सूख गए गाड़-गदेरे, पहाड़ों में भी टैंकरों से हो रही पानी की आपूर्ति

जल संस्थान का दावा है कि पानी को फ़िल्टर किया जाता है लेकिन गर्मी के दिनों में यह पानी पीकर लोग बीमारी की चपेट में आ रहे हैं.

Kamlesh Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: May 8, 2018, 7:26 PM IST
सूख गए गाड़-गदेरे, पहाड़ों में भी टैंकरों से हो रही पानी की आपूर्ति
चम्पावत जिले में गर्मी बढ़ने के चलते पानी के स्रोत सूखने लगे हैं. ऐसे में चम्पावत जल संस्थान नगर के वार्डों में टैंकरों से पानी सप्लाई कर रहा है.
Kamlesh Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: May 8, 2018, 7:26 PM IST
चम्पावत जिले में गर्मी बढ़ने के चलते पानी के स्रोत सूखने लगे हैं. ऐसे में चम्पावत जल संस्थान नगर के वार्डों में टैंकरों से पानी सप्लाई कर रहा है जबकि जिले की दूसरी विधानसभा लोहाघाट में लोग रोज़ ज़रूरत भर के लिए पानी लंबा सफर तय कर रहे हैं. पानी की बढ़ती किल्लत से परेशान लोग अब जल संस्थान से समय पर पानी की आपूर्ति करने की मांग कर रहे हैं.

चम्पावत ज़िले का दूरस्थ गांव पुल्ला के ग्रामीणों को ज़रूरत भर का पानी नहीं मिल पा रहा है. जल संस्थान ने कहने को तो पंपिंग योजना के तहत तीन साल पहले 400 फ़ीट गहरा ट्यूबवेल लगाया था लेकिन पानी की ये पोस्ट पानी आने का इंतजार कर रही हैं. स्थानीय महिलाओं को घंटों हैंडपंप के सामने खड़े होकर अपनी ज़रूरत के पानी के लिए खड़ी रहती हैं.

लोहाघाट के लिए कभी जीवनदायनी रही लोहावती नदी से ही क्षेत्र का नाम लोहाघाट पड़ा था. लेकिन स्थानीय लोगों की लापरवाही के चलते अब यह लोहावती नदी भी मैली हो गई है और गंदे नाले में तब्दील हो चुकी है.

जल संस्थान इसी लोहावती का पानी लोगों को पीने के लिए सप्लाई करता है. हालात ऐसे हैं कि लोहाघाट नगर की बड़ी आबादी को सीवर के पानी के साथ मुर्दा घाट का पानी ही पीने के लिए सप्लाई किया जा रहा है. हालांकि जल संस्थान का दावा है कि पानी को फ़िल्टर किया जाता है लेकिन गर्मी के दिनों में यह पानी पीकर लोग बीमारी की चपेट में आ रहे हैं.

चंपावत के पहाड़ी क्षेत्रों में पानी के लिए संघर्ष रोज़ की बात हो गई है. लेकिन यह भी बहुत पुरानी बात नहीं है कि लोग अपने गाड़-गदेरों (प्राकृतिक जल स्रोतों) से ही न सिर्फ़ पीने के बल्कि अन्य ज़रूरतों का पानी भी जुटा लेते थे. अब ज़रूरत यह है कि एक बार फिर इन जीवनदायिनी नदियों, गाड़-गदेरों को साफ़ करने मुहिम चलाएं ताकि उनकी ग़लतियों की सजा भविष्य की पीढ़ी को न मिले.
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