खुले में गिरे कूड़े से आबादी की ओर खिंचे चले आ रहे हैं भालू... 1600 से ज़्यादा लोगों पर किए हैं हमले

उत्तराखंड के पहाड़ों में भालुओं का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
उत्तराखंड के पहाड़ों में भालुओं का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

बस्तियों के आस-पास आसानी से खाना मिल जाने से भालू जंगल छोड़ आबादी क्षेत्रों की ओर खिंचे चले आ रहे हैं.

  • Share this:
देहरादून. कुछ जानकारों का कहना है कि उत्तराखंड मानव-वन्यजीव संघर्ष के लिहाज से सबसे ज़्यादा संवेदनशील इलाका है. हर साल जंगल जानवरो के हमलों में बड़ी संख्या में लोग जान गंवा देते हैं. आबादी में घुसकर सबसे ज़्यादा हमले तेंदुए करते हैं और फिर बाघ. लेकिन भालू भी हमलावर होते जा रहे हैं. वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार साल 2000 से लेकर अभी तक 1,631 लोग भालुओं के हमले में घायल हुए हैं. इस दौरान 58 लोग भालू के हमले में मारे भी गए हैं.

कूड़े के ढेर में खाने की तलाश

उत्तराखंड के पहाड़ों में भालुओं का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है. इसी महीने चमोली के जोशीमठ के रवि ग्राम से बस्ती के आस-पास मंडराते तीन भालुओं का वीडियो सामने आया था. अब भालुओं का एक और वीडियो चमोली से सामने आया है. इसमें पांच भालू पेट की आग शांत करने के लिए कूड़े के ढेर में खाने की तलाश कर रहे हैं.



उत्तराखंड के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन जेएस सुहाग का कहना है कि भालूओं के हमले की बढ़ती घटनाओं के पीछे खुले में फेंका गया कूड़ा भी एक बड़ा कारण हैं. बस्तियों के आस-पास आसानी से खाना मिल जाने से भालू जंगल छोड़ आबादी क्षेत्रों की ओर खिंचे चले आ रहे हैं.
ग्लोबल वॉर्मिंग का असर 

दूसरा बड़ा कारण है कि भालू का हाइबरनेशन में जाने का समय कम होता जा रहा है. वैज्ञानिक इसके पीछे ग्लोबल वार्मिंग को भी एक वजह मानते हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि पर्याप्त मात्रा में बर्फ़बारी न होने के कारण भालुओं को शीत का अहसास नहीं हो रहा है. यही कारण है कि वे देरी से हाइबरनेशन में जा रहे हैं.



वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार साल 2000 से लेकर अभी तक 1,631 लोग भालुओं के हमले में घायल हुए हैं. इस दौरान 58 लोग भालू के हमले में मारे भी गए. इससे चिंतित उत्तराखंड सरकार पिछले हप्ते ही चमोली और पिथौरागढ़ जिलों में एक-एक भालू रेस्क्यू सेंटर खोंलने की घोषणा कर चुकी है. सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना था कि फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को अब भालूओं के बढ़ते हमलों को लेकर भी प्लान करना चाहिए.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज