नए हाथों में, नई एंबुंलेंस के साथ उत्तराखंड में चकाचक है 108 एंबुलेंस सेवा

नए हाथों में जाने पर सरकार ने कैंप को 78 नई एंबुलेंस दी हैं और बाकी पुरानी एंबुलेंस भी फ़िट हैं.

News18 Uttarakhand
Updated: August 12, 2019, 7:52 PM IST
नए हाथों में, नई एंबुंलेंस के साथ उत्तराखंड में चकाचक है 108 एंबुलेंस सेवा
पहाड़ की लाइफ़ लाइन 108 एंबुलेंस सेवा के संचालन का ज़िम्मा करीब तीन महीने पहले नई संस्था को दे दिया गया है और अब तक इसकी पर्फॉर्मेंस संतोषजनक रही है.
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Updated: August 12, 2019, 7:52 PM IST
पहाड़ की लाइफ़ लाइन 108 एंबुलेंस सेवा के संचालन का ज़िम्मा करीब तीन महीने पहले नई संस्था को दे दिया गया है. अब यह काम गैर सरकारी संस्था कैम्प (कम्यूनिटी एक्शन थ्रू मोटिवेशनल प्रोग्राम) को दिया गया. कैंप ने मई से काम करना शुरु किया है और तीन महीने में अब तक इसकी पर्फॉर्मेंस संतोषजनक रही है. यह इसलिए भी महसूस हो रहा है क्योंकि इससे एक साल पहले तक 108 एंबुलेंस पूरी तरह पटरी से उतर गई थी. ऐसा क्यों हुआ था और कैंप ने क्या कुछ ऐसे बदलाव किए हैं कि अचानक सब कुछ बदल गया? न्यूज़ 18 की पड़ताल...

रिस्पॉंस टाइम बेहतर हुआ

उत्तराखण्ड के लिए यह राहत की बात है कि पहाड़ की लाइफ लाइन 108 सेवा राज्य के लोगों के लिए संजीवनी साबित हो रही है. गैर सरकारी संस्था कैम्प के साथ करार में सेवा शर्तों में बदलाव किए गए हैं. पहले के मुकाबले रिस्पॉंस टाइम को कम किया गया है. अब 108 पर कॉल करने के बाद 20 से 30 मिनट के अंतराल में लोगों को तुरंत 108 की सेवा उपलब्ध कराई जा रही है. पहाड़ी इलाकों में डिस्टेंस के हिसाब से 108 सेवा समय पर पहुंचने के लिए गाड़ियों में जीपीएस सिस्टम लगाए गए हैं ताकि लोकेशन सर्च कर जल्द से जल्द लोगों को सेवा पहुंचाई जा सके.

108 सेवा के जनरल मैनेजर अनिल शर्मा ने न्यूज़ 18 से बातचीत में बताया कि एक मई से कैम्प को ज़िम्मा मिलने के बाद से प्रदेश भर में 108 सेवा ने 24,184 लोगों को अस्पताल पहुंचाया है. इनमें से 8,506 केस गर्भवती महिलाओं से सम्बन्धित थे. शर्मा ने दावा किया कि 108 एंबुलेंस सेवा प्रदेश में सुचारु रुप से संचालित हो रही है.

एक नज़र कुछ ज़िलों में 108 एंबुलेंस सेवा पर

  • चमोली ज़िले में 13 एंबुलेंस हैं और सभी काम कर रही हैं.

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  • पौड़ी में 17 नई एंबुलेंस काम कर रही हैं.

  • रुद्रप्रयाग में 7 एंबुलेंस हैं. ये गाड़ियां पुरानी हैं लेकिन फ़िट हैं और काम कर रही हैं.

  • नैनीताल में 108 की कुल 13 एंबुलेंस हैं. सब नई हैं और काम कर रही हैं.

  • टिहरी में 15 एंबुलेंस हैं और सभी चल रही हैं.


जब बदनाम हो गई थी 108 सेवा

उत्तराखंड में 2008 में शुरु हुई 108 एंबुलेंस सेवा कुछ साल तक तो बहुत अच्छी चली और पहाड़ में जीवनदायिनी तक कही गई लेकिन 2018 में इस सेवा के हाथ बदनामी और बददुआएं आईं. 2008 में शुरु हुई 108 सेवा का संचालन गैर सरकारी संस्था जीवीके ने किया. शायद 108 एंबुलेंस में कोई दिक्कत नहीं आती अगर एक तकनीकी पेंच की वजह से जीवीके फ़ाइनेंशियल क्राइसिस में नहीं पड़ती.

जीवीके के साथ जुड़े रहे एक पूर्व कर्मचारी ने बताया कि दिक्कत तब खड़ी हुई जब जीवीके का टीडीएस कटने लगा. जीवीके ने तर्क दिया कि नो प्रॉफ़िट, नो लॉस पर काम करने वाली संस्था होने की वजह से उसका टीडीएस नहीं कटना चाहिए. इस बीच जीवीके के 12 करोड़ रुपये इनकम टैक्स के पास जमा हो गए. इधर सरकार ने संस्था को संचालन के पैसे देने से यह कहकर इनकार कर दिया कि वह अपना टीडीएस निकालकर काम चलाए. इससे जीवीके बड़े वित्तीय संकट में घिर गई.

हड़ताल और मेंटेनेंस की कमी ने तोड़ा

वित्तीय संकट की वजह से जीवीके के पास न गाड़ियों का मेंटेनेंस करने के पैसे रहते थे, न कर्मचारियों को तनख्वाह देने के. इसकी वजह से 108 एंबुलेंस सेवा बुरी तरह प्रभावित हुई. कर्मचारी बार-बार हड़ताल पर जाने लगे थे और कभी डीज़ल की कमी, कभी टायरों के अभाव और कभी मैकेनिकल दिक्कत की वजह से 108 सेवा बार-बार बाधित होती रही.

नए हाथों में जाने पर सरकार ने कैंप को 78 नई एंबुलेंस दी हैं और बाकी पुरानी एंबुलेंस भी फ़िट हैं. कैंप को शानदार काम का सर्टिफ़िकेट देने से पहले यह जानना भी ज़रूरी है कि शुरुआती दौर में जीवीके ने भी राज्य में बहुत अच्छा काम किया था और 108 एंबुलेंस को राज्य की जीवनदायिनी का गौरव हासिल करवाया था.

(देहरादून से सबीहा परवीन की रिपोर्ट)

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First published: August 12, 2019, 7:51 PM IST
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