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आस्था का बॉर्डर : नवरात्रि में मां पूर्णागिरि और सिद्ध बाबा के दर्शन कर रहे हैं भारत-नेपाल के श्रद्धालु

मां पूर्णागिरि के दर्शन के लिए नवरात्रि पर श्रद्धालु उमड़ रहे हैं.

मां पूर्णागिरि के दर्शन के लिए नवरात्रि पर श्रद्धालु उमड़ रहे हैं.

उत्तराखंड स्थित भारत नेपाल बॉर्डर पर एक पर्वत है और वहां विराजमान हैं मां पूर्णागिरि. शक्तिपीठों में शुमार इस पवित्र धाम के दर्शन करने के लिए नवरात्रि के दौरान न केवल देश बल्कि पड़ोसी देश के भक्त भी बड़ी संख्या में आते हैं.

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चंपावत. शारदीया नवरात्रि के दौरान देश भर के श्रद्धालुओं के बीच नवदुर्गा और देवी के रूपों के प्रति गहरी आस्था दिख रही है. आस्था के इस माहौल के बीच इंडो-नेपाल बॉर्डर के पूर्णा पर्वत पर विराजीं मां पूर्णागिरि के बारे में आपको जानना चाहिए क्योंकि ये मां दो देशों की धार्मिक आस्था को भी जोड़ती हैं. इसी कारण मान्यता के मुताबिक श्रद्धालु पहले भारत में माँ पूर्णागिरि के दर्शन करते हैं और उसके बाद नेपाल के ब्रह्मदेव में सिद्ध बाबा के. पूर्णागिरि की यात्रा या दर्शन सिद्ध बाबा के दरबार में ही पूर्ण माने जाते हैं.

शारदा नदी किनारे स्थित पूर्णा मन्दिर 51 शक्तिपीठों में शुमार है. मंदिर के मुख्य पुजारी कृष्णानन्द पांडे, के मुताबिक मान्यता है कि माता सती का ‘नाभि अंग’ पूर्णा पर्वत पर गिरा था. यही वजह है कि पूर्णा पर्वत में बसी मां पूर्णागिरि के पवित्र धाम के प्रति भक्तों की गहरी आस्था जुड़ी है. मां के प्रति भक्तों की आस्था ही है कि देश भर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के चरणों में शीश नवाने के साथ ही मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आते हैं.

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इंडो नेपाल बॉर्डर पर पूर्णा पर्वत पर मां पूर्णागिरि शक्तिपीठ स्थित है.

यही नहीं मां की महिमा सरहद पार मित्र देश नेपाल से भी जुड़ी है. नेपाल स्थित सिद्ध बाबा मंदिर के मुख्य पुजारी महेंद्र उप्रेती के मुताबिक मान्यता है कि मां पूर्णागिरि के दर्शन के बाद ब्रह्मदेव में सिद्ध बाबा के दर्शन करने से तीर्थ यात्रा सफल होती है. इस यात्रा के पूर्ण होने से जहां दो भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है, वहीं दो देशों के श्रद्धालुओं की आवाजाही से दो मित्र देशों के बीच आस्था का रिश्ता भी बनता है.

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