एक शिक्षक जो गरीब बच्चों का हाथ पकड़कर भेज रहा है सफलता की ओर

ETV UP/Uttarakhand
Updated: January 12, 2018, 7:22 PM IST
एक शिक्षक जो गरीब बच्चों का हाथ पकड़कर भेज रहा है सफलता की ओर
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Updated: January 12, 2018, 7:22 PM IST
कहते हैं कि छोटी-छोटी कोशिशें बड़े बदलाव लाती हैं. देहरादून के एक शिक्षक पिछले कुछ साल से गरीब बच्चों का जीवन सुधारने की ऐसी ही छोटी-छोटी कोशिशें कर रहे हैं जिनसे उनके जीवन में बड़े बदलाव आए हैं.

देहरादून स्थित राजीव गांधी नवोदय विद्यालय के शिक्षक सुशील राणा 2004 से हर सर्दी की छुट्टी में गरीब बच्चों को नवोदय विद्यालय में दाखिला दिलाने के लिए निशुल्क प्रशिक्षण दे रहे हैं. पिछले 13 साल में उनके पढ़ाए 80-85 छात्रों का चयन नवोदय विद्यालय में हो गया है.

दरअसल इस सकारात्मक अभियान की शुरुआत एक विरोध को कम करने के लिए की गई थी. राजधानी के नालापानी, ननूरखेड़ा इलाके में जिस ज़मीन पर स्कूल बनाया गया वह ग्राम पंचायत की थी. कुछ स्थानीय लोगों ने स्कूल का यह कहकर विरोध किया कि इससे उन्हें क्या फ़ायदा होगा जब न उनके बच्चे पढ़ पाएंगे और न उन्हें रोज़गार मिलेगा.

navodaya vidyalaya special class

इस पर उस समय स्कूल के प्रिंसिपल ने सुशील राणा को कहा कि आप इन बच्चों को पढ़ाओ ताकि वह नवोदय विद्यालय की परीक्षा पास कर सकें. इस तरह 2004 से राणा ने फरवरी में होने वाली परीक्षाओं की तैयारी के लिए सर्दियों की छुट्टियों में 25 दिन की विशेष क्लास लगानी शुरू की.

राणा बताते हैं कि छठी कक्षा में प्रवेश के लिए होने वाली नवोदय विद्यालय की परीक्षा बहुत टेक्निकल होती है और सरकारी स्कूलों के स्तर को देखते हुए यह लगभग तय होता है कि उनके बच्चे शायद ही इनमें निकल पाएं. इसलिए पब्लिक स्कूलों के बच्चे परीक्षा में बाज़ी मार जाते हैं जो इन स्कूलों को खोलने के मूल विचार के ही ख़िलाफ़ है.

इसलिए सुशील राणा हर साल सर्दियों की छुट्टियों से पहले नज़दीक के सरकारी स्कूलों में जाकर पहले तो नवोदय परीक्षा के लिए फॉर्म बांटते हैं और फिर सर्दियों की छुट्टियों में उन सभी बच्चों को पढ़ाते हैं जिन्होंने फ़ार्म भर दिया है और वह पढ़ना चाहते हैं.

navodaya vidyalaya special class 2

वह गर्व के साथ बताते हैं कि उनके पढ़ाई 85 बच्चों का चयन नवोदय विद्यालय में हो चुका है और स्कूल से बाहर निकलकर कई बच्चे, सेना में और नागरिक प्रशासन में अधिकारी बन गए हैं.

अपनी छुट्टियां तक गरीब बच्चों का जीवन संवारने के लिए होम कर रहे सुशील कहते हैं कि जब किसी बच्चे को सफलता की सीढ़ियां चढ़ते देखते हैं तो उनकी मेहनत सफल हो जाती है और जब ये बच्चे आकर आदर, प्रेम से उनका धन्यवाद करते हैं तो इस अभियान में लगा हर पल, पसीने की हर बूंद की कीमत वसूल हो जाती है.

(देहदून से मनीष डंगवाल की रिपोर्ट)
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Updated: June 15, 2018 07:36 PM ISTबीकानेर में तृतीय श्रेणी शिक्षकों की शुरू हुई काउंसलिंग
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