सरकारी स्कूल के बच्चों ने दिखाई प्रतिभा, विज्ञान-प्रौद्योगिकी प्रतियोगिता में 85 चुने गए

निशा बिष्ट ने मैदानी क्षेत्र में रेलवे क्रॉसिंग में हो रहे हादसों को रोकने का उपाय बताते हुए मॉडल बनाया है.

Kamlesh Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: April 27, 2018, 2:20 PM IST
सरकारी स्कूल के बच्चों ने दिखाई प्रतिभा, विज्ञान-प्रौद्योगिकी प्रतियोगिता में 85 चुने गए
चंपावत के 85 बच्चों का विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी इंस्पायर अवार्ड प्रतियोगिता में चयन हुआ है.
Kamlesh Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: April 27, 2018, 2:20 PM IST
ऐसे समय में जब सीबीएसई से मान्यता प्राप्त सभी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबों लागू करने के विरोध में निजी स्कूल मोर्चा खोले हैं और अभिभावकों को धमका रहे हैं कि उनके बच्चों को निकाल दिया जाएगा और उसे सरकारी स्कूल में पढ़ना होगा. चंपावत के सरकारी स्कूलों के बच्चों ने विज्ञान में अपनी प्रतिभा दिखाई है. ज़िले के 85 बच्चों का विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी इंस्पायर अवार्ड प्रतियोगिता में चयन हुआ है.

जिले के  49 विद्यालयों में 323 बच्चों ने किया था प्रतियोगिता में ऑनलाइन आवेदन किया था. इनमें से 85 होनहार छात्र-छात्राओं का ब्लॉक स्तर पर  चयन हो गया है. सभी होनहारों को सरकार द्वारा 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी गई है.

ये चुने गए बच्चे अब एसएलईपी प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे. स्टेट लेवल पर चुने गए छात्र के मॉडल पर आईआईटी रिचर्स करेगा.

जिले के विभिन्न विद्यालयों से ब्लॉक स्तर पर चयनित कक्षा छह से दस तक के 55 बच्चों ने अपने दिमाग की उपज से बने मॉडल दिखाए. प्रदर्शनी में हिस्सा ले रहें भविष्य के किशोर वैज्ञानिकों ने आज की समस्याओं के हल सुझाए.

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काजल खत्री के मॉडल में पहाड़ों पर आने वाली आपदा से जान-माल की हानि को कम करने का उपाय बताया गया था तो निशा रोहित भट्ट ने बताया कि कैसे नदी किनारे बन्द हो रहे पनघट को शुरू करने के साथ पानी का इस्तेमाल और संरक्षण किया जा सकता है.

निशा बिष्ट ने मैदानी क्षेत्र में रेलवे क्रॉसिंग में हो रहे हादसों को  रोकने का उपाय बताते हुए मॉडल बनाया है.

अपने जिले के होनहार विद्यार्थियों पर जहां मुख्य शिक्षा अधिकारी  आरसी पुरोहित को गर्व है. वह कहते हैं कि भले ही अभी इन चुने गए छात्र-छात्राओं के सामने राज्य स्तर और फिर नेशनल स्तर तक की बड़ी चुनौती है लेकिन अगर यह अगर ये लगातार पढ़ाई जारी रखें तो कामयाबी मिलने की पूरी उम्मीद है.

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बहरहाल मैदानी क्षेत्रों की अपेक्षा पहाड़ में पढ़ रहे छात्रों का संघर्ष अधिक है. क्योंकि यहां न बेहतर सुविधाएं हैं, न ही नजदीक में बेहतर आधुनिक शिक्षा सुविधा. ऐसे में भविष्य के होनहार बाल वैज्ञानिक और इंजीनियरों अधिक संवारने के साथ पढ़ाई जारी रखने  की ज़रूरत है, ताकि देश और अपने क्षेत्र की तरक्की में अहम योगदान दे सकें.
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