अगले पांच साल में चमचमाते मिलेंगे उत्तराखंड के सभी नेशनल हाईवे
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अगले पांच साल में चमचमाते मिलेंगे उत्तराखंड के सभी नेशनल हाईवे
उत्तराखंड में 21 नेशनल हाईवे हैं, जिनमें से 6 नेशनल हाईवे का चारधाम रोड परियोजना के तहत चौड़ीकरण पहले से किया जा रहा है.

प्रदेश के सभी 15 नेशनल हाईवे को सात मीटर चौड़ा यानी टू-लेन में कन्वर्ट किए जाएंगे.

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देहरादून. बरसात में जर्जर हो चुकी सड़कों से जूझ रहे लोगों के लिए लोक निर्माण विभाग से अच्छी खबर आई है. लोक निर्माण विभाग की राष्ट्रीय राजमार्ग शाखा प्रदेश के सभी 15 नेशनल हाईवे को सात मीटर चौड़ा यानी टू-लेन में कन्वर्ट करने जा रही है. विभाग का दावा है कि अगले 5 साल के भीतर भीतर प्रदेश के सभी हाइवे टू-लेन में कन्वर्ट कर दिए जाएंगे. कोटद्वार से पौड़ी हाईवे की डीपीआर तो स्वीकृत तो हो भी चुकी है बाकी की डीपीआर पर काम किया जा रहा है.

सभी NH होंगे 2 लेन

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के चीफ़ इंजीनियर प्रमोद कुमार के अनुसार अगले पांच साल में सभी एनएच टू-लेन में कन्वर्ट कर दिए जाएंगे. उत्तराखंड में 21 नेशनल हाईवे हैं, जिनमें से 6 नेशनल हाईवे का चारधाम रोड परियोजना के तहत चौड़ीकरण पहले से किया जा रहा है.



बाकी 15 नेशनल हाईवे मौजूदा समय में सिंगल लेन या फिर डेढ़ लेन के हैं. इन्हें भी सात मीटर चौड़ा करने पर काम शुरू हो गया है. इसके लिए इन मार्गों की डीपीआर तैयार कराई जा रही है. कई मार्गों की तो डीपीआर बनकर तैयार हो गई हैं और उनमहें मंज़ूरी के लिए केंद्र को भेज भी दिया गया है. कुछ की डीपीआर प्रोसेस में है.
प्रमोद कुमार का कहना है कि डीपीआर तैयार करने में कम से कम साल भर का समय लगेगा. डीपीआर को मंज़ूरी मिलते ही 3 से 4 साल के भीतर सड़क का चौड़ीकरण कर लिया जाएगा. कोटद्वार-पौड़ी-सतपुली नेशनल हाइवे की डीपीआर तो बाकायदा तैयार भी हो चुकी है.

उत्तराखंड के मुख्य नेशनल हाईवे

  • कोटद्वार-सतपुली-पौड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग की डीपीआर बनकर तैयार हो चुकी है.

  • मोरी-त्यूणी-चकराता-मसूरी-चंबा-टिहरी-मलेथा राष्ट्रीय राजमार्ग.

  • अल्मोड़ा-बागेश्वर-चकोरी-बेरीनाग-गंगोलीहाट-घाट राष्ट्रीय राजमार्ग.

  • ज्योलीकोट-रानीखेत-ग्वालदम-गैरसैण-कर्णप्रयाग राष्ट्रीय राजमार्ग.

  • रामनगर-बुवाखाल राष्ट्रीय राजमार्ग.

  • विकासनगर-यमुनापुल-बड़कोट राष्ट्रीय राजमार्ग.



इनमें से कमोबेश सभी सड़कों को पूर्व केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री भुवनचंद्र खंडूरी के कार्यकाल में नेशनल हाईवे का दर्जा दिया गया था लेकिन उसके बाद इनका चौड़ीकरण नहीं हो पाया था. इन सड़कों को नेशनल हाइवे का दर्जा तो मिल चुका है लेकिन सड़कों की स्थिति स्टेट हाईवे से भी बदतर है.
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