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सालों से यहां मुर्दे भी ले रहे हैं अपनी वृद्धावस्था पेंशन

सालों से यहां मुर्दे भी ले रहे हैं अपनी वृद्धावस्था पेंशन

वाह रे अधिकारी आप चाहें तो कुछ भी कर सकते हैं,जिंदा को मृत और मृत को जिंदा भी साबित कर सकते हैं. ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला देहरादून जिले के कालसी ब्लॉक में सामने आया है, जहां पिछले कई सालों से मृतक लोगों के नाम से वृद्धावस्था पेंशन जारी की जा रही है और उस पैसे को लगातार ठिकाने भी लगाया जा रहा है.

वाह रे अधिकारी आप चाहें तो कुछ भी कर सकते हैं,जिंदा को मृत और मृत को जिंदा भी साबित कर सकते हैं. ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला देहरादून जिले के कालसी ब्लॉक में सामने आया है, जहां पिछले कई सालों से मृतक लोगों के नाम से वृद्धावस्था पेंशन जारी की जा रही है और उस पैसे को लगातार ठिकाने भी लगाया जा रहा है.

वाह रे अधिकारी आप चाहें तो कुछ भी कर सकते हैं,जिंदा को मृत और मृत को जिंदा भी साबित कर सकते हैं. ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला देहरादून जिले के कालसी ब्लॉक में सामने आया है, जहां पिछले कई सालों से मृतक लोगों के नाम से वृद्धावस्था पेंशन जारी की जा रही है और उस पैसे को लगातार ठिकाने भी लगाया जा रहा है.

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    वाह रे अधिकारी आप चाहें तो कुछ भी कर सकते हैं,जिंदा को मृत और मृत को जिंदा भी साबित कर सकते हैं. ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला देहरादून जिले के कालसी ब्लॉक में सामने आया है, जहां पिछले कई सालों से मृतक लोगों के नाम से वृद्धावस्था पेंशन जारी की जा रही है और उस पैसे को लगातार ठिकाने भी लगाया जा रहा है.

    कालसी ब्लॉक के रूपऊ पंचायत में लगभग पांच साल पहले स्वर्गवासी 14 लोगों को नियमित रूप से कागजों में पेंशन दी जा रही है. वृद्धावस्था पेंशन भुगतान फर्जीवाड़े के इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब ग्राम प्रधान सहकारी समिति कोटी कार्यालय में पेंशनर्स की जानकारी हासिल करने गए थे. वहां मिली जानकारी के बाद तो उनके होश ही उड़ गए. वहां पर कई जीवित ऐसे लोग हैं, जो पेंशन के लिए दर-दर भटक रहे हैं, तो वहीं कई मृतक ऐसे भी हैं जिनके खातों में लगातार पेंशन जा रही है.

    इसके बारे में आजतक मृतक के परिजनों तक को नहीं पता है. फर्जीवाड़ा कर समिति के अधिकारियों ने पैसे की बंदरबांट कर दी और लाखों रुपए को ठिकाने लगा दिया. सबसे बड़ी बात ये है कि इसमें ग्राम प्रधान, सहकारी समिति के सचिव, एडीओ समाज कल्याण से लेकर ग्राम विकास अधिकारी तक की संस्तुति होती है और रिपोर्ट भी लगती है, फिर कैसे मृतकों के नाम पर लाखों का फर्जीवाड़ा कर दिया गया.

    इससे तो ये साफ है कि ऊपर से लेकर नीचे तक सब मिले हुए हैं. भले ही मामला प्रकाश में आने के बाद कागजों की जांच शुरू कर दी गई हो और अधिकारी कार्रवाई की बात कर रहे हो, पर सच तो यही है कि हमारा सिस्टम इस प्रकार से भ्रष्ट हो चुका है कि अधिकारी अब लाशों पर भी पैसा कमाना चाहते हैं.

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