आग की आफत से जूझ रहा उत्तराखंड, अधिकारी 'स्टडी टूर' पर निकले विदेश

सोमवार दोपहर तक कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व तक आग बढ़ गई, क्योंकि क्षेत्र में समृद्ध जैव विविधता और बंगाल के बाघों समेत कई जानवरों की प्रजातियां हैं.

News18 Uttarakhand
Updated: May 14, 2019, 10:50 AM IST
आग की आफत से जूझ रहा उत्तराखंड, अधिकारी 'स्टडी टूर' पर निकले विदेश
सांकेतिक तस्वीर
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Updated: May 14, 2019, 10:50 AM IST
उत्तराखंड में हर साल की तरह इस बार भी आग चारों तरफ तांडव मचा रही है. आलम ये है कि राज्य के करीब सभी पहाड़ी जिलों में करीब 900 हेक्टेयर जंगल जल रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ यूनाइटेड किंगडम और पोलैंड के लिए उत्तराखंड के वन अधिकारियों के एक अध्ययन दौरे (स्टडी टूर) पर सवाल उठ रहे हैं. लोगों में प्रदेश में आफत के बीच अधिकारियों का स्टडी टूर पर जाना गले नहीं उतर रहा है.

वन विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक बीते सोमवार को दोपहर तक कुल 711 आग लगने की घटनाएं हुईं, जिससे 984 हेक्टेयर जंगल नष्ट हो गए. इस क्षेत्र में ओक, देवदार और पेड़ों की अन्य किस्में शामिल थीं. तापमान में वृद्धि से हुए विस्फोट के कारण वन विभाग को 16 लाख रुपए तक के नुकसान का विश्लेषण किया गया है.



सोमवार दोपहर तक कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व तक आग बढ़ गई. क्षेत्र में समृद्ध जैव विविधता और बंगाल के बाघों समेत कई जानवरों की प्रजातियां हैं. इस विशाल विनाश के बावजूद 3 शीर्ष भारतीय वन सेवा (IFS) के अधिकारी- मुख्य वन संरक्षक विवेक पांडेय, वन संरक्षक पराग मधुकर धकाते और प्रभागीय वनाधिकारी नीतीश मणि त्रिपाठी स्टडी टूर के लिए 2 सप्ताह के लिए यूनाइटेड किंगडम और पोलैंड के लिए रवाना हुए हैं.

सरकारी आदेश में लिखा गया है कि अधिकारी नंधौर वन्यजीव अभयारण्य में बाघ के पदचिह्न का अध्ययन करने के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) और जूलॉजिकल सोसायटी ऑफ लंदन के साथ एक संयुक्त कार्यक्रम में भाग लेंगे. इस दौरे को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (HoFF) जयराज ने मंजूरी दी है, जिन्होंने एक रिकॉर्डेड संदेश में स्थानीय लोगों को जंगलों की देखभाल करने की सलाह दी है.

जयराज ने अपने एक ऑडियो में कहा है कि जंगल स्थानीय लोगों के हैं. इसलिए वे खुद भी जंगलों की अच्छी देखभाल करें और आग पर काबू पाने में उनकी मदद करें. वन विभाग ने उन लोगों के लिए 5,000 रुपए के इनाम की भी घोषणा की है, जो जंगल में आग लगाने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति के बारे में बताएंगे. हालांकि, यह घोषणा स्थानीय निवासियों के बीच कोई दिलचस्पी पैदा करने में विफल रही है.

इधर, अधिकारियों के दौरे के लिए रवाना होते ही, आग गढ़वाल क्षेत्र में चमोली जिलों के अंदरूनी इलाकों में फैल गई. हालांकि, नैनीताल में बारिश के एक छोटे से दौर ने कुछ राहत जरूर दी है. इसने करीब 80 हेक्टेयर भूमि में आग को बुझा दिया है.

गौरतलब है कि उत्तराखंड में हर साल हजारों हेक्टेयर हरे-भरे जंगल धधकने से प्रभावित होते हैं. हाल ही में विभाग के एक आरटीआई जवाब से पता चला है कि उत्तराखंड को 2000 में उत्तर प्रदेश से अलग किए जाने के बाद आग की घटनाओं में 15 मिलियन रुपए से अधिक के 44,000 हेक्टेयर जंगल आग की चपेट में आ गए थे.
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