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उत्तराखंड: जानिए बागियों के मामले में कब, क्या हुआ

उत्तराखंड: जानिए बागियों के मामले में कब, क्या हुआ

10 मई को फ्लोर टेस्ट के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बीच अब सभी की नजरें एक बार फिर सुप्रीमकोर्ट पर आकर टिकी गई हैं. नैनीताल हाईकोर्ट ने स्पीकर के फैसले पर मुहर लगाते हुए सभी नौ बागियों को अयोग्या ही माना है.

10 मई को फ्लोर टेस्ट के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बीच अब सभी की नजरें एक बार फिर सुप्रीमकोर्ट पर आकर टिकी गई हैं. नैनीताल हाईकोर्ट ने स्पीकर के फैसले पर मुहर लगाते हुए सभी नौ बागियों को अयोग्या ही माना है.

10 मई को फ्लोर टेस्ट के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बीच अब सभी की नजरें एक बार फिर सुप्रीमकोर्ट पर आकर टिकी गई हैं. नैनीताल हाईकोर्ट ने स्पीकर के फैसले पर मुहर लगाते हुए सभी नौ बागियों को अयोग्या ही माना है.

    10 मई को फ्लोर टेस्ट के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बीच अब सभी की नजरें एक बार फिर सुप्रीमकोर्ट पर आकर टिकी गई हैं. नैनीताल हाईकोर्ट ने स्पीकर के फैसले पर मुहर लगाते हुए सभी नौ बागियों को अयोग्या ही माना है.

    हालांकि बागियों ने अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की पनाह ली है. सोमवार दोपहर बाद सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई होगी. उत्तराखंड में बागी विधायकों की सदस्यता का मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है.

    आपको बता दें कि 18 मार्च को विधानसभा में वित्त विधेयक के दौरान भाजपा ने मत विभाजन की मांग की. कांग्रेस के नौ बागी विधायक विजय बहुगुणा, हरक सिंह रावत, शैलेंद्र मोहन सिंघल, अमृता रावत, कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन, शैलारानी रावत, उमेश शर्मा काऊ, सुबोध उनियान और प्रदीप बत्रा भी खड़े होकर भाजपा के साथ मत विभाजन की मांग करने लगे.

    18 मार्च की रात को ही 9 बागी विधायक भाजपा के साथ राज्यपाल से मिले, सरकार के अल्पमत में होने की बात कहते हुए सरकार को बर्खास्त करने की मांग की. जिसके बाद कांग्रेस ने इन विधायकों पर दल-बदल का आरोप लगाते हुए स्पीकर से कार्रवाई की मांग की और स्पीकर ने इनकी सदस्यता निरस्त कर दी.

    आपको बताते हैं कि इस मामले में कब, क्या हुआ:

    #18 मार्च को विधानसभा में वित्त विधेयक के दौरान कांग्रेस के नौ बागी विधायक खड़े हो गए और सरकार के अल्पमत में होने की बात कहने लगे.

    #19 मार्च को कांग्रेस विधानमंडल दल की मुख्य सचेतक इंदिरा ह्रदयेश ने 9 बागी विधायकों पर दल-बदल अधिनियम के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए स्पीकर को प्रार्थनापत्र दिया.

    #25 मार्च को बागियों ने स्पीकर पर पक्षपात करने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में अर्जी दी. लेकिन हाईकोर्ट ने स्पीकर के खिलाफ याचिका खारिज की.

    #27 मार्च को स्पीकर ने बागी विधायकों की सदस्यता समाप्त कर दी. जिसके बाद उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल सा मच गया.

    #29 मार्च को कांग्रेस के 9 बागी विधायकों ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका सदस्यता समाप्त करने के विरोध में दायर की याचिका.

    #12 अप्रैल को बागी विधायकों की याचिका पर होनी थी सुनवाई, हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 23 अप्रैल तक सुनवाई को टाल दिया.

    #23 अप्रैल को स्पीकर के वकीलों ने कोर्ट में रखा पक्ष, बागियों के वकीलों ने मांगा समय, जिसके बाद अगली तारीख 25 अप्रैल तय कर दी गई.

    #25 अप्रैल को हाईकोर्ट में दोनों पक्षों के वकीलों ने की बहस. 26 अप्रैल को भी जारी रही सुनवाई. हाईकोर्ट ने मामले की अगली तारीख 28 अप्रैल तय की.

    #28 अप्रैल को हाईकोर्ट ने मामले की अगली तारीख पांच मई तय की, लेकिन 5 मई को मामले की अगली तारीख 7 मई दे दी गई.

    #7 मई को र्हाकोर्ट ने बागियों के मामले में सुनवाई पूरी कर, फैसला ़10 मई तक के लिए सुरक्षित रख लिया था.

    #9 मई को जस्टिस यूसी ध्यानी की की एकलपीठ ने बगियों की दोनों याचिकाएं खारिज कर दी और स्पीकर के फैसले पर ही मुहर लगाई, यानी सभी 9 बागियों को अयोग्य ही माना.

    #9 मई को ही बगियों ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, अब सोमवार को दोपहर बाद इस मामले में सुनवाई होगी.

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