COVID-19: साहब, क्‍या हुआ हमारा पेट खाली है, संतोष है कि हमारी वजह से लाखों का पेट भर रहा है...
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COVID-19: साहब, क्‍या हुआ हमारा पेट खाली है, संतोष है कि हमारी वजह से लाखों का पेट भर रहा है...
उत्‍तराखंड के विभिन्‍न इलाकों में आवयश्‍क वस्‍तुओं की अपूर्ति करने वाले ललित अपनी पत्‍नी के साथ सड़क में खाना खाते हुए.

लोगों को आवश्‍यक वस्‍तुओं (essential commodities) की आपूर्ति करने वालों को रास्‍ते में न ही चाय मिल रही है और न ही खाना (Food) नसीब हो रहा है.

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नैनीताल. लॉकडाउन (Lockdown) में आप अपने घरों में सुरक्षित है और सभी आपकों सभी जरूरी सुविधाएं मिल मिल रही हैं. मगर सड़क पर कुछ लोग अपनी जान की बाजी लगाकर आपके घरों के चुल्हे जलाने के जद्दोजहद में जुटे हुए हैं. ऐसी ही कहानी बेलुवाखान के ललित प्रसाद (Lalit Prasad) की है. कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण के डर के बीच ललित रोज सुबह उठकर घर से निकल जाते हैं. वे हल्द्वानी से भवाली, भीमताल और नैनीताल तक राशन व सब्जी की आपूर्ति (Ration and Vegetable Supply) करते हैं.

परिवार को बिमारी की जकड़ में आने का डर पल-पल बना रहता है. चिंता इस बात की भी होती है कि उन्‍होंने कुछ खाया या नहीं. सड़कों पर जनता के लिये दिन रात लगे कोरोना वारियर ललित की पत्नी दिन के वक्त गांव से खाना लाकर सड़क पर पहुंचती है और सड़क किनारे बैठकर ललित खाना खाकर अपनी ड्यूटी में फिर जुट जाते हैं. सिर्फ ललित ही नहीं बल्कि अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ, चम्पावत समेत अन्य पहाड़ी जिलों में राशन व सब्जी लाने वाले लोगों की कहानी ऐसी ही है, जो रोजाना लोगों को लॉकडाउन के दौरान सभी सुविधाएं देने में जुटे हुए हैं.

कितनी हैं इस दौरान चुनौतियां
लॉकडाउन से बदली परिस्थितियों के बाद इन लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. सभी स्थानों पर बंद पड़े होटल से सप्लाई में जुटे इन लोगों को ना तो कहीं पर चाय मिल पाती है और ना ही खाना. जिसके चलते, सिर्फ पानी की बोतल से ही घंटों तक का सफर तय करना पड़ता है. ललित प्रसाद बताते हैं कि सुबह निकलने के बाद वो लगातार हर संभव समय पर सब्जी व राशन पहुंचाने की चुनौती उनके आगे बनी रहती है. घर से भी खाना आता है, तो उसमें भी ज्यादा समय जाया नहीं कर सकते, क्योंकि लोगों तक ये पहुंचना होता है.



परिवार को दोहरी चिंता


कोरोना के संक्रमण खतरे के दौरान परिवार को भी ऐसे कोरोना वारियर्स की दोहरी चिंता है. ललित की पत्नी मीना बताती हैं कि कोरोना वायरस आने के बाद रोजाना इस बात की चिंता ज्यादा होती है कि काम के दौरान इन पर बिमारी ना लग जाए, जिससे उनके परिवार पर मुसीबत आ जाए. ललित की पत्नी ने कहा कि उनको गर्व भी है कि इस संकट के दौर में उनके पति लोगों की सेवा में जुटे हैं, लेकिन खाने पीने की दिक्कतें जो हैं उसको वो कुछ हद तक कम करने में जुटी रहती हैं.

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First published: April 13, 2020, 8:58 PM IST
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