यहां पीरियड्स के दौरान घर से अलग रहना पड़ता है महिलाओं को, सरकारी पैसे से बनी है इमारत
Champawat News in Hindi

यहां पीरियड्स के दौरान घर से अलग रहना पड़ता है महिलाओं को, सरकारी पैसे से बनी है इमारत
News18 क्रिएटिव

चंपावत के एक गांव घुरचुम में सरकारी फंड से एक ऐसी इमारत बनवाई गई जहां पीरियड्स के दौरान घर से बाहर रहने को मजबूर महिलाओं और लड़कियों को रखा जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 16, 2019, 4:15 PM IST
  • Share this:
  • fb
  • twitter
  • linkedin
दुनिया बदली, परंपराएं, रूढ़ियां, सोच सब कुछ बदला; लेकिन महिलाओं के पीरियड्स (मासिक धर्म) को लेकर कुछ लोगों की सोच अभी तक नहीं बदली है. कई जगह पीरियड्स को आज भी अपवित्रता से जोड़कर देखा जाता है. उत्तराखंड भी इससे अछूता नहीं है. यहां के चंपावत जिले के कई गांवों में पीरियड्स के दौरान महिलाओं के साथ भेदभाव होता है. पीरियड्स के दौरान यहां लड़कियों और महिलाओं को घर से बाहर अलग रहना पड़ता है.

दरअसल, चंपावत जिले के दूरदराज गांव घुरचुम में सरकारी फंड से एक ऐसी इमारत बनवाई गई है जहां महिलाओं और लड़कियों को पीरियड्स के दौरान रहना पड़ता है. 2016-17 में 2 लाख की लागत से बने इस रजस्वला केंद्र में महिलाएं मासिक धर्म के दौरान रहती हैं. बाकायदा घुरचुम गांव की ग्राम सभा में सर्वसम्मति से मासिक धर्म के दौरान महिलाओं के रजस्वला केंद्र में रहने का अनोखा प्रस्ताव पास भी पारित हो चुका है.

ये मामला तब सामने आया, जब गांव के एक दंपती ने निर्माण को अवैध ठहराते हुए ज़िलाधिकारी  से इसकी शिकायत की.



'अपवित्रता' नहीं, महिलाओं के शरीर की अहम प्रक्रिया है पीरियड्स



जिलाधिकारी रणवीर चौहान ने News18 से बात करते हुए कहा, 'घुरचुम जैसे रिमोट गांव में रजस्वला केंद्र के बारे में सुनकर ताज्जुब होता है. इसे लेकर एक दंपत्ति की शिकायत आई है. इस केंद्र  में पीरियड्स के दौरान महिलाओं को वाकई रखा जा रहा है कि नहीं, इसकी जांच की जाएगी.

चंपावत ज़िला भारत-नेपाल बॉर्डर से सटा हुआ है. यहां बने रजस्वला केंद्र का विचार काफी हद तक नेपाल के 'पीरियड्स हट' जैसा है. दरअसल, नेपाल में सदियों से छौपदी प्रथा चली आ रही है. छौपदी का मतलब है अनछुआ. इस प्रथा के तहत पीरियड या डिलिवरी के चलते लड़कियों को अपवित्र मान लिया जाता है.

पीरियड्स में भूलकर भी न खाएं ये चीजें, बढ़ सकता है दर्द

इसके बाद उन पर कई तरह की पाबंदियां लगा दी जाती हैं. वह घर में नहीं घुस सकतीं. बुजुर्गों को छू नहीं सकती. खाना नहीं बना सकती और न ही मंदिर और स्कूल जा सकती हैं. छौपदी को नेपाल सुप्रीम कोर्ट ने 2005 में गैरकानूनी करार दिया था, लेकिन फिर भी ये जारी है.

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी WhatsApp अपडेट्स
First published: January 15, 2019, 9:53 PM IST
अगली ख़बर

फोटो

corona virus btn
corona virus btn
Loading