष डोलों को रस्सियों और कंधे के सहारे मां के दरबार तक लाते हैं. यह मां की महिमा है कि खुद महिलाएं इस बात कि तस्दीक करती है कि मां के जागरण और आशीष से उन्हें संतान की प्राप्ति हुई है.

चंपावत जिले में मां झूमा देवी के अलावा मां पूर्णागिरी, हिंगला देवी, रणजीती ,देवीधुरा मां बाराही के मन्दिर जहां भक्तों के आस्था के केंद्र हैं वहीं मां झूमा देवी का मन्दिर नि:संतान दंपति के लिए जीवन में विशेष आस्था रखती है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज