जानिए कौन हैं उत्तराखंड में बर्खास्त होने वाली पहली जज अनुराधा गर्ग, अब क्या हैं उनके पास विकल्प

न्याय विभाग के सूत्रों का कहना है कि जांच में पैसे के लेनदेन का मामला उनके बैंक अकाउंट से एस्टेब्लिश हो गया था जो भ्रष्टाचार ज़ाहिर करने का एक मजबूत आधार रहा.

Manish Kumar | News18 Uttarakhand
Updated: July 18, 2019, 7:36 PM IST
जानिए कौन हैं उत्तराखंड में बर्खास्त होने वाली पहली जज अनुराधा गर्ग, अब क्या हैं उनके पास विकल्प
नेैनीताल हाईकोर्ट ने भ्रष्टचार के आरोपों की जांच के बाद अनुराध गर्ग को बर्खास्त किया है. (फ़ाइल फ़ोटो)
Manish Kumar
Manish Kumar | News18 Uttarakhand
Updated: July 18, 2019, 7:36 PM IST
उत्तराखंड के न्यायिक इतिहास में पहली बार किसी जज को सेवा से बर्खास्त किया गया है. ACJM रहीं अनुराधा गर्ग पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप थे. 2005 बैच की न्यायिक अधिकारी अनुराधा गर्ग 2015 से निलंबित चल रही थीं. निलंबन के 4 साल बाद उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है. उनके खिलाफ की गई गोपनीय जांच में उनके ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोप सच पाए गए. नैनीताल हाई कोर्ट की फुल बेंच ने उनकी बर्खास्तगी की अनुशंसा उत्तराखंड शासन को भेजी थी जिसके आधार पर कार्मिक विभाग ने उनकी बर्खास्तगी का आदेश जारी कर दिया है.

जानिए कौन हैं अनुराधा गर्ग

बर्खास्त जज अनुराधा गर्ग का न्यायिक कामकाज से नाता बहुत पुराना है. उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर की रहने वाली अनुराधा के पिता ज़िले की कोर्ट में पेशकार थे.  उनके पति उत्तराखंड में ही वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी हैं यानी सीनियर सरकारी वकील. जब अनुराधा ने PCS-J की परीक्षा पास की थी तब इलाके में बहुत तहलका मचा था क्योंकि एक पेशकार की बेटी जज बनने जा रही थी.

2005 बैच में अनुराधा का सेलेक्शन हुआ था और उन्हें 2008 में जॉइनिंग मिली थी. अनुराधा को पहली बार जज के रूप में देहरादून में तैनाती मिली और वह बनीं अपर सिविल जज जूनियर डिवीज़न. इस पद पर उन्होंने काफी समय काम किया फिर उन्हें एक बड़ी जिम्मेदारी मिली. उन्हें सीबीआई की स्पेशल अदालत में स्पेशल जुडिशल मजिस्ट्रेट बना दिया गया.

निलंबन और बर्खास्तगी

2008 से 2011 तक अनुराधा ने देहरादून में अपनी सेवाएं दीं और 2011 में ही उन्हें प्रमोट करके काशीपुर भेज गया जहां वह बनीं अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट. यहीं से शुरु हुआ अनुराधा के गृह नक्षत्रों के खराब होने का दौर. 2015 में उनके खिलाफ हाई कोर्ट ने जांच शुरू की, पहली नज़र में भ्रष्टाचार का मामला पाते हुए जांच अधिकारी की रिपोर्ट पर अनुराधा को ससपेंड कर दिया गया.

पिछले चार साल से वह सस्पेंड थीं और आखिरकार उन्हें भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाते हुए नौकरी से निकाल दिया गया. न्याय विभाग के सूत्रों का कहना है कि जांच में पैसे के लेनदेन का मामला उनके बैंक अकाउंट से एस्टेब्लिश हो गया था जो भ्रष्टाचार ज़ाहिर करने का एक मजबूत आधार रहा.
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यह बता देना भी ज़रूरी है कि अनुराधा गर्ग को बर्खास्त करने का फ़ैसला हाईकोर्ट का  प्रशासनिक फ़ैसला है और अब उनके पास इसे नैनीताल हाइकोर्ट में चुनौती देने का विकल्प मौजूद है. अगर वह इस फ़ैसले को चुनौती देती हैं तो यह फ़ैसला न्यायिक प्रक्रिया में जाएगा.

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First published: July 18, 2019, 7:21 PM IST
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