अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ सीट में इस बार फिर टम्टा VS टम्टा !

साल 2009 में अल्मोड़ा संसदीय सीट सुरक्षित घोषित हुई थी. तबसे इस सीट पर प्रदीप टम्टा और अजय टम्टा के बीच ही मुकाबला रहा है.

Kamlesh Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: March 14, 2019, 5:39 PM IST
अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ सीट में इस बार फिर टम्टा VS टम्टा !
अल्मोड़ा में बीजेपी-कांग्रेस में सीधा मुकाबला है
Kamlesh Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: March 14, 2019, 5:39 PM IST
अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ संसदीय लोकसभा सीट में एक बार फिर टम्टा बनाम टम्टा होने की संभावना है. यहां से मौजूदा सांसद अजय टम्टा उत्तराखंड से केंद्र में एकमात्र मंत्री हैं. 2014 के चुनावों में उन्होंने प्रदीप टम्टा को हराया था तो 2009 में उनसे मात खाई थी. प्रदीप टम्टा अब कांग्रेस के राज्यसभा सांसद हैं लेकिन माना जा रहा है कि कांग्रेस इस सीट से उन्हें ही मैदान में उतरेगी. इसी तरह बीजेपी का अजय टम्टा पर दांव खेलना लगभग तय है.

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साल 2009 में अल्मोड़ा संसदीय सीट सुरक्षित घोषित हुई थी. तबसे इस सीट पर प्रदीप टम्टा और अजय टम्टा के बीच ही मुकाबला रहा है.



2009 में अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ संसदीय सीट के सुरक्षित सीट बनने के साथ ही कांग्रेस ने प्रदीप टम्टा और बीजेपी ने अजय टम्टा पर दांव खेला. इसमें प्रदीप टम्टा के सिर जीत का सेहरा बंधा.

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2014 में दोनों एक बार फिर आमने सामने थे और मोदी लहर में जीच अजय टम्टा ने हासिल की. जुलाई, 2016 में कांग्रेस ने प्रदीप टम्टा को राज्य के कोटे से विधानसभा में भेज दिया.

हालांकि अभी तक दोनों पार्टियों ने प्रत्याशियों का ऐलान नहीं किया है लेकिन दोनों पार्टियों के सूत्रों के अनुसार इस बार फिर एक बार दोनों आमने-सामने हो सकते हैं. दोनों ही नेता इसकी तैयारी में भी जुटे हुए हैं. पिछले 6 महीने से दोनों नेता लगातार किसी न किसी कार्यक्रम या कार्यकर्ताओं के साथ बैठक के बहाने क्षेत्र में सक्रियता बनाए हुए हैं.
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वरिष्ठ पत्रकार दिनेश पांडे कहते हैं कि कहते हैं अल्मोड़ा संसदीय सीट पर इस वक़्त कांग्रेस के पास राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा से बड़ा चेहरा नहीं है. उन्हें पहले भी सासंद रहने का लाभ मिल सकता है. हालांकि अगर चुनाव परिणाम कांग्रेस के पक्ष में आते हैं तो कांग्रेस को राज्यसभा में अपनी एक सीट गंवानी पड़ेगी जबकि उत्तराखण्ड में बहुमत में बैठी भाजपा को एक राज्यसभा में एक सीट मिल जाएगी.

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पांडे यह भी कहते हैं कि इस बार मुकाबला कड़ा है क्योंकि 2009 की अपेक्षा 2019 में अजय टम्टा बेहतर स्थिति में हैं. केंद्र में राज्य मंत्री के तौर पर वह पहचान बनाने में कामयाब रहे हैं इसलिए इस बार मुकाबला दिलचस्प होगा.

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