जंगल है लेकिन जंगलराज नहीं: मां ने छोड़ा तो इंसान के हाथों बोतल से दूध पी रहा है हिरन का बच्चा

देहरादून ज़ू में मौज़ूद एक हिरन ने एक बच्चे को जन्म दिया लेकिन, पैदा होते ही मां ने बच्चे से किनारा कर लिया था.
देहरादून ज़ू में मौज़ूद एक हिरन ने एक बच्चे को जन्म दिया लेकिन, पैदा होते ही मां ने बच्चे से किनारा कर लिया था.

हिरन (बार्किंग डियर) के नौ महीने के बच्चे कि देखभाल पिछले नौ दिन से ज़ू स्टॉफ अपने बच्चे की तरह कर रहा है.

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देहरादून. विभिन्न प्रजातियों के करीब 300 वन्य जीवों वाले देहरादून ज़ू के स्टाफ को आजकल एक और नई जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है. यह जिम्मेदारी है हिरन (बार्किंग डियर) के नौ महीने के बच्चे के पालन पोषण की. ज़ू में मौज़ूद एक हिरन ने एक बच्चे को जन्म दिया लेकिन, पैदा होते ही मां ने बच्चे से किनारा कर लिया. यह देखकर ज़ू का स्टॉफ भी परेशान हो गया. ज़ू स्टाफ़ ने उसको बेबी बॉटल से दूध देना शुरू किया तो भूखा बच्चा दूध पर टूट पड़ा. पिछले नौ दिन से ज़ू स्टॉफ इस बेबी हिरन की अपने बच्चे की तरह देखभाल कर रहा है. अच्छी बात यह है कि बच्चा स्वस्थ है और अब उछल-कूद भी करने लगा है.

कमज़ोर बच्चों को छोड़ देती है मां 

सामान्य तौर पर चाहे इंसान हो या जानवर कोई भी मां अपने नवजात को नहीं छोड़ती. इंसान तो कभी लोकलाजवश या किसी और मजबूरी में अपने नवजात को छोड़ देते हैं लेकिन जानवर कि ऐसी कौन सी मजबूरी हो सकती है कि वह अपने नवजात को मरने के लिए छोड़ दे?



राजाजी टाइगर रिजर्व की सीनियर वेटरनरी ऑफिसर डॉक्टर. अदिति शर्मा अपने अनुभवों के आधार पर कहती हैं कि जानवरों में इस मामले में प्राकृतिक रूप से जन्मजात दिक्कतों को भांपने की क्षमता होती है. यह पाया गया है कि जानवर जिस बच्चे को छोड़ देते हैं उनमें जन्म से ही कोई न कोई कमी होती है.
जंगल में सर्वाविल फॉर द फिटेस्ट का नियम चलता है. जानवर को यह अहसास हो जाता है कि उसका नवजात जंगल की दुनिया में बच नहीं पाएगा तो वह उसे छोड़ देते हैं. ऐसे बच्चों को अतिरिक्त केयर की ज़रूरत होती है जो जंगल में संभव नहीं होती.

कमज़ोर हाथी बच्चे भी रह जाते हैं अकेले 

डॉक्टर अदिति राजाजी पार्क के चीला कैम्प में फालतू हाथियों की देखरेख भी करती हैं. यहां भी हाथियों के कई बच्चे लाए जाते हैं जिन्हें हाथी किन्ही कारणों से छोड़ देते हैं. वह कहती हैं कि वह यह बात अपने अनुभवों के आधार पर ही कह रही हैं. यह रिसर्च का विषय हो सकता है हालांकि ऐसा कहीं लिखा गया हो तो यह उनकी जानकारी में नहीं है.

डॉक्टर अदिति बताती हैं कि जंगल में अकेली पाई गई बेबी एलिफ़ेंट रानी अब ऐलिफेंट कैम्प में है. उसे हर पांच-छह महीने में कोई न कोई परेशानी हो जाती है. इसी तरह जंगल मे पाई गई बेबी एलिफेंट जूही बच नहीं पाई. ऐलिफ़ेंट कैंप में लाए जाने के तीन साल बाद उसकी मौत हो गई. इसी तरह बेबी ऐलिफ़ेंट योगी को भी जंगल से रेस्क्यू किया गया था. पाया गया कि उसे जन्म से ही अर्थराइटिस की शिकायत थी. एलिफेंट कैम्प में उसको हर संभव ट्रीटमेंट दिया गया लेकिन बाद में उसकी भी मौत हो गई.

यह भी हो सकती है वजह 

देहरादून ज़ू के सीनियर वेटनेरी ऑफिसर डॉक्टर राकेश नौटियाल कहते हैं कि कई बार देखा गया कि प्रसव के दौरान मादा जननांग से एक विशेष प्रकार का स्राव होता है और उसकी गंध से मेल फीमेल की ओर आकर्षित होता है. इस संघर्ष में मादा अपने बच्चे को दूध नहीं पिला पाती और उसे छोड़ देना पड़ता है.
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