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धरती के 'तीसरे ध्रुव' को वायु प्रदूषण से खतरा..., जानिए उत्तराखंड के किन शहरों में जहरीली हो गई हवा
Dehradun News in Hindi

Kishore Kumar Rawat | News18 Uttarakhand
Updated: January 29, 2020, 4:27 PM IST
धरती के 'तीसरे ध्रुव' को वायु प्रदूषण से खतरा..., जानिए उत्तराखंड के किन शहरों में जहरीली हो गई हवा
धूल कणों और कार्बन पार्टिकल के कारण ज्यादा खतरा है जो वाहनों और अनियंत्रित कंस्ट्रक्शन की वजह से हो रहा है.

पिछले पांच सालों में देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार, हल्द्वानी, काशीपुर और रुद्रपुर में वायु प्रदूषण के कारण कार्बन की मात्रा काफी बढ़ गई है.

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देहरादून. उत्तराखंड (Uttarakhand) जैसे हिमालयी राज्यों में वायु प्रदूषण (Air Pollution) बड़ी चिंता का सबब बनता जा रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह प्रदेश में वाहनों से निकलने धुआं तो है ही, इसके साथ ही पहाड़ों में कूड़ा जलाने और जंगल की आग (Forest fire) भी है जो वायु प्रदुषण को तेजी से बढ़ा रही है. इस प्रदूषण की वजह से हवा में कार्बन और अन्य जहरीली गैसों की मात्रा बढ़ गई है. बढ़ते वायु प्रदूषण से थर्ड पोल या तीसरा ध्रुव (Third pole) कहे जाने वाले हिमालय के ग्लेशियरों (Glacier) की सेहत खराब होने की आशंका बढ़ गई है.

डराने वाले आंकड़े
वायु प्रदूषण को उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मॉनीटरिंग के आंकड़े डराने वाले हैं. इनके अनुसार पिछले पांच सालों में देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार, हल्द्वानी, काशीपुर और रुद्रपुर में वायु प्रदूषण के कारण कार्बन की मात्रा काफी बढ़ गई है. यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स में ये मानकों से ज्यादा है.

सभी जिलों में पीएम-10 और पीएम-2.5 का स्तर काफी बढ़ा हुआ दर्ज किया गया है. पीएम-10 गाड़ियों के धुएं, जंगल की आग, कंस्ट्रक्शन से उड़ने वाले धूल कणों की वजह से बढ़ता है. एयर क्वालिटी इंडेक्स के मानक में हवा में 0 से 60 तक ही पीएम-10 को सुरक्षित माना जाता है, लेकिन उत्तराखंड के मैदानी इलाके वाले इन शहरों की हवा में इसका स्तर 170 से 200 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया है.

इससे भी खतरनाक और घातक पीएम2.5 है जो हवा में घुलने वाला छोटा पदार्थ है. हवा में इसका स्तर 0 से 40 तक ही सुरक्षित माना जाता है लेकिन इन शहरों की हवा में ये भी 120 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया है.

तुरंत चेतने की जरूरत
उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पर्यावरण अभियंता डॉ. अंकुर कंसल कहते हैं कि इस स्थिति को कंट्रोल करने की जरूरत है. डॉ. कंसल के मुताबिक धूल कणों और कार्बन पार्टिकल के कारण ज्यादा खतरा है, जो वाहनों और अनियंत्रित कंस्ट्रक्शन की वजह से हो रहा है.वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. डीपी डोभाल कहते हैं कि वायु प्रदूषण से वायुमंडल गर्म हो रहा है, यानी वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ रही है. इस ग्लोबल वार्मिंग का हिमालयी ग्लेशियरों पर सीधा असर हो रहा है. इसकी वजह से ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने की रफ़्तार बढ़ेगी जो एक बड़ा खतरा है.

वैज्ञानिक कह रहे हैं कि अगर समय रहते इस वायु प्रदूषण का हल नहीं निकला तो आने वाले समय में धरती का तापमान और तेजी से बढ़ेगा जिसका सीधा असर जलवायु पर पड़ेगा. इसके परिणाम दिखेंगे पानी की कमी से लेकर कई तरह की प्राकृतिक आपदाओं में.

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First published: January 29, 2020, 2:37 PM IST
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