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3.75 करोड़ रुपये काफ़ी नहीं... विधायक निधि बढ़वाकर 5 करोड़ करवाना चाहते हैं उत्तराखंड के विधायक

Kishore Kumar Rawat | News18 Uttarakhand
Updated: November 4, 2019, 2:09 PM IST
3.75 करोड़ रुपये काफ़ी नहीं... विधायक निधि बढ़वाकर 5 करोड़ करवाना चाहते हैं उत्तराखंड के विधायक
भाजपा विधायक खजानदास और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष प्रीतम सिंह दोनों विधायक निधि बढ़ाने की मांग कर रहे हैं.

जब उत्तराखंड (Uttarakhnad) राज्य बना था तब विधायक निधि (MLA LAD fund) 75 लाख रुपये हुआ करती थी. यह बढ़ते-बढ़ते 3.75 करोड़ रुपये हो गई है.

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देहरादून. अपने क्षेत्र का विकास करने के लिए उत्तराखंड के विधायक (Uttarakhand MLA) अब और पैसा चाहते हैं. जी हां साल दर साल विधायक निधि (MLA LAD Fund) खर्च करने में नाकाम रहने वाले विधायक चाहते हैं कि उनकी विधायक निधि बढ़ाई जाए. अब तक मिलने वाली 3.75 करोड़ रुपये की विधायक निधि विकास कार्यों (Development Work) के लिए कम पड़ने लगी है और इसलिए बीजेपी (BJP) और कांग्रेस (Congress) दोनों ही इसे बढ़ाकर 5 करोड़ करने की मांग कर रहे हैं.

महंगाई बढ़ गई है, इसलिए...

बहरहाल विधायक विधायक निधि बढ़ाने के लिए महंगाई का भी तर्क दे रहे हैं. राजपुर के बीजेपी विधायक खजानदास कहते हैं कि महंगाई बहुत बढ़ गई है और निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी महंगी आती है इसलिए विधायक निधि को बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये वार्षिक किया जाना चाहिए.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और चकराता से विधायक प्रीतम सिंह न सिर्फ़ विधायक निधि बढ़ाने की वकालत करते हैं बल्कि इसे पूरी तरह विधायक के विवेक पर छोड़ देने की भी मांग करते हैं. वह कहते हैं कि विधायक निधि खर्च करने को लेकर सफ़ाई, निर्माण जैसी पाबंदियां नहीं लगानी चाहिएं. हर क्षेत्र की मांग अलग होती है और विधायक को उसी के अनुरूप काम करने होते हैं.

जीएसटी हटाओ 

प्रीतम सिंह कहते हैं कि जितनी विधायक निधि होती है क्षेत्र के लोगों की मांग भी उतनी ही बढ़ जाती है और विधायक को लोगों की उम्मीद के मुताबिक ही काम भी करने होते हैं. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष विधायक निधि को जीएसटी से मुक्त रखने की मांग भी करते हैं.

धर्मपुर से बीजेपी विधायक विनोद चमोली इसका समर्थन करते हैं. वह कहते हैं कि अगर एक करोड़ रुपये विधायक निधि में बढ़ते हैं तो इसका कोई फ़ायदा ही नहीं होता, यह तो जीएसटी में चले जाते हैं.
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विधायक निधि 75  लाख से हुई 375 लाख 

जब उत्तराखंड राज्य बना था तब विधायक निधि 75 लाख रुपये हुआ करती थी. यह बढ़ते-बढ़ते 3.75 करोड़ रुपये हो गई है लेकिन प्रदेश में आज भी लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसते नज़र आते हैं.

हालांकि जब बात अपने फ़ायदे की होती है तो विधायकों को न बड़े आदर्श नज़र आते हैं, न विरोध की राजनीति. ध्यान रहे कि जब भी विधायकों के वेतन-भत्ते बढ़ने की बात आती है सत्ता पक्ष, विपक्ष एक हो जाते हैं.

चुनावी वर्ष में आती है काम 

हर विधायक को मिलने वाली इस विधायक निधि की ख़ास बात यह है कि साल ख़त्म होने के बावजूद यह धनराशि लैप्स नहीं होती और अगले साल में जुड़ जाती है.

इसका फ़ायदा यह होता है कि चुनाव के साल में विधायकों के पास पर्याप्त पैसा होता है जिसे वह अपनी सुविधानुसार इस्तेमाल कर सकते हैं. माननीय विधायक अब इसे बढ़ाना चाहते हैं.

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First published: November 4, 2019, 2:09 PM IST
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