उत्तराखंड में 10000 टिहरी बांध विस्थापितों पर 21 करोड़ रुपए बकाया, कट सकता है पानी और सीवर का कनेक्शन

सरकार उसकी बकाया राषि का भुगतान करे या फिर वो खुद विस्थापितों से वसूले. (सांकेतिक फोटो)

सरकार उसकी बकाया राषि का भुगतान करे या फिर वो खुद विस्थापितों से वसूले. (सांकेतिक फोटो)

टिहरी बांध बनने से विस्थापित हुए परिवारों के ऊपर पिछले लगभग 15 साल का पानी और सीवर का बिल बकाया. जल संस्थान ने सरकार को बिल के लिए भेजा पत्र. नई टिहरी से ऋषिकेश, देहरादून और हरिद्वार के आसपान इन लोगों को बसाया गया है.

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देहरादून. उत्तराखंड जल संस्थान नई टिहरी, ऋषिकेश, हरिद्वार और देहरादून में बसे 10000 टिहरी बांध विस्थापितों के पेयजल और सीवर कनेक्शन (Sewer Connection) काट सकता है. करीब दस हजार टिहरी बांध (Tehri Dam) विस्थापितों ने पिछले डेढ़ दशक से पेयजल और सीवर का टैक्स नहीं भरा है. ये रकम अब 21 करोड़ पहुंच गई है. जल संस्थान पिछले कुछ सालों से इनके बिल जनरेट तो करता है, लेकिन भेजता नहीं है.

टिहरी बांध बनने के बाद इससे प्रभावित हुए परिवारों को 2006 के आसपास नई टिहरी से लेकर ऋषिकेश के खांडगांव, पशुलोक, हरिद्वार के श्यामपुर, देहरादून के देहराखास, बंजारावाला में विस्थापित किया गया. विस्थापित परिवार करीब दस हजार की संख्या में हैं. टिहरी बांध विस्थापितों के लिए कई सिफारिशें करने वाली हनुमंत राव कमेटी की रिपोर्ट को आधार मानकर विस्थापित 2006 से न पानी का बिल देते हैं और न सीवर का साल 2018 तक पानी और सीवर शुल्क की ये राशि पंद्रह करोड़ पहुंच गई थी. आज की डेट में ये राशि बढ़कर 21 करोड़ के पार  पहुंच गई है. अब जल संस्थान चाहता है कि या तो सरकार उसकी बकाया राषि का भुगतान करे या फिर वो खुद विस्थापितों से वसूले.

शुल्क माफी और वसूली के लिए कमेटी

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