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टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन का 1902 में हुआ था आगाज!

टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन का 1902 में हुआ था आगाज!

आने वाले रेल बजट सत्र को लेकर उतराखंड के बहुप्रतीक्षित टनकपुर-बागेश्वर रेल परियोजना को लेकर लोगों की उम्मीदें एक बार फिर से जगने लगी है.

आने वाले रेल बजट सत्र को लेकर उतराखंड के बहुप्रतीक्षित टनकपुर-बागेश्वर रेल परियोजना को लेकर लोगों की उम्मीदें एक बार फिर से जगने लगी है.

आने वाले रेल बजट सत्र को लेकर उतराखंड के बहुप्रतीक्षित टनकपुर-बागेश्वर रेल परियोजना को लेकर लोगों की उम्मीदें एक बार फिर से जगने लगी है.

आने वाले रेल बजट सत्र को लेकर उतराखंड के बहुप्रतीक्षित टनकपुर-बागेश्वर रेल परियोजना को लेकर लोगों की उम्मीदें एक बार फिर से जगने लगी है. टनकपुर-बागेश्वर की पहाड़ी गांवों से जुड़े लोग जहां सात दशकों से रेल चलने का इंतजार कर रहे हैं.

वहीं यह क्षेत्र भारत-नेपाल की सीमा से लगे होने के चलते सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है.

ब्रिटिश कालीन महत्वाकांक्षी टनकपुर-बागेश्वर रेल परियोजना को लेकर खुद अंग्रेज कितने गंभीर थे, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अंग्रेजों ने 1902 में इस रेल योजना पर काम करना शुरू कर दिया था.

वहीं अग्रेजों ने सर्वे कराकर टनकपुर से बागेश्वर तक रेल लिंक की 155 किमी की दूरी भी तय कर दी थी. जबकि स्थानीय लोग सात दशक इस पुरानी मांग को इस बार आने वाले रेल बजट में पास होने का सपना देख रहे हैं.

बरहाल टनकपुर-बागेश्वर रेल परियोजना को लेकर अब तक कोई भी केंद्र सरकार गंभीर नजर नहीं आयी है. वहीं काली और शारदा नदी के किनारे 67 किमी भारत नेपाल की खुली सीमा भी है. जिसके चलते पुराना रेल लाइन लिंक सर्वे भी अब भारत-नेपाल की सामूहिक पंचेश्वर बांध योजना के चलते अब खटाई में नजर आ रहा है. वहीं इस बात की तस्दीक स्थानीय लोग भी करने लगे हैं.

गौरलतब है कि टनकपुर-बागेश्वर रेल योजना उन सैकड़ों गांव वालों के लिए लाइफ लाइन साबित होगी जो आज भी बुनियादी सुविधा से महरूम हैं.

वहीं यह देखना होगा की उतराखंड से चुन कर गये बीजेपी के पांचों सांसद दशकों से यहां रेल आने के सपने को साकार करा पाते है या नहीं.

Tags: Uttarakhand news

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