जितना दिख रहा है उससे ज़्यादा हो सकता है अटल आयुष्मान योजना में घपला

अटल आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़े के नाम पर अबतक 5 अस्पतालों पर एक्शन लिया गया है.

Deepankar Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: April 24, 2019, 5:05 PM IST
जितना दिख रहा है उससे ज़्यादा हो सकता है अटल आयुष्मान योजना में घपला
राज्य में दिसंबर 2018 के अंत में अटल आयुष्मान योजना का शुभारंभ किया गया था.
Deepankar Bhatt
Deepankar Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: April 24, 2019, 5:05 PM IST
अटल आयुष्मान योजना त्रिवेंद्र सरकार की बड़ी उपलब्धि है जिसे राज्य सरकार ने लोकसभा चुनाव में पूरा कैश करने कि कोशिश भी की है. लेकिन ऐसा लगता है कि इस योजना को लागू करने से पहले ठीक से होमवर्क नहीं किया गया था. इसीलिए अटल आयुष्मान योजना में मरीज़ों को फर्जी तरीके से सरकारी से प्राइवेट अस्पतालों में रेफ़र किए जाने का खेल चलता रहा जो अब पकड़ में आया है. लेकिन जितना पकड़ा गया है फ़र्ज़ीवाड़ा उससे कई गुना होने की आशंका है.

CM ने किया ‘अटल आयुष्मान योजना’ का शुभारंभ, 5 लाख रुपये तक मुफ़्त इलाज

अटल आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़े के नाम पर अबतक 5 अस्पतालों पर एक्शन लिया गया है. फर्जीवाड़ा यह है कि सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों ने बगैर ज़रूरत के मरीज़ों को प्राइवेट अस्पतालों के लिए रेफर किया.

अटल आयुष्मान योजना: सरकारी अस्पताल से रेफर किए जाने के बाद ही प्राइवेट में इलाज संभव

 

इस फ़र्ज़ीवाडे से राज्य में इस योजना की एक और ख़ामी सामने आई है. राज्य में किसी भी बीमारी के लिए सरकारी अस्पतालों को आधा ही पैसा मिलता है जबकि निजी अस्पतालों को पूरा. यूं समझें कि अगर कैटरेक्ट का ऑपरेशन होना है तो अटल आयुष्मान योजना में इसके लिए 5 हज़ार रुपये देने का प्रावधान है. सरकारी अस्पताल में इलाज होगा तो अटल आयुष्मान योजना से उसे ढाई हज़ार रुपये मिलेंगे जबकि निजी अस्पताल को पूरे 5000.

ज़ाहिर है सरकारी अस्पताल में कमाई की कोई गुंजाइश नहीं है जबकि निजी अस्पतालों के लिए यह एक लुभावना मौका है. जितने ज़्यादा रेफ़रल मिलेंगे उतनी कमाई ज़्यादा होगी और दूसरी ओर कमीशन की गुंजाइश भी बढ़ेगी.
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स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार अटल आयुष्मान योजना की आड़ में कई प्राइवेट अस्पताल पैकेज के अलावा मरीज़ की जेब भी काट रहे हैं. हालांकि ऐसे फ़र्ज़ीवाड़े के ख़िलाफ़ निजी अस्पतालों से भी आवाज़ उठने लगी है. सीएमआई हॉस्पिटल के चेयरमैन आरके जैन कहते हैं कि एक-आध गलत तत्व तो सभी जगह होते हैं. सरकार को ऐसे अस्पतालों और डॉक्टरों का वेरिफिकेशन करवाना चाहिए और गलती पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.

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अटल आयुष्मान योजना सबको स्वास्थ्य देने की दिशा में एक बड़ा कदम है लेकिन इतिहास ने सिखाया है कि बड़ी और अच्छी योजनाएं सही क्रियान्वयन के अभाव में बड़ी ग़लतियां साबित होती रही हैं. सरकार को ध्यान रखना होगा कि अटल आयुष्मान योजना कुछ लोगों के लिए अंधी कमाई का ज़रिया न बन जाए वरना इसका सफल होना आसान नहीं होगा.

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First published: April 24, 2019, 4:58 PM IST
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