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सियासत: सीएम हरीश रावत को आई 11 नए जिलों की याद, भाजपा ने कहा चुनावी शिगूफा

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उत्तराखंड सरकार 11 नए जिले बनाने पर विचार कर रही है. पांच-पांच जिले गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में बनाने पर विचार चल रहा है तो गैरसैंण 11 वां जिला हो सकता है. नए जिले बन जाएंगे तो प्रदेश में दो नई कमिश्नरी भी वजूद में आएंगी. प्रदेश में फिलहाल 13 जिले हैं. नए जिले बने तो जिलों की संख्या 24 हो जाएगी.

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उत्तराखंड सरकार 11 नए जिले बनाने पर विचार कर रही है. पांच-पांच जिले गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में बनाने पर विचार चल रहा है तो गैरसैंण 11 वां जिला हो सकता है. नए जिले बन जाएंगे तो प्रदेश में दो नई कमिश्नरी भी वजूद में आएंगी. प्रदेश में फिलहाल 13 जिले हैं. नए जिले बने तो जिलों की संख्या 24 हो जाएगी. नए जिले बनने के बाद दो कमिश्नरी बनेंगी. गढ़वाल और अल्मोड़ा हो नई कमिश्नरी हो सकती हैं. इसके बाद प्रदेश में चार कमिश्नरी हो जाएगी. अभी तक गढ़वाल और कुमाऊं दो ही कमिश्नरी हैं.

विधानसभा चुनाव की रेल छूटने से पहले ही प्रदेश में नए जिलों को हरी झंडी मिल सकती है. राज्य सरकार ने इसके लिए कवायद शुरु कर दी है. बताया गया है कि मुख्यमंत्री हरीश रावत इसके लिए मन बना चुके हैं. सरकार की ओर से जिलों के लिए प्रस्ताव मांगे गए हैं. 11 नए जिलों के प्रस्ताव सरकार को मिले और सरकार ने इन सब को हरी झंडी देने की तैयारी कर ली है. चुनाव नजदीक है तो नाराज किसी को नहीं किया जा सकता है.

यही कारण है कि इस बार दो-चार नहीं बल्कि पूरे 11 जिले बनाए जाने को लेकर घोषणा की जा सकती है. नए जिले बनने के साथ ही प्रदेश में दो नई कमिश्नरी भी वजूद में आएंगी. अभी तक प्रदेश में केवल दो गढ़वाल और कुमाऊं कमिश्नरी हैं. नए जिले बनेंगे तो कमिश्नरी भी चार हो जाएंगी. प्रदेश सरकार इसे जनहित का कदम बता रही है.



कैबिनेट मंत्री राजेंद्र सिंह भंडारी का कहना है कि छोटी प्रशासनिक इकाई होने से जनता को फायदा मिलता है प्रदेश सरकार की ओर से जनहित में यह कदम उठाया जा रहा है.
सरकार की ओर से अभी जिलों के नामों का खुलासा नहीं किया गया है. लेकिन रुड़की, कोटद्वार, यमुनोत्री, डीडीहाट, रानीखेत, काशीपुर, रामनगर, ऋषिकेश और गैरसैंण जैसे नाम चर्चाओं में हैं. जिले बनने के लिए इनकी दावेदारी पक्की मानी जा रही है.

वहीं भाजपा की ओर से सवाल उठाया जा रहा है कि पिछले साढ़े चार साल में कांग्रेस सरकार को जिले बनाने की सुध क्यों नहीं आई. चुनाव से कुछ महीने पहले ही जिले बनाने पर भाजपा प्रदेश की कांग्रेस सरकार की मंसा पर सवाल उठा रही है. भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता विनय गोयल का कहना है कि यह केवल चुनावी शिगूफा है.

गौरतलब है कि 2011 में निशंक के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने भी चार जिले बनाने की घोषणा की थी. 2012 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा सरकार ने नए जिलों का शासनादेश भी जारी कर दिया था. इसके बाद प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ और जिलों का मामला ठंडे बस्ते में चला गया. अब एक बार फिर चुनाव से ठीक पहले जिले बनाने की बात चली है. इस बार चार नहीं 11 जिले हैं. अब देखना यह होगा कि यें जिले बन पाते हैं या फिर इतिहास खुद को दोहरायेगा.
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