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पहाड़ों पर डॉक्टरों को रोकने की एक और कोशिश, 20 जगह बन रहे ट्रांजिट हॉस्टल

Deepankar Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: November 21, 2019, 12:22 PM IST
पहाड़ों पर डॉक्टरों को रोकने की एक और कोशिश, 20 जगह बन रहे ट्रांजिट हॉस्टल
सरकारी नौकरी करने वाले डॉक्टर भी मोटी तन्ख्वाह पाने के बाद भी पहाड़ पर काम करने से कतराते हैं.

स्वास्थ्य विभाग को लगता है कि पहाड़ों में ट्रांजिट हॉस्टल होने से डॉक्टर वहां रुक सकते हैं. ऐसा इसलिए, क्योंकि हॉस्टल में रहने और खाने की व्यवस्था (Facilities in Transit Hostels) होगी. ऐसे में डॉक्टरों को परेशान नहीं होना पड़ेगा.

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देहरादून. उत्तराखंड में डॉक्टरों को पहाड़ पर काम करना पसंद नहीं है. उन्हें पहाड़ पसंद नहीं आते. सरकारी नौकरी करने वाले डॉक्टर भी मोटी तन्ख्वाह पाने के बाद भी पहाड़ पर काम करने से कतराते हैं. इतना ही नहीं उत्तराखंड से सस्ती फीस पर एमबीबीएस (MBBS) करने वाले नए नवेले डॉक्टरों को भी मैदानी इलाकों में दुकान चलाना अच्छा लगता है. पहाड़ के अस्पतालों में काम करना किसी को गवारा नहीं है. इन्हीं हालात को देखते हुए अब स्वास्थ्य विभाग (Health Department) अलग-अलग ज़िलों में 20 जगहों पर ट्रांजिट हॉस्टल (Transit Hostel) तैयार कर रहा है.

स्वास्थ्य विभाग को लगता है कि पहाड़ों में ट्रांजिट हॉस्टल होने से डॉक्टर (Doctors may stay at Transit Hostel) वहां रुक सकते हैं. ऐसा इसलिए, क्योंकि हॉस्टल में रहने और खाने की व्यवस्था (Facilities in Transit Hostels) होगी. ऐसे में डॉक्टरों को परेशान नहीं होना पड़ेगा. विभागीय अपर सचिव युगल किशोर पंत के मुताबिक तमाम जगहों पर कंस्ट्रक्शन का काम शुरू हो चुका है और जैसे-जैसे कंस्ट्रक्शन कंप्लीट होता रहेगा हॉस्टल हैंडओवर दिए जाते रहेंगे.

सफेद हाथी बनकर ना रह जाएं ट्रांजिट हॉस्टल !

उत्तराखंड बने 19 साल पूरे हो चुके हैं. इस दौरान कांग्रेस-बीजेपी दोनों का राज रहा, पर हालात ये रहे कि तमाम कोशिशों के बाद भी कोई सरकार डॉक्टरों को पहाड़ चढ़ाने के काम को अंजाम नहीं दे सकी. यही वजह है कि पहाड़ों में आज तक स्वास्थ्य व्यवस्था नहीं सुधारी जा सकी. ऐसे में ट्रांजिट हॉस्टल कहीं सफेद हाथी बनकर ना रह जाएं. बता दें कि इन ट्रांजिट हॉस्टल के कंस्ट्रक्शन में करोड़ों रुपए खर्च होंगे, पर डॉक्टर रहेंगे या नहीं ये बड़ा सवाल है.

उत्तराखंड के 13 ज़िलों में 9 जिले पूरी तरह पहाड़ी जिले हैं. इन जिलों में हेल्थ स्टैंडर्ड लागू होने के साथ डॉक्टर भी रह पाएं ये काम आसान नहीं है.


इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड्स लागू, पर कैसे सुधरेंगे हालात ?

उत्तराखंड में इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंर्डड्स लागू हो चुके हैं. मतलब ये कि प्राइमरी हेल्थ सेंटर से लेकर डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल का हाल सुधरेगा. सवाल है कि अस्पतालों का हाल सुधरने से क्या डॉक्टर पहाड़ों में काम करना शुरू कर देंगे ? दरअसल, उत्तराखंड के 13 ज़िलों में 9 जिले पूरी तरह पहाड़ी जिले हैं. इन जिलों में हेल्थ स्टैंडर्ड लागू होने के साथ डॉक्टर भी रह पाएं ये काम आसान नहीं है. अगर डॉक्टर ही काम करने को तैयार नहीं होंगे तो अच्छे स्टैंडर्ड वाले अस्पताल बनाकर स्वास्थ्य विभाग इलाज देगा कैसे ?
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First published: November 21, 2019, 12:10 PM IST
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