17 साल में 5121 हुए गायब, तमाम कोशिशों के बावजूद नहीं लगा पता

अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व अपराध) अशोक कुमार कहते हैं कि पुलिस ऐसे लोगों की बरामदगी के लिए विशेष अभियान चलाएगी.

ETV UP/Uttarakhand
Updated: February 15, 2018, 3:09 PM IST
17 साल में 5121 हुए गायब, तमाम कोशिशों के बावजूद नहीं लगा पता
उत्तराखंड में पिछले 17 साल में 5,121 लोग गायब हो गए हैं जिनका अब तक कोई सुराग नहीं लग पाया है.
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Updated: February 15, 2018, 3:09 PM IST
उत्तराखंड में पिछले 17 साल में 5,121 लोग गायब हो गए हैं जिनका अब तक कोई सुराग नहीं लग पाया है. ज़ोनल इंटीग्रेटेड पुलिस नेटवर्क के आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड में हज़ारों लोग लापता हैं और तमाम कोशिशों के बावजूद नहीं मिल पाए हैं.

ज़ोनल इंटीग्रेटेड पुलिस नेटवर्क का मुख्य उद्देश्य अपराध और अपराधी सूचना साझा करना है. इसमें दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़ और उत्तराखंड राज्य के अपराध सम्बंधित आंकड़े होते हैं.

ज़ोनल इंटीग्रेटेड पुलिस नेटवर्क की वेबसाइट में उत्तराखंड में लापता हुए लोगों के आंकड़े बताते हैं कि पिछले 17 साल 5121 लोग गायब हुए लेकिन इनका आज तक कुछ पता नहीं चल पाया. सबसे ज्यादा लापता लोग देहरादून, हरिद्वार और नैनीताल के हैं.

लापता लोगों में सबसे ज़्यादा हरिद्वार के हैं. ज़िले के 1502 लोगों का अता-पता नहीं लग पाया है.  इसके बाद देहरादून 1147, ऊधम सिंह नगर 752 , नैनीताल के 502 , पौड़ी 291, टिहरी 275, चमोली के 210, रुद्रप्रयाग 100, पिथौरागढ़ 98, उत्तरकाशी और चंपावत के 79,  अल्मोड़ा के 75  और बागेश्वर के 11 लोग लापता हैं.

चिंता की बात यह है कि इन लापता लोगों को तलाशने में पुलिस ने तत्परता नहीं दिखाई और गुमशुदगी का मामला दर्ज कर खानापूर्ति कर ली. पिछले कई सालों से उत्तराखंड में मानव तस्करी और बाल श्रम पर काम कर रहे समाजसेवी ज्ञानेंद्र कुमार इस मामले को बेहद गंभीर बताते हैं.

ज्ञानेंद्र कुमार के मुताबिक इस तरह के मामलों में ह्यूमन ट्रैफिकिंग की आशंकाएं बढ़ जाती हैं. ज्ञानेंद्र कुमार के अनुसार मानव अंगों के लिए वयस्कों की ज़रूरत होती है. महिलाओं के लापता होने के मामले में तो ज्यादातर देह व्यापर में धकेले जाने की भी आशंका बढ़ जाती हैं.

लापता लोगों का पता न लगने के मामले पर राज्य के अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व अपराध) अशोक कुमार कहते हैं कि पुलिस ऐसे लोगों की बरामदगी के लिए विशेष अभियान चलाएगी. वह कहते हैं कि उत्तराखंड पुलिस ने गुम हुए बच्चों के लिए ऑपरेशन स्माइल अभियान चलाया था जिसके तहत कई बच्चों को तलाश कर उनके परिजनों को सौंपा गया था. अशोक कुमार कहते हैं कि वयस्कों के गायब होने पर मुक़दमा भी दर्ज किया जाता है और तलाश किया जाता है.

(देहरादून से किशोर रावत की रिपोर्ट)
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