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बीटल्स का जलवा अब भी है कायम... ज़ीरो इनवेस्टमेंट पर लाखों रुपये का राजस्व दे रही है चौरासी कुटी

Sunil Navprabhat | News18 Uttarakhand
Updated: January 10, 2020, 6:18 PM IST
बीटल्स का जलवा अब भी है कायम... ज़ीरो इनवेस्टमेंट पर लाखों रुपये का राजस्व दे रही है चौरासी कुटी
देखिए राजाजी पार्क के पांच गेटों में से सबसे अधिक टूरिस्ट आकर्षित करने वाले चीला गेट को भी चौरासी कुटी ने इनकम के मामले में पीछे छोड़ दिया.

2018 में पूरे राजाजी पार्क में करीब डेढ़ हजार विदेशी टूरिस्ट आए तो अकेले चौरास कुटिया में आने वाले टूरिस्टों की संख्या तीन हजार से अधिक थी.

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देहरादून. उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार 13 डिस्ट्रिक्ट, 13 डेस्टिनेशन जैसी दर्जनों योजनाएं संचालित कर रही हैं लेकिन उसके अनुपात में परिणाम उत्साहजनक नहीं है. इसके उलट खंडहर मात्र रह गई ऋषिकेश स्थित चौरासी कुटी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. ये कुटी ज़ीरो इन्वेस्टमेंट पर लाखों का राजस्व दे रही है.

बीटल्स का ध्यान केंद्र 

ऋषिकेश से सात किलोमीटर की दूरी पर स्थित चौरासी कुटी की स्थापना भावातीत योग ध्यान के प्रणेता महर्षि महेश योगी ने साठ के दशक में की थी. यहां 84 छोटी-छोटी कुटियां बनाई गई हैं. साठ के दशक में मशहूर ब्रिटिश रॉक बैंड बीटल्स के सदस्य यहां पहुंचे तो चौरासी कुटी, ऋषिकेश और योग दुनिया भर में मशहूर हो गए थे.

राजाजी पार्क की स्थापना के बाद महर्षि महेश योगी को ये क्षेत्र छोड़ना पड़ा और 1984 तक ये क्षेत्र पूरी तरह वीरान हो गया. वास्तुकला का यह बेजोड़ नमूना भले ही आज खंडहर भर रह गया हो लेकिन पर्यटकों के लिए आज भी इसका आकर्षण कम नहीं नहीं हुआ है और यह पता चला 2015 में, जब इसे पर्यटकों के लिए दोबारा खोला गया.

विदेशी पर्यटकों की पसंद 

इसकी लोकप्रियता देखिए राजाजी पार्क के पांच गेटों में से सबसे अधिक टूरिस्ट आकर्षित करने वाले चीला गेट को भी चौरासी कुटी ने इनकम के मामले में पीछे छोड़ दिया. 2018 में चीला गेट की पर्यटकों से इनकम जहां 68 लाख थी, वहीं चौरासी कुटी की आय 78 लाख पहुंच चुकी थी.

चौरासी कुटी विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद है. 2018 में पूरे राजाजी पार्क में करीब डेढ़ हजार विदेशी टूरिस्ट आए तो अकेले चौरास कुटिया में आने वाले टूरिस्टों की संख्या तीन हजार से अधिक थी. इसे देखते हुए पार्क प्रशासन अब यहां विदेशी पर्यटकों के लिए निर्धारित छह सौ रुपये शुल्क को आधा करने जा रहा है.सौंदर्यीकरण शुरु 

चौरासी कुटी की लोकप्रियता को देखते हुए नेशनल मिशन ऑफ हिमालयन स्टडीज के सहयोग से यहां ढाई करोड़ रुपये की लागत से सौंदर्यीकरण का काम चल रहा है. पगडंडी के साथ रही नेचर पाथ बनाए जा रहे हैं. जिस हॉल में बीटल्स ने योग और ध्यान लगाया था. उसका भी सौंदर्यीकरण किया जा रहा है. भविष्य में यहां बायोडायवर्सिटी पार्क बनाने की भी योजना है.

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First published: January 10, 2020, 6:15 PM IST
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