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शेल्टर फंड जमा नहीं करने पर कईं प्रोजेक्ट होंगे सील

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राजधानी देहरादून के कई बिल्डर्स के रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स सील होने जा रहे हैं. एमडीडीए ने देहरादून के करीब 16 से ज्यादा बिल्डर्स को नोटिस जारी कर शेल्टर फंड जमा करने को कहा था. जिसके बाद शेल्टर फंड जमा नहीं करने वाले बिल्डर्स के प्रोजेक्ट सील किये जांयेंगे. देहरादून में बन रहे रेजीडेंशियल प्रोजेक्ट्स में करीब 40 से ज्यादा बिल्डर्स के प्रोजेक्ट में ईडब्लूएस यानी इक्नामी वीकर सैक्शन के फ्लैट्स नहीं बनाये गये हैं.

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राजधानी देहरादून के कई बिल्डर्स के रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स सील होने जा रहे हैं. एमडीडीए ने देहरादून के करीब 16 से ज्यादा बिल्डर्स को नोटिस जारी कर शेल्टर फंड जमा करने को कहा था. जिसके बाद शेल्टर फंड जमा नहीं करने वाले बिल्डर्स के प्रोजेक्ट सील किये जांयेंगे.

देहरादून में बन रहे रेजीडेंशियल प्रोजेक्ट्स में करीब 40 से ज्यादा बिल्डर्स के प्रोजेक्ट में ईडब्लूएस यानी इक्नामी वीकर सैक्शन के फ्लैट्स नहीं बनाये गये हैं. एमडीडीए सचिव का कहना है कि बिल्डर्स अपने प्रोजेक्ट के नक्शों में तो ईडब्लूएस की व्यवस्था दिखाते हैं. लेकिन धरातल पर कोई निर्माण नहीं करते हैं. जिसके चलते शासन के नियमानुसार बिल्डर्स को तीन किशतों में डेढ साल के भीतर अपना कुल शेल्टर फंड जमा करना होगा.

बिल्डर्स के बिल्डप एरिया के 15 प्रतिशत शुल्क शेल्टर फंड के रुप में जमा करना होता है. बिल्डर्स ने बार बार नोटिस के बाद भी शेल्टर फंड नही जमा किया है जिसके तहत उनके प्रोजेक्ट सील किये जा रहे हैं.



शेल्टर फंड के मामले में मेयर विनोद चमोली का कहना है कि एमडीडीए को ये कार्रवाई बहुत पहले करनी चाहिए थी. क्योंकि ईडब्लूएस के लचर नियमों का लाभ उठाकर कई बिल्डर्स गरीबों के लिये आवास नहीं बनाते हैं. ऐसे में जरुरी है कि जो प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं उन्में भी शैल्टर फंड वसूल किया जाये. जिससे राजधानी में आम आदमी को भी घर मिल सके.
रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स में इक्नामी वीकर सेक्शन के नियम को बायलाज में शामिल किया गया लेकिन इसे प्रभावी करना एम़डीडीए के लिये सम्भव नहीं है, लेकिन शैल्टर फंड के नियम को अगर सख्ती से पालन करवाया जाता है तो इसका आम आदमी को फायदा होगा.
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