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सियासी उठा-पटक, आराकोट आपदा और ज़हरीली शराब से मौतों के लिए याद किया जाएगा 2019
Dehradun News in Hindi

Sunil Navprabhat | News18 Uttarakhand
Updated: December 31, 2019, 2:20 PM IST
सियासी उठा-पटक, आराकोट आपदा और ज़हरीली शराब से मौतों के लिए याद किया जाएगा 2019
एक नज़र सिलसिलेवार 2019 की महत्वपूर्ण घटनाओं पर

सरकार ने इस दौरान कुछ साहसिक फैसले किए तो उसे आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा.

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देहरादून. साल 2019 उत्तराखंड के लिए उथल-पुथल भरा रहा. सियासी हिसाब से भी और सामाजिक  लिहाज से भी. भाजपा ने इस साल लोकसभा चुनाव, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव और पिथौरागढ़ उपचुनाव में जीत हासिल तो की लेकिन कई मोर्चों पर उसे जूझना भी पड़ा. सरकार ने इस दौरान कुछ साहसिक फैसले किए तो उसे आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा. विपक्ष में बैठी कांग्रेस साल भर अंदरूनी राजनीति से जूझते हुए अपने लिए सियासी ज़मीन तलाशती नजर आई. एक नज़र सिलसिलेवार 2019 की महत्वपूर्ण घटनाओं पर...

ज़हीरीली शराब से मौतें 

इस साल आबकारी विभाग सुर्खियों में रहा. साल की शुरूआत में ही फरवरी में कच्ची शराब मामले ने सनसनी मचा दी. रुड़की में कच्ची शराब पीने से चालीस से ज्यादा लोगों की मौत हो गई. विपक्ष के हो-हल्ले और चारों ओर आलोचनाओं के बीच दबाव में आई सरकार को कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य की अध्यक्षता में जांच के लिए तीन विधायकों की समिति बनानी पड़ी. इस मामले में आबकारी और पुलिस विभाग के आठ कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया.



खंडूड़ी ज़रूरी और धुआंधार प्रचार 



मार्च में लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी प्रदेश भाजपा को तब बड़ा झटका लगा जब पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व सीएम बीसी खंडूड़ी के पुत्र मनीष खंडूड़ी कांग्रेस में शामिल हो गए. ख़ास बात यह रही कि भाजपा के 2012 के चुनाव नारे ‘खंडूड़ी है ज़रूरी’ को इस बार कांग्रेस ने इस्तेमाल किया.

अप्रैल का शुरुआती महीना सियासी दलों के लिए बेहद व्यस्तता भरा रहा. 11 अप्रैल को 17वीं लोकसभा के चुनाव के लिए वोटिंग हुई. इससे पहले पांच अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी ने देहरादून के परेड ग्राउंड में पहुंचकर जनसभा को संबोधित किया तो छह अप्रैल को राहुल गांधी ने श्रीनगर, अल्मोड़ा और हरिद्वार पहुंचकर कांग्रेस के लिए प्रचार किया.

केदारनाथ में मोदी और हरदा की हार 

मई की 19 तारीख को लोकसभा के लिए अंतिम चरण की वोटिंग से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने केदारनाथ पहुंचकर गुफा में ध्यान लगाया. मोदी के इस अचानक दौरे ने देश दुनिया ध्यान केदारनाथ की ओर खींचा. इसके कुछ ही दिन बाद 23 मई को लोकसभा चुनाव का परिणाम आते ही भाजपाइयों के चेहरे खिल उठे. भाजपा ने लोकसभा की पांचों सीटों पर रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज की.

नैनीताल लोकसभा सीट पर तो भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भटट ने उत्तराखंड में सबसे अधिक करीब तीन लाख मतों से जीत दर्ज की. उन्होंने पूर्व सीएम और कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत को पटखनी दी.

पंत का  जाना और पंचायती राज संशोधन एक्ट  

पांच जून, 2019 को अमेरिका में उपचार करा रहे प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री प्रकाश पंत का कैंसर की बीमारी से निधन हो गया. यह न सिर्फ भाजपा के लिए बल्कि उत्तराखंड की सियासत के लिए भी एक बड़ी क्षति थी.

