लाइव टीवी

फिर उभरा राज्य आंदोलनकारियों का दर्द... पूछा- क्षैतिज आरक्षण पर चुप्पी क्यों साधे है सरकार

Rajesh Dobriyal | News18 Uttarakhand
Updated: November 28, 2019, 6:33 PM IST
फिर उभरा राज्य आंदोलनकारियों का दर्द... पूछा- क्षैतिज आरक्षण पर चुप्पी क्यों साधे है सरकार
देहरादून में राज्य आंदोलनकारी शहीद स्थल पर हर साल 2 अक्टूबर को राज्य आंदोलनकारी इकट्ठे होते हैं.

'यह सरकारों पर है कि वह स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों (Freedom fighters) की कितनी पीढ़ियों को ये पेंशन देना चाहती है लेकिन राज्य सरकार को तो उत्तराखंड (Uttarakhand) राज्य के लिए अपनी जवानी होम करने वालों के बारे में सोचना चाहिए.'

  • Share this:
देहरादून. बुधवार को लिए गए उत्तराखंड कैबिनेट के एक फ़ैसले ने राज्य आंदोलनकारियों के ज़ख़्मों को कुरेद दिया है. यह फ़ैसला स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों के बेटियों के बेटे-बेटियों को क्षैतिज आरक्षण के लिए विधेयक लाए जाने के संबंध हैं. हालांकि राज्य आंदोलनकारी साफ़ शब्दों में कहते हैं कि इस फ़ैसले का विरोध नहीं है लेकिन इससे यह सवाल तो उठता ही है कि राज्य आंदोलनकारियों के प्रति सरकार जानबूझकर चुप्पी क्यों साधे हुए है? इतनी उपेक्षा क्यों कर रही है?

आरक्षण का प्रस्ताव राजभवन में अटका?

राज्य आंदोलनकारी मंच के ज़िलाध्यक्ष प्रदीप कुकरेती कहते हैं राज्य आंदोलनकारियों को क्षैतिज आरक्षण की तर्ज पर आरक्षण दिए जाने का प्रस्ताव चार साल से राजभवन में अटका हुआ है, आखिर क्यों? इस दौरान न तो सरकारों ने कोशिश की कि वह राजभवन से इस प्रस्ताव को पास करवाएं न ही राज्यपाल इस पर कोई फ़ैसला ले रहे हैं.

pradeep kukreti, राज्य आंदोलनकारी प्रदीप कुकरेती कहते हैं कि पीसीएस से लेकर चपरासी तक कई राज्य आंदोलनकारी परीक्षा पास करने के बाद भी नौकरी नहीं पा सके हैं.

कुकरेती कहते हैं कि पूर्व राज्यपाल केके पॉल से राज्य आंदोलनकारी दो बार मिले थे और उनसे राज्य आंदोलनकारियों को आरक्षण के अध्यादेश को मंज़ूरी देने का आग्रह किया था. राज्यपाल के रूप में केके पॉल का कार्यकाल ख़त्म हो गया और नई राज्यपाल बेबी रानी मौर्य के कार्यकाल को भी एक साल से ज़्यादा हो गया है लेकिन राजभवन ने इस अध्यादेश पर कोई फ़ैसला नहीं किया.

राज्य आंदोलनकारी प्रदीप कुकरेती कहते हैं कि पीसीएस से लेकर चपरासी तक कई राज्य आंदोलनकारी परीक्षा पास करने के बाद भी नौकरी नहीं पा सके हैं.

प्रदीप कुकरेती कहते हैं कि उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच राज्यपाल से मिलने के लिए दो बार समय देने का आग्रह कर चुका है लेकिन बीते तीन महीने से कोई जवाब नहीं मिला है.
Loading...

पीसीएस अफ़सर भी अटक

नारायण दत्त तिवारी सरकार के नवंबर 2004 में शहीद और घायल राज्य आंदोलनकारियों को 10 फ़ीसदी क्षैतिज आरक्षण देने के नोटिफ़िकेशन जारी करने के बाद 850 से ज़्यादा राज्य आंदोलनकारियों को सरकारी नौकरियां मिली भीं. लेकिन 2011 में हाईकोर्ट के क्षैतिज आरक्षण के आदेश पर रोक लगाने देने के बाद से यह मामला अदालत में ऐसा उलझा है कि फिर किसी राज्य आंदोलनकारी को इसका लाभ नहीं मिला.

कुकरेती कहते हैं कि पीसीएस से लेकर चपरासी तक कई राज्य आंदोलनकारी परीक्षा पास करने के बाद भी नौकरी नहीं पा सके हैं. कुकरेती को हाईकोर्ट में केस हारने और राजभवन में कानून अटकने की वजह भी सरकारों की अनिच्छा ही लगती है.

ajay rana, अजय राणा कहते हैं बहुत सारे प्रतिभाशाली युवा इसलिए अपना करियर नहीं बना सके क्योंकि जिस समय बाकी लोग इस दिशा में सोच रहे थे तब वह राज्य आंदोलन में शामिल थे.
अजय राणा कहते हैं बहुत सारे प्रतिभाशाली युवा इसलिए अपना करियर नहीं बना सके क्योंकि जिस समय बाकी लोग इस दिशा में सोच रहे थे तब वह राज्य आंदोलन में शामिल थे.


राज्य में तो राज्य आंदोनकारियों को मिले प्राथमिकता

राज्य आंदोलनकारी और पत्रकार अजय राणा कहते हैं देश के स्तर पर तो स्वतंत्रता सेनानी के आश्रितों को पेंशन मिलनी चाहिए. यह सरकारों पर है कि वह उनकी कितनी पीढ़ियों को ये पेंशन देना चाहती है लेकिन राज्य सरकार को तो उत्तराखंड राज्य के लिए अपनों की जान गंवाने वाले, अपनी जवानी होम करने वालों के बारे में सोचना चाहिए.

राणा कहते हैं बहुत सारे प्रतिभाशाली युवा इसलिए अपना करियर नहीं बना सके क्योंकि जिस समय बाकी लोग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे तब वह राज्य आंदोलन में शामिल थे. तब वह लाठी-डंडे खा रहे थे और संघर्ष कर रहे थे. राज्य बनने के बाद भी ये युवा अपने अधिकारों के लिए संघर्ष ही कर रहे हैं. 19 साल में बहुत से युवाओं की नौकरी करने की उम्र ही निकल गई है.

राणा कहते हैं कि इस उत्तराखंड के लिए तो संघर्ष नहीं किया था.

ये भी देखें: 

अंहिसा दिवस पर रामपुर तिराहे की हिंसा की याद... राज्य आंदोलनकारियों ने मनाया काला दिवस

रामपुर तिराहा कांडः जानिए कोर्ट में 25 साल का संघर्ष... क्या था CBI रिपोर्ट में, कैसे हुई गवाह की हत्या

 

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देहरादून से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: November 28, 2019, 2:50 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...