लाइव टीवी

रामपुर तिराहा कांड के 25 बरस... अब तो टूटने लगी है इंसाफ़ की उम्मीद भी

Kishore Kumar Rawat | News18 Uttarakhand
Updated: October 2, 2019, 2:30 PM IST
रामपुर तिराहा कांड के 25 बरस... अब तो टूटने लगी है इंसाफ़ की उम्मीद भी
देहरादून में उत्तराखंड आंदोलन के शहीदों की याद में बनाया गया शहीद स्थल

बाल आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी कहती हैं कि दुख तो इस बात का है कि आज भी आरोपी बाहर हैं और किसी भी सरकार ने उन्हें सज़ा दिलवाने के लिए कुछ नहीं किया.

  • Share this:
देहरादून. रामपुर तिराहा कांड (Rampur Tiraha Case) को आज 25 साल पूरे हो गए हैं. पिछले 25 साल से उम्मीद कर रहे हैं कि उत्तराखंड (Uttarakhand) के अपराधियों, रामपुर तिहारा कांड के आरोपियों को सज़ा मिलेगी लेकिन अब यह उम्मीद भी टूटने लगी है. हक़ीक़त यह है कि इस मामले में प्रदेश की सरकारों ने गंभीरतापूर्वक पैरवी ही नहीं की और इस बात का ग़म आज राज्य सरकार में शामिल राज्य आंदोलनकारियों (Separate State Movement) को भी है. स्थिति यह है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए दिल्ली जा रहे उत्तराखंडियों पर ज़्यादतियां करने वालों को यूपी सरकार में तरक्की मिलती रही और उत्तराखंड की सरकारें जानबूझकर आंख-कान बंद किए रहीं.

आरोपी पाते रहे तरक्की 

02 अक्टूबर, 1994 का काला दिन आज भी उत्तराखंडियों के घाव हरे कर देता है. अलग राज्य के दर्जे की मांग को लेकर दिल्ली जा रहे बेकसूर लोगों पर यूपी पुलिस ने मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहे पर लाठीचार्ज ही नहीं किया, फायरिंग की और महिलाओं की अस्मत से खिलवाड़ किया गया. तत्कालीन सपा सरकार ने तत्कालीन डीएम अनंत कुमार सिंह, डीआईजी बुआ सिंह और एसपी आरपी सिंह को बचाया.

rampur tiraha case, shaheed sthal, 2 अक्टूबर को रस्म अदायगी के लिए सभी दलों के नेता यहां जुटते हैं.
2 अक्टूबर को रस्म अदायगी के लिए सभी दलों के नेता यहां जुटते हैं.


2000 में अलग राज्य बनने के बाद उत्तराखंड की सरकारों को इस केस को जिस गंभीरता से लड़ना चाहिए था किसी भी सरकार ने वह नहीं किया. नतीजा रामपुरा तिराहा कांड के अपराधी तरक्की पाते रहे और उत्तराखंडी घुटते रहे.

आज भी भर आती हैं आंखें 

रामपुर तिराहा कांड की प्रत्यक्षदर्शी ऊषा नेगी की आंखें उस समय को याद करते हुए भर आती हैं. वह कहती हैं कि वह उस काली रात को कभी नहीं भूल सकतीं क्योंकि उस दिन निहत्थे लोगों को पुलिस में गोली मारी और महिलाओं की अस्मत से खिलवाड़ किया गया.
usha negi, बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी रामपुर तिराहा कांड की प्रत्यक्षदर्शी रही हैं.
बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी रामपुर तिराहा कांड की प्रत्यक्षदर्शी रही हैं.


बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी कहती हैं कि दुख तो इस बात का है कि आज भी आरोपी बाहर हैं और किसी भी सरकार ने उन्हें उनके कृत्यों की सज़ा दिलवाने के लिए कुछ नहीं किया.

सभी जांच रिपोर्ट में दोषी पाए गए आरोपी 

राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के अध्यक्ष रहे बीजेपी नेता रविंदर जुगरान भी कहते हैं कि कि अब तक किसी भी सरकार ने इस मामले में कुछ नहीं किया. जुगरान कहते हैं कि इस कांड की सीबीआई, महिला आयोग और मानव अधिकार आयोग सभी ने जांच की और सभी ने अपनी रिपोर्ट में आरोपियों को दोषी माना है लेकिन 25 साल से यह मामला कोर्ट में फाइल में दबा हुआ है.

ravindra jugran, राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के अध्यक्ष रहे बीजेपी नेता रविंदर जुगरान भी कहते हैं कि कि अब तक किसी भी सरकार ने इस मामले में कुछ नहीं किया.
राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के अध्यक्ष रहे बीजेपी नेता रविंदर जुगरान भी कहते हैं कि कि अब तक किसी भी सरकार ने इस मामले में कुछ नहीं किया.


‘आज दो, अभी दो, उत्तराखंड राज्य दो’ नारे के साथ हुए संघर्ष से उत्तराखंड तो मिला गया लेकिन सपनों का उत्तराखंड रामपुर तिराह कांड की फ़ाइलों के साथ दफ़न हो गया है. सही मायने में उत्तराखंडी तब तक सम्मान के साथ नहीं जी सकेंगे जब तक रामपुर तिहारा कांड के आरोपियों को सज़ा नहीं मिलती.

ये भी देखें: 

VIDEO: उत्तराखंड आंदोलन में खाई लाठियां, 23 साल से बिस्तर पर गुजार रहे हैं जिंदगी 

जानिए क्यों, सत्ता में आते ही बीजेपी हो या कांग्रेस, गैर हो जाता है गैरसैंण 

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देहरादून से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: October 2, 2019, 12:55 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर