26 अप्रैल से शुरू हो रही है चारधाम यात्रा, फिलहाल श्रद्धालुओं को जाने की नहीं है इजाजत

26 अप्रैल को गंगोत्री-यमुनोत्री धाम (Gangotri-Yamunotri Dham) के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा (Chardham Yatra) की शुरुआत हो जाएगी. फिर 29 अप्रैल को बाबा केदारनाथ और 30 अप्रैल को भगवान बद्रीनाथ के कपाट खुलेंगे.
26 अप्रैल को गंगोत्री-यमुनोत्री धाम (Gangotri-Yamunotri Dham) के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा (Chardham Yatra) की शुरुआत हो जाएगी. फिर 29 अप्रैल को बाबा केदारनाथ और 30 अप्रैल को भगवान बद्रीनाथ के कपाट खुलेंगे.

26 अप्रैल को गंगोत्री-यमुनोत्री धाम (Gangotri-Yamunotri Dham) के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा (Chardham Yatra) की शुरुआत हो जाएगी. फिर 29 अप्रैल को बाबा केदारनाथ और 30 अप्रैल को भगवान बद्रीनाथ के कपाट खुलेंगे.

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देहरादून. उत्तराखंड (Uttarakhand) की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा (Chardham Yatra) की शुरुआत 26 अप्रैल को होगी. 26 अप्रैल को गंगोत्री-यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा की शुरुआत हो जाएगी. फिर 29 अप्रैल को बाबा केदारनाथ और 30 अप्रैल को भगवान बद्रीनाथ के कपाट खुलेंगे. इन चारधामों के कपाट खुलने के साथ साल 2020 में अगले 6 महीने तक यात्रा चलती रहेगी. हालांकि यह बात दीगर है कि इस बार चारधाम यात्रा की शुरुआत में वो रौनक नज़र नहीं आएगी, क्योंकि हर बार की तरह इस बार हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ नहीं उमड़ेगी. जिसकी वजह है दुनिया में हजारों लोगों की जान ले चुका कोरोना वायरस (Coronavirus).

उत्तराखंड में लॉकडाउन (Lockdown) का दूसरा फेज 30 अप्रैल तक हो सकता है. ऐसे में साफ है कि किसी भी बड़े आयोजन में श्रद्धालुओं की भीड़ नहीं उमड़ सकती. इसलिए साफ है कि चारधाम यात्रा की इस बार नियत तिथि पर शुरुआत तो होगी, लेकिन श्रद्धालु इस बार शुरुआत में चारधाम नहीं पहुंच पाएंगे. दरअसल लॉकडाउन की वजह से ट्रांसपोर्ट पर कड़ी पाबंदी है, ऐसे में मौजूदा हालात को देखते हुए इस बात की उम्मीद बेहद कम है कि राज्यों की सीमाएं जल्द खुलें. वहीं, राज्य के अंदर जिलों में भी ट्रांसपोर्ट सीमित रहने की उम्मीद है.

2019 में 32 लाख श्रद्धालुओं ने की थी यात्रा
उत्तराखंड में साल 2019 की बात करें तो करीब 32 लाख श्रद्धालुओं ने चारधाम के दर्शन किए. इस बार इस संख्या में बड़ी गिरावट आ सकती है. श्रद्धालुओं की संख्या में कमी का सीधा नुकसान तीर्थ-पुरोहितों और स्थानीय लोगों को होगा, जिनकी आजीविका का साधन की चारधाम यात्रा है. उत्तराखंड में 2013 में आई केदारनाथ आपदा के 6 साल बाद अब हालात सामान्य होने लगे थे, लेकिन कोरोना वायरस में फिर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है.
यात्रा के लिहाज से पहले दो मह‍ीने महत्‍वपूर्ण


यात्रा के शुरुआती दो महीने मई और जून बेहद अहम होते हैं, क्योंकि जुलाई से सितंबर तक बारिश की वजह से यात्रियों की संख्या वैसे ही कम हो जाती है. तीर्थ पुरोहित हरीश डिमरी कहते हैं कि इस तरह की स्थिति सभी के लिए नुकसानदायक है. लेकिन, कोरोना जैसी महामारी की मार सब पर पड़ी है,  इसलिए परेशान होकर काम भी नहीं चल सकता. हालांकि, 60 साल की उम्र में इस तरह की स्थिति चारधाम में वो भी पहली बार देख रहे हैं.


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