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कॉर्बेट टाइगर रिजर्व घोटाला: सीईसी की जांच की आंच में कई अफसर, टूर डायरी तलब

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व घोटाला: सीईसी की जांच की आंच में कई अफसर.

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व घोटाला: सीईसी की जांच की आंच में कई अफसर.

Corbett Tiger Reserve Scam: कार्बेट टाइगर रिजर्व के पाखरौ में टाइगर सफारी बनाने में गंभीर अनियमितताएं बरतने पर जांच शुर ...अधिक पढ़ें

देहरादून. कार्बेट टाइगर रिजर्व के पाखरौ में टाइगर सफारी बनाने के साथ बिना वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृत के कई और निर्माण कार्य कराने का मामला अभी थमा नहीं है. राज्य सरकार हाईकोर्ट के निर्देश के बाद भले ही तीन आईएफएस अफसरों पर गाज गिरा चुकी हो, लेकिन अभी सुप्रीम कोर्ट का डंडा बाकी है. सूत्रों की मानें तो लपेटे में नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी समेत शासन के कुछ अफसर भी आ सकते हैं.

कार्बेट टाइगर रिजर्व में कंडी रोड निर्माण, मोरघट्टी तथा पाखरौ गेस्ट हाऊस परिसर में भवनों का निर्माण, जलाशय के निर्माण के लिए पेड़ों का कटान तथा पाखरौ में टाइगर सफारी के लिए पेड़ों के अवैध कटान का मामला सुर्खियों में है. मामला इतना गंभीर था कि हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2021 में इस पूरे घोटाले का सो मोटो संज्ञान लिया और इस पर जांच बैठा दी. जांच टीम ने दो नंवबर को हाईकोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंपी. इसके बाद हाईकोर्ट ने इस साल छह जनवरी को डीएफओ कालागढ़ टाइगर रिजर्व को दोषी पाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई के आदेश जारी किए.

इस बीच मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गया. इस साल 28, 29, 30 मार्च को सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी यानि सीईसी ने कार्बेट पार्क का दौरा किया. दौरा करने के बाद सीईसी ने 29 अप्रैल को राज्य सरकार और एनटीसीए के अधिकारियों को दिल्ली तलब किया था, लेकिन इस बीच राज्य सरकार ने सीईसी की मीटिंग से पहले ही 27 अप्रैल को बड़ी कार्रवाई करते हुए मामले में दोषी कार्बेट टाइगर रिजर्व के अंतर्गत कालागढ़ टाइगर रिजर्व के तत्कालीन डीएफओ किशन चंद, तत्कालीन चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन जेएस सुहाग को सस्पेंड कर दिया. इसी आदेश के तहत कार्बेट पार्क के डायरेक्टर राहुल को भी कार्बेट से हटाकर अटैच कर दिया गया था.

कार्रवाई के बाद मामला अब और रोचक हो गया है. 29 अप्रैल को सीईसी की दिल्ली में हुई मीटिंग में राज्य सरकार के अफसरों से करीब चार घंटे तक कड़े सवाल जवाब हुए. यानि की सीईसी हाल ही में लिए गए एक्शन से संतुष्ट नहीं है. सीईसी को जब राज्य सरकार के अधिकारियेां ने जानकारी दी कि कार्बेट में अवैध रूप से जो गेस्ट हाऊस बनाए गए थे, उनको तोड़ दिया गया है. सीईसी ने जवाब से असंतुष्ट हो कर कहा कि एक्शन लेने में इतना डिले क्यों किया गया. तोड़ना ही था तो पहले क्यों नहीं तोड़ा गया. यही नहीं सीईसी ने कहा कि अवैध निर्माण होने ही क्यों दिया गया.

सीईसी ने राज्य सरकार से संबंधित अफसरों की टूर डायरी, अवैध निर्माण के लिए फंडिग का स्रोत और कुल फंडिग का ब्यौरा तलब किया है. सीईसी ने पूरे मामले की गहराई में जाते हुए अफसरों की निरीक्षण टिप्पणियों का भी ब्यौरा मांगा है.

Tags: Corbett Tiger Reserve, Dehradun news, Uttarakhand news

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