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Dehradun: अंतिम सांसें गिन रही जनता की सवारी, RTA के फैसले से ऑटो-विक्रम चालकों में मचा हड़कंप

देहरादून के आरटीओ सुनील शर्मा ने जानकारी दी है कि राजधानी में करीब 794 विक्रम पंजीकृत हैं और आरटीए में अब तक सीएनजी, इल ...अधिक पढ़ें

    रिपोर्ट- हिना आज़मी

    देहरादून. उत्तराखंड की राजधानी देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश में 31 मार्च 2023 के बाद 10 साल पुराने डीजल से चलने वाले ऑटो और विक्रम वाहन बंद कर दिए जाएंगे. इससे पहले विक्रम चालक सीएनजी, इलेक्ट्रिक और बीएस 6 गाड़ियों के लिए आवेदन कर सकते हैं. देहरादून में विक्रम ही ज्यादातर प्रयोग किया जाने वाला छोटा शेयरिंग वाहन है. इसे आम जनता की सवारी भी कहा जाता है. अगर यह बंद होंगे, तो इससे जुड़े लोगों की आजीविका पर गहरा असर पड़ेगा.

    News 18 Local से बातचीत में विक्रम जनकल्याण समिति के अध्यक्ष राजेंद्र कुमार का कहना है कि संभागीय परिवहन प्राधिकरण (RTA) द्वारा अचानक लिए गए इस फैसले से सिर्फ देहरादून में ही करीब 800 विक्रम चालकों के परिवार जुड़े हैं. उनका कहना है कि आरटीए द्वारा लिए गए निर्णय से पहले विक्रम चालकों से चर्चा की जानी चाहिए थी. पहले यदि ऐसा होता, तो हम हमारी समस्याएं बता पाते.

    विक्रम चालक राशिद ने बताया कि उन्होंने कुछ वक्त पहले ही लोन पर विक्रम लिया था, जिसकी किश्त चल रही है. उन्हें बीएस-6 वाहनों के लिए रजिस्ट्रेशन कराने के लिए कहा जा रहा है. उनका कहना है कि अगर वह रजिस्ट्रेशन कर देते हैं तो उनके पास सिर्फ दो महीने का टाइम होगा कि वह गाड़ी खरीदें. ऐसे में वह लाखों रुपये की नई गाड़ी कैसे खरीदेंगे. वहीं, महमूद का कहना है कि उन्होंने 2020 की शुरुआत में गाड़ी लोन पर खरीदी थी. इसके बाद लॉकडाउन लग गया. कामकाज चल नहीं पा रहा था. अब थोड़ा सा चला है, तो अब गाड़ियां ही बंद कर दी जा रही हैं. हमारे सामने तो परिवार को पालने का संकट खड़ा हो जाएगा.

    देहरादून के आरटीओ सुनील शर्मा ने जानकारी दी है कि राजधानी में करीब 794 विक्रम पंजीकृत हैं और आरटीए में अब तक सीएनजी, इलेक्ट्रॉनिक व बीएस-6 की सवारी के लिए 65 फीसदी आवेदन किए जा चुके हैं. उन्होंने बताया कि रोजाना आवेदन किए जा रहे हैं. पर्यावरण संरक्षण को लेकर NGT की ओर से दिए गए निर्देश के बाद RTA ने यह फैसला लिया है.

    Tags: Dehradun news, RTO, Uttarakhand news

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