साल 2019 त्रिवेंद्र सरकार के कुछ बेहतरीन फैसलों के लिए भी जाना जाएगा. जुलाई महीने में तीन महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुए. त्रिवेंद्र सरकार ने पचास साल की उम्र पार कर चुके अनुपयोगी साबित हो रहे अधिकारियों को सीआरएस देने का फैसला किया, तो 25 जुलाई को पंचायती राज संशोधन एक्ट भी अस्तित्व में आया. इसके तहत सरकार ने दो से अधिक बच्चों वालों के पंचायत चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी गई.

 

चैेंपियन का निष्कासन, आराकोट आपदा 

एक अन्य घटनाक्रम के तहत जुलाई महीने में ही दिल्ली से देहरादून तक भाजपा की खूब छीछालेदार कराने वाले विधायक कुंवर प्रणव सिंह को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया.

अगस्त में प्रदेश में आसमानी आफत कहर बनकर टूटी. उत्तरकाशी के आराकोट में बाढ़ और भूस्खलन की जद में आकर बीस लोगों की मौत हो गई. कई घर और कृषि भूमि तबाह हो गई. ब्रदीनाथ हाईवे पर लामबगड़ लैंडस्लाइड एरिया में यात्रियों की चलती बस के ऊपर बोल्डर गिरने से सात यात्रियों की दर्दनाक मौत हो गई थी.

डेंगू का डंक 

इसके बाद सितंबर लगते ही डेंगू ने पूरे प्रदेश को अपनी चपेट में ले लिया. राज्य भर में करीब दस हज़ार लोग डेंगू की चपेट में आए. सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार डेंगू से आठ लोगों की मौत हुई जिनमें छह मौतें देहरादून ज़िले में और दो मौतें नैनीताल ज़िले में हुईं.

हालांकि गैर सरकारी आंकड़ों के अनुसार डेंगू से मौत का मामला इससे कई गुना ज्यादा था. विपक्ष डेंगू के डंक को लेकर सरकार पर खूब हमलावर रहा.

19 साल का उत्तराखंड, देवस्थानम बोर्ड 

इस साल नौ नवंबर को उत्तराखंड 19 साल का हो गया. इसी दिन अयोध्या में राम जन्मभूमि मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना सुप्रीम फैसला सुनाया. देश भर की तरह उत्तराखंड में भी शांति व्यवस्था के मद्देनजर हाईअलर्ट किया गया था लेकिन इस ऐतिहासिक फैसले के बाद उत्तराखंड में माहौल पूरी तरह शांतिपूर्वक रहा. पुलिस प्रशासन के साथ ही सरकार ने भी राहत की सांस ली.

साल जाते-जाते दिसंबर में हुए विधानसभा के शीतकालीन सत्र में सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला और लिया. गंगोत्री, यमुनोत्री, बद्रीनाथ केदारनाथ समेत 51 मंदिरों के लिए सरकार चारधाम देवस्थानम बिल ले आई. भारी हो-हंगामे के बीच इसे सदन में पास भी करा लिया गया. इसे अभी राज्यपाल की मंज़ूरी मिलनी शेष है. हालांकि बिल को लेकर पंडा-पुरोहित समाज की ओर से विरोध प्रदर्शनों का दौर अब भी जारी है.

कांग्रेस की खींचतान 

बहरहाल  प्रदेश कांग्रेस के लिहाज से साल 2019 कुछ अच्छा नहीं रहा. पार्टी लोकसभा चुनाव में सभी पांचों सीटों पर अब तक के रिकॉर्ड मतों से चुनाव हार गई. पार्टी के भीतर इंदिरा, प्रीतम और हरीश रावत में शीतयुद्ध जारी रहा. यह अलग बात है कि हरीश रावत उपवास और ककड़ी पार्टी आदि नए-नए तरीकों से साल भर सुर्खियों में रहे.

रावत साल भर लगभग पैरलल कांग्रेस चलाते नज़र आए. साल जाते-जाते कांग्रेस की प्रदेश कमेटी भंग कर दी गई तो विरोधी गुट के कांग्रेसियों की आंखों की किरकिरी बने हरीश रावत को प्रभारी बनाकर असम भेज दिया गया.

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First published: December 31, 2019, 2:20 PM IST
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